- Hindi News
- राज्य
- छत्तीसगढ़
- DMF घोटाला: सतपाल सिंह छाबड़ा को ED रिमांड, जांच में सामने आया ₹31 करोड़ के कथित कमीशन का लेनदेन
DMF घोटाला: सतपाल सिंह छाबड़ा को ED रिमांड, जांच में सामने आया ₹31 करोड़ के कथित कमीशन का लेनदेन
Digital Desk
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF फंड मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार कर पांच दिन की हिरासत में लिया है। ED का दावा है कि छाबड़ा को करीब ₹31 करोड़ की कथित अवैध कमीशन राशि मिली, जिसे अपराध से अर्जित आय के तौर पर जांचा जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) फंड के कथित दुरुपयोग और कमीशनखोरी से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सतपाल सिंह छाबड़ा को 1 सितंबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया। उन्हें रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने पांच दिन की ED हिरासत मंजूर की।
ED के मुताबिक, जांच में सतपाल सिंह छाबड़ा को करीब ₹31 करोड़ की कथित अवैध कमीशन राशि मिलने का पता चला है। एजेंसी का कहना है कि बैंक लेनदेन और जांच के दौरान दर्ज बयानों के विश्लेषण से यह रकम सामने आई। जांच एजेंसी इसे कथित Proceeds of Crime यानी अपराध से अर्जित आय मानकर इसकी मनी ट्रेल की पड़ताल कर रही है।
कौन है सतपाल सिंह छाबड़ा?
ED ने छाबड़ा को कथित नेटवर्क का मुख्य बिचौलिया और वित्तीय समन्वयक बताया है। एजेंसी के अनुसार, वह ऐसे DMF कार्यों की पहचान करता था जिनमें सप्लाई के जरिए ज्यादा कमीशन की गुंजाइश होती थी। इसके बाद कथित तौर पर चयनित विक्रेताओं के बीच काम आवंटित करने, वर्क ऑर्डर जारी कराने और भुगतान की प्रक्रिया में समन्वय की भूमिका निभाता था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि विक्रेताओं से प्राप्त कमीशन को आगे नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाने में भी छाबड़ा की भूमिका थी। हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल जांच का हिस्सा हैं और अदालत में इनका अंतिम न्यायिक निर्धारण होना बाकी है।
31 करोड़ रुपये की रकम कहां पहुंची?
ED के अनुसार, बैंक खातों की जांच में सामने आया कि करीब ₹31 करोड़ की कथित कमीशन राशि केवल छाबड़ा के व्यक्तिगत खातों तक सीमित नहीं थी। एजेंसी का कहना है कि रकम छाबड़ा, उसके परिवार के सदस्यों, HUF और उससे जुड़ी संस्थाओं के खातों में पहुंची। अब ED यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का वास्तविक इस्तेमाल किस तरह किया गया और क्या कथित अपराध से अर्जित धन से चल-अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
DMF फंड में गड़बड़ी का क्या आरोप है?
DMF ट्रस्टों का गठन खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के विकास के लिए किया जाता है। ED का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में इन फंडों का इस्तेमाल एक संगठित नेटवर्क के जरिए कथित तौर पर ऐसे सप्लाई कार्यों में किया गया, जिनमें कीमत बढ़ाकर कमीशन निकालने की गुंजाइश थी।
एजेंसी के अनुसार, राज्य में वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच DMF ट्रस्टों के तहत करीब ₹9,188.20 करोड़ प्राप्त हुए थे। जांच में आरोप है कि राशि के एक हिस्से का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के बजाय कथित कमीशन आधारित व्यवस्था में किया गया।
बीज निगम के जरिए लेनदेन की जांच
ED ने आरोप लगाया है कि कथित तौर पर डायवर्ट की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के जरिए किए गए सप्लाई कार्यों से जुड़ा था। एजेंसी के मुताबिक, रेट-कॉन्ट्रैक्ट वाली संस्थाओं को जारी खरीद आदेशों में 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूले जाने की व्यवस्था का पता चला है।
जांच एजेंसी का कहना है कि इस कमीशन का एक हिस्सा कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया जाता था। इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय कड़ियों की पड़ताल अभी जारी है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
DMF मामले में ED इससे पहले भी कई बार तलाशी और कार्रवाई कर चुकी है। 2024 की कार्रवाई में एजेंसी ने दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और नकदी समेत अन्य सामग्री जब्त करने की जानकारी दी थी। एजेंसी के अनुसार, यह जांच छत्तीसगढ़ पुलिस और ACB-EOW की ओर से दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी।
अब सतपाल सिंह छाबड़ा की पांच दिन की ED हिरासत के दौरान कथित कमीशन की मनी ट्रेल, लेनदेन और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी। मामले में जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

