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खदान से प्लांट भेजे जा रहे 77 टन कोयले में मिलावट का आरोप, गिट्टी-मिट्टी मिलने पर पुलिस ने दर्ज किया केस
Digital Desk
कोरबा के कुसमुंडा SECL खदान से रायगढ़ के डभरा स्थित पावर प्लांट भेजे गए दो ट्रेलरों में कथित तौर पर कोयले की जगह गिट्टी और मिट्टी मिली। शिकायत के बाद कुसमुंडा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में खदान से पावर प्लांट भेजे जा रहे कोयले में कथित मिलावट का मामला सामने आया है। कुसमुंडा स्थित SECL खदान से रायगढ़ जिले के डभरा स्थित आरकेएम पावर जनरेशन कंपनी के लिए भेजे गए दो ट्रेलरों में निर्धारित कोयले के बजाय गिट्टी और काली मिट्टी मिले होने का आरोप है। प्लांट में कोयला उतारने से पहले हुई जांच में यह मामला सामने आने के बाद डियो होल्डर ने पुलिस से शिकायत की। कुसमुंडा पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दो ट्रेलरों में भेजा गया था करीब 77 टन कोयला
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 24 अगस्त को कुसमुंडा खदान से दो ट्रेलरों में कुल करीब 76.41 टन आरओएम कोयला लोड किया गया था। एक ट्रेलर में 38.020 टन और दूसरे में 38.390 टन कोयला भेजा गया। दोनों वाहनों को रायगढ़ जिले के डभरा स्थित आरकेएम पावर जनरेशन कंपनी पहुंचना था।
दोनों ट्रेलर 26 अगस्त को प्लांट पहुंचे। वहां कोयला अनलोड करने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच की गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक जांच में कोयले के साथ गिट्टी और काली मिट्टी जैसी सामग्री मिली। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी सामने आई।
रास्ते में कोयला बदलने का आरोप
शिकायतकर्ता डियो होल्डर संजीव शर्मा का आरोप है कि खदान से अच्छी गुणवत्ता का कोयला भेजे जाने के बाद रास्ते में उसमें हेरफेर किया गया। उनका दावा है कि मूल कोयले को हटाकर उसकी जगह मिलावटी सामग्री वाला कोयला प्लांट पहुंचाने का प्रयास किया गया।
शिकायत में इस कथित हेरफेर से करीब 3 लाख रुपये के नुकसान की बात कही गई है। हालांकि, कोयला वास्तव में कहां और किस परिस्थिति में बदला गया, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
शिकायत मिलने के बाद कुसमुंडा पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बयान दर्ज किया और संबंधित धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों ट्रेलर खदान से निकलने के बाद किन रास्तों से गुजरे, उनके साथ रास्ते में क्या हुआ और कथित मिलावट किस स्तर पर हुई।
जांच में वाहन चालकों के बयान, परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड और प्लांट में पहुंची कोयले की खेप की स्थिति महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।
परिवहन व्यवस्था पर भी उठे सवाल
यह मामला केवल कोयले की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। खदान से पावर प्लांट तक कोयला पहुंचाने की पूरी परिवहन व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ सकती है। यदि जांच में रास्ते में कोयला बदलने या उसमें दूसरी सामग्री मिलाने की पुष्टि होती है तो इससे परिवहन प्रक्रिया की निगरानी पर भी सवाल उठेंगे।
फिलहाल पुलिस ने आरोपों की जांच शुरू कर दी है। इसलिए किसी व्यक्ति की भूमिका को जांच पूरी होने से पहले दोष सिद्ध मानना उचित नहीं होगा।
जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
मामले में पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ट्रेलरों में लोड की गई मूल खेप और प्लांट पहुंची सामग्री में अंतर कैसे आया। साथ ही कथित मिलावट में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कोयले की खेप में कथित हेरफेर कब, कहां और किसके स्तर पर हुआ। फिलहाल मामला दर्ज होने के बाद जांच जारी है।
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