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छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: चावल निर्यातकों को मंडी शुल्क में एक साल की राहत, 90 देशों तक पहुंचेगा प्रदेश का धान
छत्तीसगढ़
इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में सीएम विष्णुदेव साय की घोषणा, किसानों से लेकर निर्यातकों तक को मिलेगा सीधा फायदा
छत्तीसगढ़ में चावल उद्योग और कृषि क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के लिए राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चावल निर्यातकों को मंडी शुल्क में दी जा रही छूट को एक वर्ष के लिए आगे बढ़ाने की घोषणा की है। यह फैसला राजधानी रायपुर में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के मंच से किया गया, जहां देश-विदेश से आए निर्यातक, उद्योग प्रतिनिधि और कृषि विशेषज्ञ मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मंडी शुल्क में राहत का उद्देश्य राज्य से चावल के निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाना और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। यह छूट दिसंबर 2025 में समाप्त होने वाली थी, जिसे अब एक साल और बढ़ा दिया गया है। सरकार के इस कदम से चावल मिलर्स, प्रोसेसिंग यूनिट्स और निर्यातकों की लागत कम होगी, जिसका सीधा असर किसानों को मिलने वाले दामों पर पड़ेगा।
अपने संबोधन में सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल धान उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां उगाई जाने वाली किस्में गुणवत्ता और खुशबू के लिए जानी जाती हैं। सरगुजा क्षेत्र के जीराफूल और दुबराज जैसे सुगंधित चावल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में राज्य की अलग पहचान बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ से करीब एक लाख टन चावल का निर्यात लगभग 90 देशों में किया जा रहा है। नई औद्योगिक नीति के तहत राज्य सरकार चावल के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन से जुड़े लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन दे रही है, ताकि निर्यात का दायरा और बढ़ाया जा सके।
ऑर्गेनिक खेती को लेकर सरकार के रुख पर भी मुख्यमंत्री ने बात की। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। दंतेवाड़ा और आसपास के इलाकों में ऑर्गेनिक चावल की खेती हो रही है, जिसे नीति और तकनीकी सहायता के जरिए और आगे ले जाने की जरूरत है।
किसानों के हितों का जिक्र करते हुए सीएम साय ने बताया कि राज्य सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी कर रही है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है। बीते वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी और इस वर्ष इसमें और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।
उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि मंडी शुल्क में छूट बढ़ने से छत्तीसगढ़ का चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार में और प्रतिस्पर्धी बनेगा। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और कृषि आधारित उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में राज्य सरकार द्वारा निर्यात से जुड़ी और नीतिगत घोषणाओं की उम्मीद जताई जा रही है।
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