बर्फीली जमीन से वर्ल्ड कप तक, श्रेयस मोव्वा ने कनाडा टीम में बनाई पहचान

स्पोर्ट्स डेस्क

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कर्नाटक से कनाडा तक का सफर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रेयस मोव्वा टी-20 वर्ल्ड कप में विकेटकीपर-बल्लेबाज की भूमिका निभा रहे

जहां आइस हॉकी सबसे लोकप्रिय खेल है और साल का बड़ा हिस्सा बर्फ से ढका रहता है, वहां से एक भारतीय मूल का खिलाड़ी क्रिकेट की वैश्विक प्रतियोगिता में अपनी पहचान बना रहा है। कर्नाटक में जन्मे श्रेयस मोव्वा इस समय कनाडा की राष्ट्रीय टीम के प्रमुख विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में टी-20 वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं।

32 वर्षीय श्रेयस का क्रिकेट सफर भारत से शुरू हुआ। उन्होंने 2015 में कर्नाटक की अंडर-23 टीम का प्रतिनिधित्व किया। उसी दौर में उनके साथ अभिनव मनोहर और प्रवीण दुबे जैसे खिलाड़ी भी थे, जो बाद में बड़े मंच तक पहुंचे। हालांकि, राज्य की सीनियर टीम में जगह नहीं मिलने के बाद उन्होंने पढ़ाई के लिए 2016 में कनाडा का रुख किया और मॉन्ट्रियल की कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया।

कनाडा के क्यूबेक प्रांत में क्रिकेट सुविधाएं सीमित हैं। वहां मई से सितंबर तक ही बाहरी मैदानों पर अभ्यास संभव है। बाकी समय कड़ाके की सर्दी और बर्फबारी के कारण खिलाड़ियों को इंडोर नेट्स में तैयारी करनी पड़ती है। श्रेयस के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर के टर्फ विकेटों की कमी बड़ी चुनौती है और अधिकांश मुकाबले मैटिंग विकेट पर खेले जाते हैं।

इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने 2021 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया और 2009 के बाद क्यूबेक से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले पहले खिलाड़ी बने। अब तक वे कनाडा के लिए 24 एकदिवसीय और 26 टी-20 मुकाबले खेल चुके हैं।

श्रेयस पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी हैं। वे बताते हैं कि टीम से बाहर रहने के दौरान उनकी नौकरी ने मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद की। कंपनी उन्हें क्रिकेट खेलने की अनुमति देती है और वे अक्सर रात में काम कर इसकी भरपाई करते हैं। उनके लिए क्रिकेट जुनून है, जबकि इंजीनियरिंग पेशा।

टी-20 वर्ल्ड कप में वे कनाडा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। टीम का अगला मुकाबला अफगानिस्तान से होना है, जहां स्पिन अनुकूल परिस्थितियों में उन्हें अपनी बल्लेबाजी कौशल दिखाने का अवसर मिलेगा।

यह कहानी केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस प्रतिबद्धता की मिसाल है, जो सीमित संसाधनों और कठिन मौसम के बावजूद लक्ष्य को हासिल करने की राह बनाती है।

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18 Feb 2026 By Nitin Trivedi

बर्फीली जमीन से वर्ल्ड कप तक, श्रेयस मोव्वा ने कनाडा टीम में बनाई पहचान

स्पोर्ट्स डेस्क

जहां आइस हॉकी सबसे लोकप्रिय खेल है और साल का बड़ा हिस्सा बर्फ से ढका रहता है, वहां से एक भारतीय मूल का खिलाड़ी क्रिकेट की वैश्विक प्रतियोगिता में अपनी पहचान बना रहा है। कर्नाटक में जन्मे श्रेयस मोव्वा इस समय कनाडा की राष्ट्रीय टीम के प्रमुख विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में टी-20 वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं।

32 वर्षीय श्रेयस का क्रिकेट सफर भारत से शुरू हुआ। उन्होंने 2015 में कर्नाटक की अंडर-23 टीम का प्रतिनिधित्व किया। उसी दौर में उनके साथ अभिनव मनोहर और प्रवीण दुबे जैसे खिलाड़ी भी थे, जो बाद में बड़े मंच तक पहुंचे। हालांकि, राज्य की सीनियर टीम में जगह नहीं मिलने के बाद उन्होंने पढ़ाई के लिए 2016 में कनाडा का रुख किया और मॉन्ट्रियल की कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया।

कनाडा के क्यूबेक प्रांत में क्रिकेट सुविधाएं सीमित हैं। वहां मई से सितंबर तक ही बाहरी मैदानों पर अभ्यास संभव है। बाकी समय कड़ाके की सर्दी और बर्फबारी के कारण खिलाड़ियों को इंडोर नेट्स में तैयारी करनी पड़ती है। श्रेयस के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर के टर्फ विकेटों की कमी बड़ी चुनौती है और अधिकांश मुकाबले मैटिंग विकेट पर खेले जाते हैं।

इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने 2021 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया और 2009 के बाद क्यूबेक से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले पहले खिलाड़ी बने। अब तक वे कनाडा के लिए 24 एकदिवसीय और 26 टी-20 मुकाबले खेल चुके हैं।

श्रेयस पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी हैं। वे बताते हैं कि टीम से बाहर रहने के दौरान उनकी नौकरी ने मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद की। कंपनी उन्हें क्रिकेट खेलने की अनुमति देती है और वे अक्सर रात में काम कर इसकी भरपाई करते हैं। उनके लिए क्रिकेट जुनून है, जबकि इंजीनियरिंग पेशा।

टी-20 वर्ल्ड कप में वे कनाडा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। टीम का अगला मुकाबला अफगानिस्तान से होना है, जहां स्पिन अनुकूल परिस्थितियों में उन्हें अपनी बल्लेबाजी कौशल दिखाने का अवसर मिलेगा।

यह कहानी केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस प्रतिबद्धता की मिसाल है, जो सीमित संसाधनों और कठिन मौसम के बावजूद लक्ष्य को हासिल करने की राह बनाती है।

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