छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश होने के दौरान राजनीतिक कटाक्ष, चुटीली टिप्पणियां और विरोध के अलग-अलग स्वर देखने को मिले। रायपुर में चल रहे सत्र में वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा बजट प्रस्तुत किए जाने से पहले ही सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
वित्त मंत्री के निर्धारित समय से कुछ देर बाद सदन पहुंचने पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समय प्रबंधन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जो समय का प्रबंधन नहीं कर पा रहा है, उसका वित्तीय प्रबंधन समझा जा सकता है। इस पर सत्ता पक्ष की ओर से जवाबी टिप्पणियां भी आईं और सदन में हल्की नोकझोंक का माहौल बना रहा।
सत्र के दौरान संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने बजट पेश करने को ऐतिहासिक अवसर बताया, जबकि नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने इसे लेकर व्यंग्य किया। वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने भी टिप्पणी कर माहौल को और राजनीतिक रंग दिया।
बजट भाषण के दौरान एक रोचक क्षण तब आया जब कृषि प्रोत्साहन योजनाओं का जिक्र हो रहा था और विपक्षी सदस्यों ने ‘आलू’ योजना पर सवाल उठाते हुए ‘चूहों’ का मुद्दा भी जोड़ दिया। इस टिप्पणी पर सदन में हल्की हंसी गूंजी और कुछ देर तक टिप्पणियों का दौर चलता रहा।
कार्यवाही के बीच सभापति धर्मजीत सिंह ने वित्त मंत्री के भाषण को रोककर उपस्थित सांसदों का स्वागत करवाया। हालांकि एक सांसद का नाम छूटने पर सदन में हल्की असहजता भी देखी गई, जिसके बाद बजट भाषण फिर शुरू किया गया।
लगातार जारी भाषण के बीच पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वे बजट सुनते-सुनते थक गए हैं। इस पर सदन में हंसी का माहौल बन गया।
सत्र का एक अलग दृश्य तब देखने को मिला जब सरायपाली से विधायक चातुरी डिग्रीलाल नंद निर्माणाधीन सोलर प्लांट के विरोध में पोस्टर पहनकर विधानसभा पहुंचीं। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों के समर्थन में अपनी आपत्ति दर्ज कराई और पर्यावरण व भूमि से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
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