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बलौदाबाजार में रिश्वत आरोप से हड़कंप, किसान ने कीटनाशक पीकर की आत्महत्या की कोशिश
बलौदाबाजार ,(छ.ग.)
रेत से भरे ट्रैक्टर को छोड़ने के बदले 50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप, किसान गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती, प्रशासन ने जांच के आदेश दिए
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल क्षेत्र में रेत परिवहन को लेकर हुई प्रशासनिक कार्रवाई अब बड़े विवाद का रूप लेती जा रही है। ग्राम चांटीपाली के एक किसान द्वारा कीटनाशक पीने की घटना के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर हलचल पैदा कर दी है। किसान के परिजनों ने आरोप लगाया है कि रेत से भरे ट्रैक्टर को छोड़ने के बदले 50 हजार रुपए की मांग की गई थी। रकम नहीं देने पर ट्रैक्टर जब्त कर लिया गया, जिसके बाद किसान मानसिक तनाव में आ गया और उसने कीटनाशक पी लिया। हालांकि जिस अधिकारी पर आरोप लगाए गए हैं, उन्होंने इन्हें पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। ग्राम चांटीपाली निवासी किसान कमल ओगरे का परिवार खेती-किसानी के साथ ट्रैक्टर के जरिए मजदूरी और परिवहन का काम भी करता है। शुक्रवार सुबह उनका बेटा राज ओगरे ट्रैक्टर में रेत लेकर लौट रहा था। इसी दौरान प्रशासनिक टीम ने वाहन को रोक लिया। आरोप है कि मौके पर कार्रवाई के दौरान ट्रैक्टर को जब्त कर लिया गया और बाद में उसे छोड़ने के लिए 50 हजार रुपए की मांग की गई। परिवार का कहना है कि इतनी बड़ी रकम देना उनके लिए संभव नहीं था। इसी बात को लेकर लगातार तनाव बढ़ता गया।
राज ओगरे ने बताया कि उसके साथ दो अन्य ट्रैक्टर भी पकड़े गए थे। उसका आरोप है कि अन्य वाहनों को छोड़ दिया गया, लेकिन उसका ट्रैक्टर थाने में खड़ा करा दिया गया। उसने यह भी दावा किया कि मामले को लेकर फोन पर बातचीत के दौरान उसे डराया-धमकाया गया। जब उसने पूरी बात अपने पिता कमल ओगरे को बताई तो वे काफी परेशान हो गए। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 10 बजे के आसपास किसान मौके पर पहुंचे और कुछ समय बाद उन्होंने कीटनाशक पी लिया। घटना के बाद वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। किसान को तत्काल कसडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने के कारण उसकी जान बच गई। चिकित्सकों ने बताया कि किसान की हालत अब स्थिर है और लगातार निगरानी में रखी गई है। अस्पताल में भर्ती होने की खबर फैलते ही गांव के लोग और परिजन बड़ी संख्या में स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने लगे। घटना को लेकर पूरे इलाके में चर्चा शुरू हो गई। परिजनों का कहना है कि कमल ओगरे पहले से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे थे। खेती से अपेक्षित आय नहीं मिल रही थी और परिवार की जिम्मेदारियां भी बढ़ती जा रही थीं। ऐसे में ट्रैक्टर जब्त होने की सूचना और कथित रिश्वत की मांग ने उन्हें और ज्यादा तनाव में डाल दिया। परिवार का दावा है कि इसी मानसिक दबाव के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। हालांकि पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
घटना की जानकारी मिलते ही कसडोल के कांग्रेस विधायक संदीप साहू अस्पताल पहुंचे। उन्होंने किसान और उसके परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली। विधायक ने कहा कि यदि किसी अधिकारी द्वारा अवैध वसूली या दबाव बनाने जैसी बात सामने आती है तो इसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। विधायक के अस्पताल पहुंचने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया। वहीं दूसरी ओर, नायब तहसीलदार आकांक्षा तिवारी ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने रेत के अवैध परिवहन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की थी। किसी भी व्यक्ति से न तो पैसे मांगे गए और न ही किसी प्रकार की अवैध वसूली की गई। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से लगातार अवैध रेत परिवहन पर कार्रवाई की जा रही थी और इसी वजह से उन्हें कई तरह के दबाव और धमकियां भी मिल रही थीं। उनका कहना है कि जिन वाहनों को जब्त किया गया, उनके पास आवश्यक दस्तावेज और रॉयल्टी संबंधी कागजात उपलब्ध नहीं थे। मामले ने तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। बलौदाबाजार कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने पूरे घटनाक्रम पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। एसडीएम को मामले की विस्तृत जांच कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। किसान की हालत में सुधार बताया जा रहा है, लेकिन यह घटना कई सवाल छोड़ गई है। एक तरफ परिजन रिश्वत मांगने और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ संबंधित अधिकारी सभी आरोपों को बेबुनियाद बता रही हैं।
