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कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रतिष्ठा सामंत ने बढ़ाया भारत का मान, वॉल्ट स्पर्धा के फाइनल में बनाई जगह
स्पोर्ट्स डेस्क
क्वालिफिकेशन राउंड में शानदार प्रदर्शन कर टॉप-8 में शामिल हुईं प्रतिष्ठा, प्रणति नायक फाइनल की दौड़ से बाहर, टीम इवेंट में भारत नौवें स्थान पर रहा
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जिम्नास्टिक दल के लिए महिला वॉल्ट स्पर्धा से अच्छी खबर सामने आई है। 22 वर्षीय भारतीय जिम्नास्ट प्रतिष्ठा सामंत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वॉल्ट इवेंट के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। क्वालिफिकेशन राउंड में उन्होंने बेहतरीन तकनीक, संतुलन और आत्मविश्वास का प्रदर्शन करते हुए शीर्ष आठ खिलाड़ियों में स्थान बनाया। इसके साथ ही भारत की पदक उम्मीदें इस स्पर्धा में बरकरार हैं।
महिला वॉल्ट क्वालिफिकेशन में प्रतिष्ठा सामंत ने अपने दोनों प्रयासों में संतुलित और प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उनके लैंडिंग, तकनीकी निष्पादन और प्रस्तुति को निर्णायकों ने अच्छे अंक दिए। कुल 13.025 अंक हासिल करते हुए उन्होंने पांचवें स्थान पर क्वालिफिकेशन समाप्त किया और सीधे फाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया। शीर्ष आठ खिलाड़ियों को फाइनल में प्रवेश मिलना था और प्रतिष्ठा ने बिना किसी अतिरिक्त गणना के अपनी जगह सुनिश्चित कर ली।
प्रतिष्ठा सामंत पश्चिम बंगाल से आती हैं और पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करती रही हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े मंच पर उनका फाइनल में पहुंचना भारतीय जिम्नास्टिक के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह फाइनल में भी अपनी लय बरकरार रखती हैं तो पदक की दौड़ में मजबूत चुनौती पेश कर सकती हैं।
दूसरी ओर भारत की अनुभवी जिम्नास्ट प्रणति नायक इस बार फाइनल में जगह बनाने से चूक गईं। उन्होंने क्वालिफिकेशन में 12.555 अंक हासिल किए, जिससे वह 11वें स्थान पर रहीं। फाइनल के लिए आवश्यक शीर्ष आठ स्थानों से बाहर रहने के कारण उनका सफर क्वालिफिकेशन चरण में ही रुक गया। हालांकि उन्हें तीसरी रिजर्व खिलाड़ी के रूप में रखा गया है। यदि फाइनल से पहले कोई क्वालिफाई खिलाड़ी हटती है तो उन्हें अवसर मिल सकता है।
प्रणति नायक भारतीय जिम्नास्टिक की सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं और उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया है। इस प्रतियोगिता में भी उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन क्वालिफिकेशन में कुछ छोटे तकनीकी अंतर और अंक कटने के कारण वह अंतिम आठ में जगह नहीं बना सकीं।
भारतीय टीम की अन्य दो जिम्नास्ट भी वॉल्ट स्पर्धा में उतरीं। ईशिता रेवाले ने 11.725 अंक हासिल किए और 15वें स्थान पर रहीं। वहीं निष्का अग्रवाल ने 11.075 अंक के साथ 19वां स्थान प्राप्त किया। दोनों खिलाड़ी फाइनल की दौड़ में जगह नहीं बना सकीं, लेकिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किया।
महिला ऑल-अराउंड स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी चुनौती पेश की। प्रतिष्ठा सामंत ने कुल 42.250 अंक अर्जित किए और 27वें स्थान पर रहीं। जबकि ईशिता रेवाले ने 41.700 अंकों के साथ 28वां स्थान हासिल किया। दोनों खिलाड़ी ऑल-अराउंड फाइनल में प्रवेश नहीं कर सकीं क्योंकि इस स्पर्धा में केवल शीर्ष प्रदर्शन करने वाली जिम्नास्टों को ही अंतिम दौर में जगह मिली।
ऑल-अराउंड प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को वॉल्ट, अनइवन बार्स, बैलेंस बीम और फ्लोर एक्सरसाइज सहित चारों उपकरणों पर प्रदर्शन करना होता है। इन सभी इवेंट के संयुक्त अंकों के आधार पर अंतिम रैंकिंग तय की जाती है। भारतीय खिलाड़ियों ने कुछ उपकरणों पर अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कुल अंकों के मामले में वे शीर्ष खिलाड़ियों की बराबरी नहीं कर सकीं।
