- Hindi News
- राज्य
- छत्तीसगढ़
- बिलासपुर मामले में राज्य सरकार की अपील खारिज, आरोपी की दोषमुक्ति बरकरार
बिलासपुर मामले में राज्य सरकार की अपील खारिज, आरोपी की दोषमुक्ति बरकरार
बिलासपुर (छ.ग.)
प्रेम संबंध टूटना आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं: हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल प्रेम संबंध टूट जाना या शादी से इनकार कर देना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि जब तक अभियोजन पक्ष यह साबित न कर दे कि आरोपी की भूमिका आत्महत्या के लिए सीधे तौर पर सक्रिय और प्रेरक रही है, तब तक उस पर दुष्प्रेरण का आरोप सिद्ध नहीं किया जा सकता।
बिलासपुर में सुनाए गए इस फैसले में जस्टिस संजय एस. अग्रवाल की एकल पीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए सत्र न्यायालय द्वारा आरोपी को दिए गए दोषमुक्ति के फैसले को बरकरार रखा। यह मामला चकरभाठा थाना क्षेत्र में वर्ष 2016 में हुई एक युवती की आत्महत्या से जुड़ा है।
2016 की घटना से जुड़ा मामला
अदालत में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, चकरभाठा क्षेत्र के रहने वाले सुनील कुमार साहू और 21 वर्षीय युवती के बीच दोस्ती थी, जो बाद में प्रेम संबंध में बदल गई। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन युवक के परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया।
इसी दौरान वर्ष 2016 में युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आरोप लगाया गया कि घटना से कुछ दिन पहले दोनों के बीच विवाद हुआ था और युवक ने शादी से इनकार कर दिया था, जिससे आहत होकर युवती ने यह कदम उठाया।
मामले में पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद युवक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत केस दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर लिया।
ट्रायल के दौरान आरोप साबित नहीं हुए
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने युवती के परिवार के सदस्यों को गवाह बनाया। युवती की बहन ने दोनों के प्रेम संबंध और शादी की बात स्वीकार की, लेकिन यह भी बताया कि शादी से इनकार की जानकारी उसे सीधे आरोपी से नहीं, बल्कि अन्य लोगों से मिली थी।
युवती के माता-पिता ने भी यही कहा कि वे इस विवाह के लिए तैयार थे, लेकिन आरोपी के परिवार की सहमति नहीं थी। हालांकि, अदालत में यह साबित नहीं हो सका कि आरोपी ने युवती को आत्महत्या के लिए उकसाया या दबाव बनाया।
जांच के दौरान मिले कथित सुसाइड नोट में भी आरोपी के खिलाफ कोई स्पष्ट आरोप दर्ज नहीं था। इन परिस्थितियों को देखते हुए 23 जनवरी 2017 को चौथे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सबूतों के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था।
हाईकोर्ट ने फैसले को सही ठहराया
राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी की प्रत्यक्ष भूमिका साबित करने में असफल रहा।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 306 के तहत दोष सिद्ध करने के लिए यह जरूरी है कि आरोपी ने आत्महत्या के लिए उकसाने या प्रेरित करने में सक्रिय भूमिका निभाई हो। केवल प्रेम संबंध टूटना या विवाह से इनकार करना इस श्रेणी में नहीं आता।
------------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

