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धोनी जैसे मेंटर की जरूरत, कोचिंग शैली पर श्रीसंत ने उठाए सवाल
स्पोर्ट्स डेस्क
पूर्व तेज गेंदबाज एस श्रीसंत ने गौतम गंभीर की कार्यशैली पर जताई आपत्ति, कहा- खिलाड़ियों को दबाव नहीं बल्कि भरोसा और मार्गदर्शन चाहिए
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज एस श्रीसंत ने एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज से क्रिकेट जगत में चर्चा छेड़ दी है। इस बार उन्होंने टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भारतीय टीम को पारंपरिक कोचिंग मॉडल से ज्यादा एक ऐसे मेंटर की जरूरत है जो खिलाड़ियों का मार्गदर्शन कर सके और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए। श्रीसंत का मानना है कि महेंद्र सिंह धोनी जैसे व्यक्तित्व की सोच और नेतृत्व शैली टीम के लिए अधिक प्रभावी साबित हो सकती है। 43 वर्षीय श्रीसंत ने एक बातचीत के दौरान कहा कि टीम के खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव बनाने के बजाय उन्हें भरोसा देना और सही दिशा दिखाना ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत को केवल एक कोच की नहीं, बल्कि ऐसे मेंटर की आवश्यकता है जो खिलाड़ियों को समझे और उनके साथ बड़े भाई जैसा रिश्ता बनाए। उनके मुताबिक केवल जीत पर खुश होना और हार पर नाराज हो जाना नेतृत्व की पहचान नहीं हो सकती। खिलाड़ियों को कठिन समय में समर्थन और विश्वास की जरूरत होती है, जिससे वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।
पूर्व तेज गेंदबाज की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारतीय टेस्ट टीम के हालिया प्रदर्शन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। श्रीसंत ने न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार का जिक्र करते हुए कहा कि टीम की रणनीति और कोचिंग दृष्टिकोण पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उनका मानना है कि जब कोई टीम लगातार दबाव में नजर आती है तो केवल खिलाड़ियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होता। टीम के प्रदर्शन में कोचिंग स्टाफ और नेतृत्व समूह की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट केवल तकनीक का खेल नहीं है, बल्कि यह मानसिक मजबूती और टीम के भीतर विश्वास के माहौल पर भी निर्भर करता है। अगर खिलाड़ी खुद को स्वतंत्र महसूस करेंगे और उन्हें नेतृत्व से समर्थन मिलेगा तो वे मैदान पर बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। श्रीसंत के अनुसार कई बार खिलाड़ी दबाव में अपनी स्वाभाविक शैली भूल जाते हैं और इसका असर पूरे टीम संयोजन पर पड़ता है।
महेंद्र सिंह धोनी का उदाहरण देते हुए श्रीसंत ने कहा कि भारतीय क्रिकेट की कई बड़ी सफलताओं के पीछे उनकी नेतृत्व क्षमता रही है। उन्होंने कहा कि धोनी खिलाड़ियों की क्षमता को समझते थे और उन्हें मौके देने में विश्वास रखते थे। यही वजह थी कि कई युवा खिलाड़ियों ने उनके नेतृत्व में शानदार प्रदर्शन किया। श्रीसंत का मानना है कि टीम के साथ भावनात्मक जुड़ाव और भरोसे का रिश्ता बनाना किसी भी सफल नेतृत्व की सबसे बड़ी पहचान होती है। उन्होंने 2026 टी-20 विश्व कप जीत को लेकर भी अपनी राय रखी। श्रीसंत ने कहा कि किसी बड़ी जीत का पूरा श्रेय केवल कोच को देना उचित नहीं है। उनके अनुसार क्रिकेट एक टीम गेम है और इसमें कप्तान, खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ तथा रणनीतिक फैसलों की बराबर भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि अगर महत्वपूर्ण मौकों पर खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया होता तो केवल कोचिंग के दम पर विश्व कप जीतना संभव नहीं था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सही समय पर लिए गए फैसले, खिलाड़ियों का प्रदर्शन और मैदान पर दिखाई गई समझदारी भी जीत की बड़ी वजह होती है।
एस श्रीसंत भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं जिन्होंने टीम इंडिया के दो विश्व कप जीतने वाले अभियानों का हिस्सा बनने का गौरव हासिल किया। वे 2007 के टी-20 विश्व कप और 2011 के वनडे विश्व कप विजेता भारतीय दल में शामिल थे। अपने करियर के दौरान उन्होंने 27 टेस्ट मैचों में 87 विकेट हासिल किए और सीमित ओवरों के प्रारूप में भी टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी आक्रामक गेंदबाजी और जुझारू रवैये के कारण वे लंबे समय तक चर्चा में रहे।उनका करियर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। वर्ष 2013 में आईपीएल के दौरान उन पर स्पॉट फिक्सिंग के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। बाद में अदालत से राहत मिलने और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उनके खिलाफ लगे कई आरोप समाप्त हुए। इसके बाद उनके प्रतिबंध की अवधि भी कम की गई और अंततः वह समाप्त हो गई। बावजूद इसके, उनका क्रिकेट करियर पहले जैसी रफ्तार नहीं पकड़ सका।
