पहली रोटी गाय को, आखिरी कुत्ते को देने की परंपरा क्यों मानी जाती है शुभ? जानें यहां

धर्म डेस्क

By Rohit.P
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शास्त्रों में पहली रोटी गाय और आखिरी रोटी कुत्ते को खिलाने की परंपरा बताई गई है। जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और फायदे।

हिंदू धर्म और शास्त्रों में रसोई से जुड़ी कई परंपराएं हैं। इनमें पहली और आखिरी रोटी का खास महत्व है। आज भी कई घरों में पहली रोटी गाय के लिए बनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए पहली रोटी खिलाने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। लेकिन आखिरी रोटी के लिए भी एक विशेष नियम है, जिसके बारे में बहुत लोग नहीं जानते।

शास्त्रों के मुताबिक, रसोई की आखिरी रोटी कुत्ते को खिलानी चाहिए। ऐसा करने से परिवार पर आने वाले संकट टलते हैं और घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कुत्ते को यमराज का दूत माना जाता है। इसलिए आखिरी रोटी उसे खिलाने की परंपरा काफी पुरानी है। कहा जाता है कि नियमित रूप से कुत्ते को आखिरी रोटी देने से अकाल मृत्यु का भय कम होता है और व्यक्ति को पुण्य फल मिलता है।

धार्मिक जानकारों के अनुसार, कुत्ता भगवान भैरव की सवारी भी माना जाता है, इसलिए उसे भोजन कराना शुभ समझा जाता है। कई लोग खासतौर पर शनिवार और रविवार को कुत्तों को रोटी खिलाते हैं। ऐसा मानते हैं कि इससे शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव कम होता है। हालांकि, ज्योतिष और धार्मिक उपायों को हमेशा आस्था के नजरिए से देखा जाता है।

घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कि आखिरी रोटी को कूड़े में नहीं फेंकना चाहिए। इसे किसी जानवर को जरूर खिलाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि अन्न का अपमान करने से घर में बरकत कम होती है। यही वजह है कि गांवों और छोटे शहरों में लोग रोटी का एक हिस्सा गाय, कुत्ते या अन्य जानवरों के लिए अलग रखते हैं।

 

रोटी बनाने की भी कई परंपराएं हैं। जैसे, परिवार के सदस्यों की संख्या के हिसाब से रोटियाँ नहीं बनानी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से घर में धन-धान्य की कमी आ सकती है। इसलिए कई लोग 2-3 रोटियां ज्यादा बना लेते हैं और बाद में उन्हें पशुओँ को खिलाते हैं। इसके अलावा, रात का बचा हुआ आटा इस्तेमाल न करने की सलाह भी दी जाती है। कहा जाता है कि बासी आटा नकारात्मकता बढ़ा सकता है, और इसके पीछे स्वच्छता और स्वास्थ्य कारण भी हैं।

आज के समय में, लोग इन परंपराओं को अलग-अलग नजरियों से देखते हैं, लेकिन कई परिवारों में ये नियम अब भी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। इसे केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि पशु सेवा और अन्न के सम्मान से भी जोड़ा जाता है।

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14 May 2026 By Rohit.P

पहली रोटी गाय को, आखिरी कुत्ते को देने की परंपरा क्यों मानी जाती है शुभ? जानें यहां

धर्म डेस्क

हिंदू धर्म और शास्त्रों में रसोई से जुड़ी कई परंपराएं हैं। इनमें पहली और आखिरी रोटी का खास महत्व है। आज भी कई घरों में पहली रोटी गाय के लिए बनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए पहली रोटी खिलाने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। लेकिन आखिरी रोटी के लिए भी एक विशेष नियम है, जिसके बारे में बहुत लोग नहीं जानते।

शास्त्रों के मुताबिक, रसोई की आखिरी रोटी कुत्ते को खिलानी चाहिए। ऐसा करने से परिवार पर आने वाले संकट टलते हैं और घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कुत्ते को यमराज का दूत माना जाता है। इसलिए आखिरी रोटी उसे खिलाने की परंपरा काफी पुरानी है। कहा जाता है कि नियमित रूप से कुत्ते को आखिरी रोटी देने से अकाल मृत्यु का भय कम होता है और व्यक्ति को पुण्य फल मिलता है।

धार्मिक जानकारों के अनुसार, कुत्ता भगवान भैरव की सवारी भी माना जाता है, इसलिए उसे भोजन कराना शुभ समझा जाता है। कई लोग खासतौर पर शनिवार और रविवार को कुत्तों को रोटी खिलाते हैं। ऐसा मानते हैं कि इससे शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव कम होता है। हालांकि, ज्योतिष और धार्मिक उपायों को हमेशा आस्था के नजरिए से देखा जाता है।

घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कि आखिरी रोटी को कूड़े में नहीं फेंकना चाहिए। इसे किसी जानवर को जरूर खिलाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि अन्न का अपमान करने से घर में बरकत कम होती है। यही वजह है कि गांवों और छोटे शहरों में लोग रोटी का एक हिस्सा गाय, कुत्ते या अन्य जानवरों के लिए अलग रखते हैं।

 

रोटी बनाने की भी कई परंपराएं हैं। जैसे, परिवार के सदस्यों की संख्या के हिसाब से रोटियाँ नहीं बनानी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से घर में धन-धान्य की कमी आ सकती है। इसलिए कई लोग 2-3 रोटियां ज्यादा बना लेते हैं और बाद में उन्हें पशुओँ को खिलाते हैं। इसके अलावा, रात का बचा हुआ आटा इस्तेमाल न करने की सलाह भी दी जाती है। कहा जाता है कि बासी आटा नकारात्मकता बढ़ा सकता है, और इसके पीछे स्वच्छता और स्वास्थ्य कारण भी हैं।

आज के समय में, लोग इन परंपराओं को अलग-अलग नजरियों से देखते हैं, लेकिन कई परिवारों में ये नियम अब भी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। इसे केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि पशु सेवा और अन्न के सम्मान से भी जोड़ा जाता है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/why-is-it-considered-auspicious-to-give-the-first-bread/article-53313

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