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बलौदाबाजार में रिश्वत आरोप से हड़कंप, किसान ने कीटनाशक पीकर की आत्महत्या की कोशिश
बलौदाबाजार ,(छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल क्षेत्र में रेत परिवहन को लेकर हुई प्रशासनिक कार्रवाई अब बड़े विवाद का रूप लेती जा रही है। ग्राम चांटीपाली के एक किसान द्वारा कीटनाशक पीने की घटना के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर हलचल पैदा कर दी है। किसान के परिजनों ने आरोप लगाया है कि रेत से भरे ट्रैक्टर को छोड़ने के बदले 50 हजार रुपए की मांग की गई थी। रकम नहीं देने पर ट्रैक्टर जब्त कर लिया गया, जिसके बाद किसान मानसिक तनाव में आ गया और उसने कीटनाशक पी लिया। हालांकि जिस अधिकारी पर आरोप लगाए गए हैं, उन्होंने इन्हें पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। ग्राम चांटीपाली निवासी किसान कमल ओगरे का परिवार खेती-किसानी के साथ ट्रैक्टर के जरिए मजदूरी और परिवहन का काम भी करता है। शुक्रवार सुबह उनका बेटा राज ओगरे ट्रैक्टर में रेत लेकर लौट रहा था। इसी दौरान प्रशासनिक टीम ने वाहन को रोक लिया। आरोप है कि मौके पर कार्रवाई के दौरान ट्रैक्टर को जब्त कर लिया गया और बाद में उसे छोड़ने के लिए 50 हजार रुपए की मांग की गई। परिवार का कहना है कि इतनी बड़ी रकम देना उनके लिए संभव नहीं था। इसी बात को लेकर लगातार तनाव बढ़ता गया।
राज ओगरे ने बताया कि उसके साथ दो अन्य ट्रैक्टर भी पकड़े गए थे। उसका आरोप है कि अन्य वाहनों को छोड़ दिया गया, लेकिन उसका ट्रैक्टर थाने में खड़ा करा दिया गया। उसने यह भी दावा किया कि मामले को लेकर फोन पर बातचीत के दौरान उसे डराया-धमकाया गया। जब उसने पूरी बात अपने पिता कमल ओगरे को बताई तो वे काफी परेशान हो गए। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 10 बजे के आसपास किसान मौके पर पहुंचे और कुछ समय बाद उन्होंने कीटनाशक पी लिया। घटना के बाद वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। किसान को तत्काल कसडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने के कारण उसकी जान बच गई। चिकित्सकों ने बताया कि किसान की हालत अब स्थिर है और लगातार निगरानी में रखी गई है। अस्पताल में भर्ती होने की खबर फैलते ही गांव के लोग और परिजन बड़ी संख्या में स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने लगे। घटना को लेकर पूरे इलाके में चर्चा शुरू हो गई। परिजनों का कहना है कि कमल ओगरे पहले से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे थे। खेती से अपेक्षित आय नहीं मिल रही थी और परिवार की जिम्मेदारियां भी बढ़ती जा रही थीं। ऐसे में ट्रैक्टर जब्त होने की सूचना और कथित रिश्वत की मांग ने उन्हें और ज्यादा तनाव में डाल दिया। परिवार का दावा है कि इसी मानसिक दबाव के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। हालांकि पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
घटना की जानकारी मिलते ही कसडोल के कांग्रेस विधायक संदीप साहू अस्पताल पहुंचे। उन्होंने किसान और उसके परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली। विधायक ने कहा कि यदि किसी अधिकारी द्वारा अवैध वसूली या दबाव बनाने जैसी बात सामने आती है तो इसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। विधायक के अस्पताल पहुंचने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया। वहीं दूसरी ओर, नायब तहसीलदार आकांक्षा तिवारी ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने रेत के अवैध परिवहन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की थी। किसी भी व्यक्ति से न तो पैसे मांगे गए और न ही किसी प्रकार की अवैध वसूली की गई। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से लगातार अवैध रेत परिवहन पर कार्रवाई की जा रही थी और इसी वजह से उन्हें कई तरह के दबाव और धमकियां भी मिल रही थीं। उनका कहना है कि जिन वाहनों को जब्त किया गया, उनके पास आवश्यक दस्तावेज और रॉयल्टी संबंधी कागजात उपलब्ध नहीं थे। मामले ने तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। बलौदाबाजार कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने पूरे घटनाक्रम पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। एसडीएम को मामले की विस्तृत जांच कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। किसान की हालत में सुधार बताया जा रहा है, लेकिन यह घटना कई सवाल छोड़ गई है। एक तरफ परिजन रिश्वत मांगने और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ संबंधित अधिकारी सभी आरोपों को बेबुनियाद बता रही हैं।
