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इबोला को लेकर छत्तीसगढ़ अलर्ट, क्वारंटाइन किए गए लोगों में नहीं मिले संक्रमण के लक्षण
छत्तीसगढ़
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा- प्रदेश में सभी स्तरों पर तैयारियां पूरी, एहतियातन तीन विदेशी नागरिकों को 21 दिन के लिए आइसोलेशन में रखा गया।
छत्तीसगढ़ में इबोला वायरस संक्रमण की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य सरकार का कहना है कि फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में पिछले एक महीने से इबोला वायरस को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्वास्थ्य तंत्र को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को क्वारंटाइन और आइसोलेशन में रखा गया है, उनमें अब तक संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अफ्रीकी देशों में इबोला संक्रमण के कुछ मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार ने एहतियातन कदम उठाने शुरू कर दिए थे। दुर्ग जिले में तीन विदेशी नागरिकों को निगरानी में रखा गया है। इनमें कांगो, इथियोपिया और एक अन्य अफ्रीकी देश का नागरिक शामिल बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार ये लोग हाल ही में ऐसे क्षेत्रों से आए थे जहां संक्रमण को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें 21 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया है।
मंत्री ने कहा कि अब तक हुई चिकित्सकीय जांच में किसी भी व्यक्ति में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। न तो बुखार, न रक्तस्राव और न ही अन्य कोई गंभीर लक्षण सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई केवल सुरक्षा और सावधानी के तौर पर की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार इन लोगों की निगरानी कर रही हैं और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं तो तत्काल आवश्यक चिकित्सा प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा।
इबोला वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक संक्रमणों में गिना जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैल सकता है। इस बीमारी में तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यही कारण है कि किसी भी संभावित मामले को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां अतिरिक्त सावधानी बरतती हैं। छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि राज्य के सभी प्रमुख अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और जिला स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर भी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमों को तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में इबोला संक्रमण का कोई पुष्ट मामला नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।
इस बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य सरकार की नई सीएम हेल्पलाइन व्यवस्था को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल आम नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत बनाने का काम करेगी। कई बार लोगों की शिकायतें और समस्याएं समय पर संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती हैं, जिससे समाधान में देरी होती है। नई हेल्पलाइन व्यवस्था के माध्यम से लोग सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उनकी निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जाएगी।
मंत्री के अनुसार सरकार चाहती है कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक दौड़भाग न करनी पड़े। सीएम हेल्पलाइन के जरिए शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार होगा और उनके निपटारे की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का शासन व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं बल्कि उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। इबोला जैसे संक्रमणों को लेकर जागरूकता और सतर्कता सबसे बड़ा बचाव है। लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। फिलहाल छत्तीसगढ़ में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है। राज्य सरकार इबोला संक्रमण की आशंका को लेकर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। क्वारंटाइन किए गए लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं मिलने से राहत जरूर मिली है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहता है।
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इबोला को लेकर छत्तीसगढ़ अलर्ट, क्वारंटाइन किए गए लोगों में नहीं मिले संक्रमण के लक्षण
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में इबोला वायरस संक्रमण की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य सरकार का कहना है कि फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में पिछले एक महीने से इबोला वायरस को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्वास्थ्य तंत्र को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को क्वारंटाइन और आइसोलेशन में रखा गया है, उनमें अब तक संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अफ्रीकी देशों में इबोला संक्रमण के कुछ मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार ने एहतियातन कदम उठाने शुरू कर दिए थे। दुर्ग जिले में तीन विदेशी नागरिकों को निगरानी में रखा गया है। इनमें कांगो, इथियोपिया और एक अन्य अफ्रीकी देश का नागरिक शामिल बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार ये लोग हाल ही में ऐसे क्षेत्रों से आए थे जहां संक्रमण को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें 21 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया है।
मंत्री ने कहा कि अब तक हुई चिकित्सकीय जांच में किसी भी व्यक्ति में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। न तो बुखार, न रक्तस्राव और न ही अन्य कोई गंभीर लक्षण सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई केवल सुरक्षा और सावधानी के तौर पर की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार इन लोगों की निगरानी कर रही हैं और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं तो तत्काल आवश्यक चिकित्सा प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा।
इबोला वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक संक्रमणों में गिना जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैल सकता है। इस बीमारी में तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यही कारण है कि किसी भी संभावित मामले को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां अतिरिक्त सावधानी बरतती हैं। छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि राज्य के सभी प्रमुख अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और जिला स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर भी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमों को तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में इबोला संक्रमण का कोई पुष्ट मामला नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।
इस बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य सरकार की नई सीएम हेल्पलाइन व्यवस्था को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल आम नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत बनाने का काम करेगी। कई बार लोगों की शिकायतें और समस्याएं समय पर संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती हैं, जिससे समाधान में देरी होती है। नई हेल्पलाइन व्यवस्था के माध्यम से लोग सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उनकी निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जाएगी।
मंत्री के अनुसार सरकार चाहती है कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक दौड़भाग न करनी पड़े। सीएम हेल्पलाइन के जरिए शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार होगा और उनके निपटारे की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का शासन व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं बल्कि उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। इबोला जैसे संक्रमणों को लेकर जागरूकता और सतर्कता सबसे बड़ा बचाव है। लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। फिलहाल छत्तीसगढ़ में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है। राज्य सरकार इबोला संक्रमण की आशंका को लेकर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। क्वारंटाइन किए गए लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं मिलने से राहत जरूर मिली है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहता है।