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धोनी जैसे मेंटर की जरूरत, कोचिंग शैली पर श्रीसंत ने उठाए सवाल
स्पोर्ट्स डेस्क
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज एस श्रीसंत ने एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज से क्रिकेट जगत में चर्चा छेड़ दी है। इस बार उन्होंने टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भारतीय टीम को पारंपरिक कोचिंग मॉडल से ज्यादा एक ऐसे मेंटर की जरूरत है जो खिलाड़ियों का मार्गदर्शन कर सके और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए। श्रीसंत का मानना है कि महेंद्र सिंह धोनी जैसे व्यक्तित्व की सोच और नेतृत्व शैली टीम के लिए अधिक प्रभावी साबित हो सकती है। 43 वर्षीय श्रीसंत ने एक बातचीत के दौरान कहा कि टीम के खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव बनाने के बजाय उन्हें भरोसा देना और सही दिशा दिखाना ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत को केवल एक कोच की नहीं, बल्कि ऐसे मेंटर की आवश्यकता है जो खिलाड़ियों को समझे और उनके साथ बड़े भाई जैसा रिश्ता बनाए। उनके मुताबिक केवल जीत पर खुश होना और हार पर नाराज हो जाना नेतृत्व की पहचान नहीं हो सकती। खिलाड़ियों को कठिन समय में समर्थन और विश्वास की जरूरत होती है, जिससे वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।
पूर्व तेज गेंदबाज की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारतीय टेस्ट टीम के हालिया प्रदर्शन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। श्रीसंत ने न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार का जिक्र करते हुए कहा कि टीम की रणनीति और कोचिंग दृष्टिकोण पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उनका मानना है कि जब कोई टीम लगातार दबाव में नजर आती है तो केवल खिलाड़ियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होता। टीम के प्रदर्शन में कोचिंग स्टाफ और नेतृत्व समूह की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट केवल तकनीक का खेल नहीं है, बल्कि यह मानसिक मजबूती और टीम के भीतर विश्वास के माहौल पर भी निर्भर करता है। अगर खिलाड़ी खुद को स्वतंत्र महसूस करेंगे और उन्हें नेतृत्व से समर्थन मिलेगा तो वे मैदान पर बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। श्रीसंत के अनुसार कई बार खिलाड़ी दबाव में अपनी स्वाभाविक शैली भूल जाते हैं और इसका असर पूरे टीम संयोजन पर पड़ता है।
महेंद्र सिंह धोनी का उदाहरण देते हुए श्रीसंत ने कहा कि भारतीय क्रिकेट की कई बड़ी सफलताओं के पीछे उनकी नेतृत्व क्षमता रही है। उन्होंने कहा कि धोनी खिलाड़ियों की क्षमता को समझते थे और उन्हें मौके देने में विश्वास रखते थे। यही वजह थी कि कई युवा खिलाड़ियों ने उनके नेतृत्व में शानदार प्रदर्शन किया। श्रीसंत का मानना है कि टीम के साथ भावनात्मक जुड़ाव और भरोसे का रिश्ता बनाना किसी भी सफल नेतृत्व की सबसे बड़ी पहचान होती है। उन्होंने 2026 टी-20 विश्व कप जीत को लेकर भी अपनी राय रखी। श्रीसंत ने कहा कि किसी बड़ी जीत का पूरा श्रेय केवल कोच को देना उचित नहीं है। उनके अनुसार क्रिकेट एक टीम गेम है और इसमें कप्तान, खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ तथा रणनीतिक फैसलों की बराबर भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि अगर महत्वपूर्ण मौकों पर खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया होता तो केवल कोचिंग के दम पर विश्व कप जीतना संभव नहीं था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सही समय पर लिए गए फैसले, खिलाड़ियों का प्रदर्शन और मैदान पर दिखाई गई समझदारी भी जीत की बड़ी वजह होती है।
एस श्रीसंत भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं जिन्होंने टीम इंडिया के दो विश्व कप जीतने वाले अभियानों का हिस्सा बनने का गौरव हासिल किया। वे 2007 के टी-20 विश्व कप और 2011 के वनडे विश्व कप विजेता भारतीय दल में शामिल थे। अपने करियर के दौरान उन्होंने 27 टेस्ट मैचों में 87 विकेट हासिल किए और सीमित ओवरों के प्रारूप में भी टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी आक्रामक गेंदबाजी और जुझारू रवैये के कारण वे लंबे समय तक चर्चा में रहे।उनका करियर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। वर्ष 2013 में आईपीएल के दौरान उन पर स्पॉट फिक्सिंग के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। बाद में अदालत से राहत मिलने और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उनके खिलाफ लगे कई आरोप समाप्त हुए। इसके बाद उनके प्रतिबंध की अवधि भी कम की गई और अंततः वह समाप्त हो गई। बावजूद इसके, उनका क्रिकेट करियर पहले जैसी रफ्तार नहीं पकड़ सका।
