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सोना ₹824 टूटा, चांदी में बढ़त; निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?
बिजनेस डेस्क
IBJA के अनुसार 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर ₹824 सस्ता होकर ₹1,43,781 पहुंचा, जबकि चांदी ₹241 चढ़कर ₹2,22,721 प्रति किलो हो गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन सकती है।
सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर 824 रुपए सस्ता होकर 1,43,781 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं चांदी की कीमत में हल्की तेजी दर्ज की गई है और यह 241 रुपए बढ़कर 2,22,721 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है। सोने की कीमतों में आई इस गिरावट ने निवेशकों और ज्वेलरी खरीदने वालों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
एक दिन पहले 24 कैरेट सोने की कीमत 1,44,605 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। अब इसमें 824 रुपए की गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर चांदी की कीमत 2,22,480 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 2,22,721 रुपए हो गई है। हालांकि चांदी में बढ़त सीमित रही, लेकिन बाजार में इसकी भी चर्चा बनी हुई है।
इस साल सोने और चांदी की कीमतों में लगातार भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2025 के आखिर में जहां सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी, वहीं जनवरी के अंत तक इसमें तेज उछाल आया और 29 जनवरी को यह 1.76 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद बाजार में मुनाफावसूली, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की रणनीति में बदलाव के चलते कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली।
मौजूदा समय में सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 32,340 रुपए प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है। इसी तरह चांदी भी अपने ऑल टाइम हाई से काफी नीचे कारोबार कर रही है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी की कीमत करीब 2.30 लाख रुपए प्रति किलो थी, जो 29 जनवरी को बढ़कर 3.86 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई थी। अब चांदी अपने उच्चतम स्तर से करीब 1.63 लाख रुपए नीचे आ चुकी है।
सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की धारणा, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली जैसे कारकों का असर बुलियन बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि में कीमती धातुओं की मांग बनी रह सकती है।
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को एकमुश्त बड़ी राशि लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना चाहिए। कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच धीरे-धीरे निवेश करने से जोखिम कम हो सकता है और भविष्य में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। खासकर ऐसे निवेशक जो लंबे समय के लिए पोर्टफोलियो तैयार कर रहे हैं, उनके लिए यह समय अवसर के रूप में देखा जा सकता है।
वर्ष के अंत तक यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ती है तो सोने की कीमत फिर से 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है। वहीं चांदी भी 2.80 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर तक जा सकती है। हालांकि यह पूरी तरह बाजार की परिस्थितियों, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगा।
सोने की कीमतों में गिरावट का असर आभूषण बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। त्योहारों और शादी के सीजन से पहले यदि कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो उपभोक्ताओं की खरीदारी बढ़ सकती है। ज्वेलर्स का मानना है कि कीमतों में नरमी आने पर बाजार में मांग बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे कारोबार को भी गति मिल सकती है।
दूसरी ओर निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने का भी है। बाजार में तेजी और गिरावट दोनों की संभावना बनी हुई है। इसलिए निवेश का फैसला सोच-समझकर और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर करना बेहतर माना जा रहा है। बुलियन बाजार में आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक आंकड़े, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और डॉलर की चाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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सोना ₹824 टूटा, चांदी में बढ़त; निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?
बिजनेस डेस्क
सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर 824 रुपए सस्ता होकर 1,43,781 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं चांदी की कीमत में हल्की तेजी दर्ज की गई है और यह 241 रुपए बढ़कर 2,22,721 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है। सोने की कीमतों में आई इस गिरावट ने निवेशकों और ज्वेलरी खरीदने वालों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
एक दिन पहले 24 कैरेट सोने की कीमत 1,44,605 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। अब इसमें 824 रुपए की गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर चांदी की कीमत 2,22,480 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 2,22,721 रुपए हो गई है। हालांकि चांदी में बढ़त सीमित रही, लेकिन बाजार में इसकी भी चर्चा बनी हुई है।
इस साल सोने और चांदी की कीमतों में लगातार भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2025 के आखिर में जहां सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी, वहीं जनवरी के अंत तक इसमें तेज उछाल आया और 29 जनवरी को यह 1.76 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद बाजार में मुनाफावसूली, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की रणनीति में बदलाव के चलते कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली।
मौजूदा समय में सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 32,340 रुपए प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है। इसी तरह चांदी भी अपने ऑल टाइम हाई से काफी नीचे कारोबार कर रही है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी की कीमत करीब 2.30 लाख रुपए प्रति किलो थी, जो 29 जनवरी को बढ़कर 3.86 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई थी। अब चांदी अपने उच्चतम स्तर से करीब 1.63 लाख रुपए नीचे आ चुकी है।
सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की धारणा, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली जैसे कारकों का असर बुलियन बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि में कीमती धातुओं की मांग बनी रह सकती है।
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को एकमुश्त बड़ी राशि लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना चाहिए। कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच धीरे-धीरे निवेश करने से जोखिम कम हो सकता है और भविष्य में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। खासकर ऐसे निवेशक जो लंबे समय के लिए पोर्टफोलियो तैयार कर रहे हैं, उनके लिए यह समय अवसर के रूप में देखा जा सकता है।
वर्ष के अंत तक यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ती है तो सोने की कीमत फिर से 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है। वहीं चांदी भी 2.80 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर तक जा सकती है। हालांकि यह पूरी तरह बाजार की परिस्थितियों, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगा।
सोने की कीमतों में गिरावट का असर आभूषण बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। त्योहारों और शादी के सीजन से पहले यदि कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो उपभोक्ताओं की खरीदारी बढ़ सकती है। ज्वेलर्स का मानना है कि कीमतों में नरमी आने पर बाजार में मांग बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे कारोबार को भी गति मिल सकती है।
दूसरी ओर निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने का भी है। बाजार में तेजी और गिरावट दोनों की संभावना बनी हुई है। इसलिए निवेश का फैसला सोच-समझकर और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर करना बेहतर माना जा रहा है। बुलियन बाजार में आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक आंकड़े, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और डॉलर की चाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