टीम स्पर्धा में भारतीय महिला जिम्नास्टिक टीम ने कुल 123 अंक अर्जित किए और नौवें स्थान पर रही। भारतीय टीम ने पूरे मुकाबले में संघर्षपूर्ण प्रदर्शन किया, लेकिन मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के बीच शीर्ष तीन स्थानों तक पहुंचना संभव नहीं हो सका। टीम प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के संयुक्त प्रदर्शन के आधार पर अंतिम परिणाम तय किया गया।
इस स्पर्धा में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने कुल 158.400 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता। कनाडा ने 157.300 अंकों के साथ रजत पदक अपने नाम किया, जबकि इंग्लैंड ने 154.300 अंक जुटाकर कांस्य पदक हासिल किया। तीनों देशों की टीमों ने सभी उपकरणों पर संतुलित और उच्च स्तर का प्रदर्शन किया।
कॉमनवेल्थ गेम्स में जिम्नास्टिक हमेशा से सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है। इसमें तकनीकी कौशल, शारीरिक संतुलन, लचीलापन और मानसिक मजबूती की बड़ी भूमिका होती है। दुनिया के कई शीर्ष खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं, जिससे हर अंक का महत्व बढ़ जाता है।
प्रतिष्ठा सामंत का फाइनल तक पहुंचना भारतीय जिम्नास्टिक के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस खेल में नए खिलाड़ियों को तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया है। राष्ट्रीय शिविरों, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और विदेशी प्रतियोगिताओं में भागीदारी के कारण युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन में लगातार सुधार देखने को मिला है।
भारतीय जिम्नास्टिक महासंघ भी युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक अवसर देने की दिशा में काम कर रहा है। प्रतिष्ठा, ईशिता और निष्का जैसी युवा खिलाड़ियों को भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे मंच पर मिला अनुभव आने वाले वर्षों में उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब भारतीय खेल प्रेमियों की निगाहें वॉल्ट फाइनल पर टिकी रहेंगी, जहां प्रतिष्ठा सामंत भारत की ओर से चुनौती पेश करेंगी। क्वालिफिकेशन में उनका प्रदर्शन यह संकेत दे चुका है कि वे शीर्ष खिलाड़ियों के बीच मुकाबला करने की क्षमता रखती हैं। फाइनल में सभी खिलाड़ियों को नए सिरे से प्रदर्शन करना होगा और वहीं पदकों का फैसला होगा।
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कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रतिष्ठा सामंत ने बढ़ाया भारत का मान, वॉल्ट स्पर्धा के फाइनल में बनाई जगह
स्पोर्ट्स डेस्क
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जिम्नास्टिक दल के लिए महिला वॉल्ट स्पर्धा से अच्छी खबर सामने आई है। 22 वर्षीय भारतीय जिम्नास्ट प्रतिष्ठा सामंत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वॉल्ट इवेंट के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। क्वालिफिकेशन राउंड में उन्होंने बेहतरीन तकनीक, संतुलन और आत्मविश्वास का प्रदर्शन करते हुए शीर्ष आठ खिलाड़ियों में स्थान बनाया। इसके साथ ही भारत की पदक उम्मीदें इस स्पर्धा में बरकरार हैं।
महिला वॉल्ट क्वालिफिकेशन में प्रतिष्ठा सामंत ने अपने दोनों प्रयासों में संतुलित और प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उनके लैंडिंग, तकनीकी निष्पादन और प्रस्तुति को निर्णायकों ने अच्छे अंक दिए। कुल 13.025 अंक हासिल करते हुए उन्होंने पांचवें स्थान पर क्वालिफिकेशन समाप्त किया और सीधे फाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया। शीर्ष आठ खिलाड़ियों को फाइनल में प्रवेश मिलना था और प्रतिष्ठा ने बिना किसी अतिरिक्त गणना के अपनी जगह सुनिश्चित कर ली।
प्रतिष्ठा सामंत पश्चिम बंगाल से आती हैं और पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करती रही हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े मंच पर उनका फाइनल में पहुंचना भारतीय जिम्नास्टिक के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह फाइनल में भी अपनी लय बरकरार रखती हैं तो पदक की दौड़ में मजबूत चुनौती पेश कर सकती हैं।
दूसरी ओर भारत की अनुभवी जिम्नास्ट प्रणति नायक इस बार फाइनल में जगह बनाने से चूक गईं। उन्होंने क्वालिफिकेशन में 12.555 अंक हासिल किए, जिससे वह 11वें स्थान पर रहीं। फाइनल के लिए आवश्यक शीर्ष आठ स्थानों से बाहर रहने के कारण उनका सफर क्वालिफिकेशन चरण में ही रुक गया। हालांकि उन्हें तीसरी रिजर्व खिलाड़ी के रूप में रखा गया है। यदि फाइनल से पहले कोई क्वालिफाई खिलाड़ी हटती है तो उन्हें अवसर मिल सकता है।
