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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की चमकी किस्मत, वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह ने दिलाया सिल्वर मेडल
स्पोर्ट्स डेस्क
मेंस 60 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में 264 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरा स्थान किया हासिल, भारत के खाते में अब एक रजत और एक कांस्य पदक
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय दल का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के चौथे दिन भारत ने अपना दूसरा पदक जीतते हुए मेडल तालिका में मजबूती हासिल की। भारतीय वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह ने पुरुषों की 60 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में दमदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। पूरे मुकाबले के दौरान उन्होंने लगातार बेहतरीन लिफ्ट लगाईं और कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरे स्थान पर रहे।
भारतीय खिलाड़ी का प्रदर्शन शुरुआत से ही प्रभावशाली रहा। स्नैच राउंड में उन्होंने आत्मविश्वास के साथ लिफ्ट पूरी की और शुरुआती बढ़त बनाने में सफलता हासिल की। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में भी उन्होंने शानदार तकनीक और संतुलन का प्रदर्शन किया। दोनों राउंड में लगातार सफल प्रयासों की बदौलत उनका कुल वजन 264 किलोग्राम तक पहुंचा, जिससे उन्होंने रजत पदक सुनिश्चित कर लिया।
ऋषिकांत सिंह ने स्नैच में 121 किलोग्राम वजन उठाया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 143 किलोग्राम का सफल प्रयास किया। दोनों चरणों के संयुक्त प्रदर्शन ने उन्हें प्रतियोगिता में दूसरे स्थान तक पहुंचाया। मुकाबले के दौरान उनकी लिफ्टिंग तकनीक, संतुलन और आत्मविश्वास ने दर्शकों के साथ विशेषज्ञों का भी ध्यान आकर्षित किया।
इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक मलेशिया के अनिक कसदान ने अपने नाम किया। उन्होंने कुल 266 किलोग्राम वजन उठाकर पहला स्थान हासिल किया। स्वर्ण और रजत पदक के बीच केवल दो किलोग्राम का अंतर रहा, जिससे मुकाबला बेहद रोमांचक बन गया। केन्या के मबोया ने 260 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीता और तीसरे स्थान पर रहे।
पूरी प्रतियोगिता के दौरान शीर्ष तीन खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। शुरुआती राउंड से लेकर अंतिम प्रयास तक पदकों की तस्वीर लगातार बदलती रही। हर सफल लिफ्ट के साथ अंकतालिका में बदलाव होता रहा, लेकिन ऋषिकांत सिंह ने अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखी और अंत तक पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।
भारतीय दल के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रतियोगिता के शुरुआती दिनों में खिलाड़ियों पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव था। चौथे दिन मिला यह रजत पदक भारतीय टीम का मनोबल बढ़ाने वाला साबित हुआ। टीम प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ ने भी खिलाड़ी के प्रदर्शन की सराहना की।
इससे पहले प्रतियोगिता के तीसरे दिन भारत ने अपना पहला पदक जीता था। पुरुष पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया था। उनकी उपलब्धि के बाद भारतीय दल को दूसरे पदक का इंतजार था, जिसे ऋषिकांत सिंह ने पूरा किया।
दो पदक मिलने के बाद भारत का कुल पदक प्रदर्शन अब बेहतर स्थिति में पहुंच गया है। भारतीय दल के खाते में एक रजत और एक कांस्य पदक दर्ज हो चुका है। इसके साथ ही मेडल तालिका में भारत शीर्ष 10 देशों में अपनी जगह बनाने में सफल रहा है। भारतीय खिलाड़ी अब आने वाली स्पर्धाओं में पदकों की संख्या बढ़ाने की तैयारी में जुटे हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग हमेशा से भारत का मजबूत खेल माना जाता रहा है। पिछले कई संस्करणों में भारतीय भारोत्तोलकों ने लगातार पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। इस बार भी खिलाड़ियों से बड़ी उम्मीदें जताई जा रही थीं और ऋषिकांत सिंह ने उन उम्मीदों पर खरा उतरते हुए भारत को महत्वपूर्ण सफलता दिलाई।
भारतीय वेटलिफ्टिंग दल में कई युवा खिलाड़ियों को इस बार मौका दिया गया है। चयनकर्ताओं का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव मिलने से भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं में इन खिलाड़ियों को फायदा मिलेगा। ऋषिकांत सिंह का प्रदर्शन इस दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
प्रतियोगिता के दौरान भारतीय खिलाड़ी का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता नजर आया। हर सफल लिफ्ट के बाद दर्शकों की तालियों और टीम साथियों के उत्साहवर्धन ने उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा दी। अंतिम प्रयास तक उन्होंने पदक की उम्मीद को बनाए रखा और शानदार प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीतने में सफल रहे।
दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया मेडल तालिका में अपना दबदबा बनाए हुए है। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में लगातार पदक जीतकर शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। उनके खाते में अब तक 12 स्वर्ण सहित कुल 23 पदक दर्ज हो चुके हैं। इंग्लैंड, कनाडा, मलेशिया और अन्य देशों के खिलाड़ी भी अलग-अलग स्पर्धाओं में मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स के आगामी दिनों में भारत की उम्मीदें मुक्केबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन, निशानेबाजी, एथलेटिक्स और अन्य स्पर्धाओं से भी जुड़ी हुई हैं। कई भारतीय खिलाड़ी अपने-अपने मुकाबलों में हिस्सा लेने वाले हैं, जिनसे पदकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। भारतीय दल का लक्ष्य पिछले संस्करणों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करना है और खिलाड़ी उसी दिशा में तैयारी कर रहे हैं।
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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की चमकी किस्मत, वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह ने दिलाया सिल्वर मेडल
स्पोर्ट्स डेस्क
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय दल का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के चौथे दिन भारत ने अपना दूसरा पदक जीतते हुए मेडल तालिका में मजबूती हासिल की। भारतीय वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह ने पुरुषों की 60 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में दमदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। पूरे मुकाबले के दौरान उन्होंने लगातार बेहतरीन लिफ्ट लगाईं और कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरे स्थान पर रहे।
भारतीय खिलाड़ी का प्रदर्शन शुरुआत से ही प्रभावशाली रहा। स्नैच राउंड में उन्होंने आत्मविश्वास के साथ लिफ्ट पूरी की और शुरुआती बढ़त बनाने में सफलता हासिल की। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में भी उन्होंने शानदार तकनीक और संतुलन का प्रदर्शन किया। दोनों राउंड में लगातार सफल प्रयासों की बदौलत उनका कुल वजन 264 किलोग्राम तक पहुंचा, जिससे उन्होंने रजत पदक सुनिश्चित कर लिया।
ऋषिकांत सिंह ने स्नैच में 121 किलोग्राम वजन उठाया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 143 किलोग्राम का सफल प्रयास किया। दोनों चरणों के संयुक्त प्रदर्शन ने उन्हें प्रतियोगिता में दूसरे स्थान तक पहुंचाया। मुकाबले के दौरान उनकी लिफ्टिंग तकनीक, संतुलन और आत्मविश्वास ने दर्शकों के साथ विशेषज्ञों का भी ध्यान आकर्षित किया।
इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक मलेशिया के अनिक कसदान ने अपने नाम किया। उन्होंने कुल 266 किलोग्राम वजन उठाकर पहला स्थान हासिल किया। स्वर्ण और रजत पदक के बीच केवल दो किलोग्राम का अंतर रहा, जिससे मुकाबला बेहद रोमांचक बन गया। केन्या के मबोया ने 260 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीता और तीसरे स्थान पर रहे।
पूरी प्रतियोगिता के दौरान शीर्ष तीन खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। शुरुआती राउंड से लेकर अंतिम प्रयास तक पदकों की तस्वीर लगातार बदलती रही। हर सफल लिफ्ट के साथ अंकतालिका में बदलाव होता रहा, लेकिन ऋषिकांत सिंह ने अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखी और अंत तक पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।
भारतीय दल के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रतियोगिता के शुरुआती दिनों में खिलाड़ियों पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव था। चौथे दिन मिला यह रजत पदक भारतीय टीम का मनोबल बढ़ाने वाला साबित हुआ। टीम प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ ने भी खिलाड़ी के प्रदर्शन की सराहना की।
इससे पहले प्रतियोगिता के तीसरे दिन भारत ने अपना पहला पदक जीता था। पुरुष पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया था। उनकी उपलब्धि के बाद भारतीय दल को दूसरे पदक का इंतजार था, जिसे ऋषिकांत सिंह ने पूरा किया।
दो पदक मिलने के बाद भारत का कुल पदक प्रदर्शन अब बेहतर स्थिति में पहुंच गया है। भारतीय दल के खाते में एक रजत और एक कांस्य पदक दर्ज हो चुका है। इसके साथ ही मेडल तालिका में भारत शीर्ष 10 देशों में अपनी जगह बनाने में सफल रहा है। भारतीय खिलाड़ी अब आने वाली स्पर्धाओं में पदकों की संख्या बढ़ाने की तैयारी में जुटे हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग हमेशा से भारत का मजबूत खेल माना जाता रहा है। पिछले कई संस्करणों में भारतीय भारोत्तोलकों ने लगातार पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। इस बार भी खिलाड़ियों से बड़ी उम्मीदें जताई जा रही थीं और ऋषिकांत सिंह ने उन उम्मीदों पर खरा उतरते हुए भारत को महत्वपूर्ण सफलता दिलाई।
भारतीय वेटलिफ्टिंग दल में कई युवा खिलाड़ियों को इस बार मौका दिया गया है। चयनकर्ताओं का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव मिलने से भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं में इन खिलाड़ियों को फायदा मिलेगा। ऋषिकांत सिंह का प्रदर्शन इस दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
प्रतियोगिता के दौरान भारतीय खिलाड़ी का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता नजर आया। हर सफल लिफ्ट के बाद दर्शकों की तालियों और टीम साथियों के उत्साहवर्धन ने उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा दी। अंतिम प्रयास तक उन्होंने पदक की उम्मीद को बनाए रखा और शानदार प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीतने में सफल रहे।
दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया मेडल तालिका में अपना दबदबा बनाए हुए है। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में लगातार पदक जीतकर शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। उनके खाते में अब तक 12 स्वर्ण सहित कुल 23 पदक दर्ज हो चुके हैं। इंग्लैंड, कनाडा, मलेशिया और अन्य देशों के खिलाड़ी भी अलग-अलग स्पर्धाओं में मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स के आगामी दिनों में भारत की उम्मीदें मुक्केबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन, निशानेबाजी, एथलेटिक्स और अन्य स्पर्धाओं से भी जुड़ी हुई हैं। कई भारतीय खिलाड़ी अपने-अपने मुकाबलों में हिस्सा लेने वाले हैं, जिनसे पदकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। भारतीय दल का लक्ष्य पिछले संस्करणों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करना है और खिलाड़ी उसी दिशा में तैयारी कर रहे हैं।