प्रणति नायक भारतीय जिम्नास्टिक की सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं और उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया है। इस प्रतियोगिता में भी उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन क्वालिफिकेशन में कुछ छोटे तकनीकी अंतर और अंक कटने के कारण वह अंतिम आठ में जगह नहीं बना सकीं।
भारतीय टीम की अन्य दो जिम्नास्ट भी वॉल्ट स्पर्धा में उतरीं। ईशिता रेवाले ने 11.725 अंक हासिल किए और 15वें स्थान पर रहीं। वहीं निष्का अग्रवाल ने 11.075 अंक के साथ 19वां स्थान प्राप्त किया। दोनों खिलाड़ी फाइनल की दौड़ में जगह नहीं बना सकीं, लेकिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किया।
महिला ऑल-अराउंड स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी चुनौती पेश की। प्रतिष्ठा सामंत ने कुल 42.250 अंक अर्जित किए और 27वें स्थान पर रहीं। जबकि ईशिता रेवाले ने 41.700 अंकों के साथ 28वां स्थान हासिल किया। दोनों खिलाड़ी ऑल-अराउंड फाइनल में प्रवेश नहीं कर सकीं क्योंकि इस स्पर्धा में केवल शीर्ष प्रदर्शन करने वाली जिम्नास्टों को ही अंतिम दौर में जगह मिली।
ऑल-अराउंड प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को वॉल्ट, अनइवन बार्स, बैलेंस बीम और फ्लोर एक्सरसाइज सहित चारों उपकरणों पर प्रदर्शन करना होता है। इन सभी इवेंट के संयुक्त अंकों के आधार पर अंतिम रैंकिंग तय की जाती है। भारतीय खिलाड़ियों ने कुछ उपकरणों पर अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कुल अंकों के मामले में वे शीर्ष खिलाड़ियों की बराबरी नहीं कर सकीं।
टीम स्पर्धा में भारतीय महिला जिम्नास्टिक टीम ने कुल 123 अंक अर्जित किए और नौवें स्थान पर रही। भारतीय टीम ने पूरे मुकाबले में संघर्षपूर्ण प्रदर्शन किया, लेकिन मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के बीच शीर्ष तीन स्थानों तक पहुंचना संभव नहीं हो सका। टीम प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के संयुक्त प्रदर्शन के आधार पर अंतिम परिणाम तय किया गया।
इस स्पर्धा में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने कुल 158.400 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता। कनाडा ने 157.300 अंकों के साथ रजत पदक अपने नाम किया, जबकि इंग्लैंड ने 154.300 अंक जुटाकर कांस्य पदक हासिल किया। तीनों देशों की टीमों ने सभी उपकरणों पर संतुलित और उच्च स्तर का प्रदर्शन किया।
कॉमनवेल्थ गेम्स में जिम्नास्टिक हमेशा से सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है। इसमें तकनीकी कौशल, शारीरिक संतुलन, लचीलापन और मानसिक मजबूती की बड़ी भूमिका होती है। दुनिया के कई शीर्ष खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं, जिससे हर अंक का महत्व बढ़ जाता है।
प्रतिष्ठा सामंत का फाइनल तक पहुंचना भारतीय जिम्नास्टिक के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस खेल में नए खिलाड़ियों को तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया है। राष्ट्रीय शिविरों, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और विदेशी प्रतियोगिताओं में भागीदारी के कारण युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन में लगातार सुधार देखने को मिला है।
भारतीय जिम्नास्टिक महासंघ भी युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक अवसर देने की दिशा में काम कर रहा है। प्रतिष्ठा, ईशिता और निष्का जैसी युवा खिलाड़ियों को भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे मंच पर मिला अनुभव आने वाले वर्षों में उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब भारतीय खेल प्रेमियों की निगाहें वॉल्ट फाइनल पर टिकी रहेंगी, जहां प्रतिष्ठा सामंत भारत की ओर से चुनौती पेश करेंगी। क्वालिफिकेशन में उनका प्रदर्शन यह संकेत दे चुका है कि वे शीर्ष खिलाड़ियों के बीच मुकाबला करने की क्षमता रखती हैं। फाइनल में सभी खिलाड़ियों को नए सिरे से प्रदर्शन करना होगा और वहीं पदकों का फैसला होगा।
