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बिलासपुर में 6.25 लाख का गांजा जब्त, बच्चे की आड़ लेकर तस्करी का आरोप
बिलासपुर,(छ.ग.)
सिविल लाइन पुलिस ने दो महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया। आरोप है कि पुलिस से बचने के लिए आरोपियों ने अपने साथ पांच साल के बच्चे को रखा था।
बिलासपुर में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सिविल लाइन पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने गांजा तस्करी के आरोप में दो महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 12.405 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 6.25 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस का दावा है कि आरोपी शक से बचने और आसानी से सफर करने के लिए अपने साथ पांच साल के एक बच्चे को भी लेकर चल रहे थे। कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। वहीं बच्चे को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि उसलापुर रेलवे स्टेशन स्थित लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र के पास दो महिलाएं और एक पुरुष संदिग्ध हालत में एक आसमानी रंग का ट्रॉली बैग लेकर खड़े हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि उनके साथ एक छोटा बच्चा भी है। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस ने टीम गठित कर मौके पर घेराबंदी शुरू कर दी। कुछ ही देर बाद बताए गए हुलिए से मेल खाते तीनों संदिग्ध एक ट्रॉली बैग और बच्चे के साथ दिखाई दिए।
पुलिस ने संदेह के आधार पर उन्हें रोककर पूछताछ की। शुरुआती जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर ट्रॉली बैग की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान बैग के अंदर खाकी रंग की प्लास्टिक टेप से लिपटे 11 पैकेट मिले। जब पैकेट खोले गए तो उनमें गांजा भरा हुआ था। मौके पर ही जब्त सामग्री का वजन किया गया, जिसमें कुल 12.405 किलोग्राम गांजा निकला। बरामद मादक पदार्थ की कीमत करीब 6.25 लाख रुपए आंकी गई है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ओडिशा के झारसुगुड़ा निवासी प्रकाश नायक उर्फ पप्पू (41), नेहा सिंह (34) और जांजगीर-चांपा जिले की अर्चना सिंह (27) के रूप में हुई है। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गांजा कहां से लाया गया था और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। इसके अलावा इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने अपने साथ पांच साल के बच्चे को इसलिए रखा था ताकि किसी को उन पर आसानी से शक न हो। आमतौर पर परिवार के साथ यात्रा करने वालों पर कम संदेह किया जाता है और इसी बात का फायदा उठाने की कोशिश की गई। हालांकि पुलिस को पहले से ही सूचना में बच्चे के साथ होने की जानकारी मिल गई थी, जिसके चलते टीम पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंची और कार्रवाई सफल रही। जब्ती की कार्रवाई के बाद पुलिस ने गांजा, ट्रॉली बैग और अन्य सामान को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। तीनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत में पेशी के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। वहीं उनके साथ मिले बच्चे की सुरक्षा और देखभाल को ध्यान में रखते हुए उसे बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है।
पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का संबंध किसी बड़े अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह से तो नहीं है। मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। बिलासपुर पुलिस का कहना है कि जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई है ताकि मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं भी नशीले पदार्थों की तस्करी या संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में नशीले पदार्थों की तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। पुलिस का मानना है कि सीमावर्ती राज्यों से गांजे की अवैध सप्लाई रोकने के लिए लगातार निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। बिलासपुर की यह कार्रवाई भी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।
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बिलासपुर में 6.25 लाख का गांजा जब्त, बच्चे की आड़ लेकर तस्करी का आरोप
बिलासपुर,(छ.ग.)
बिलासपुर में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सिविल लाइन पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने गांजा तस्करी के आरोप में दो महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 12.405 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 6.25 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस का दावा है कि आरोपी शक से बचने और आसानी से सफर करने के लिए अपने साथ पांच साल के एक बच्चे को भी लेकर चल रहे थे। कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। वहीं बच्चे को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि उसलापुर रेलवे स्टेशन स्थित लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र के पास दो महिलाएं और एक पुरुष संदिग्ध हालत में एक आसमानी रंग का ट्रॉली बैग लेकर खड़े हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि उनके साथ एक छोटा बच्चा भी है। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस ने टीम गठित कर मौके पर घेराबंदी शुरू कर दी। कुछ ही देर बाद बताए गए हुलिए से मेल खाते तीनों संदिग्ध एक ट्रॉली बैग और बच्चे के साथ दिखाई दिए।
पुलिस ने संदेह के आधार पर उन्हें रोककर पूछताछ की। शुरुआती जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर ट्रॉली बैग की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान बैग के अंदर खाकी रंग की प्लास्टिक टेप से लिपटे 11 पैकेट मिले। जब पैकेट खोले गए तो उनमें गांजा भरा हुआ था। मौके पर ही जब्त सामग्री का वजन किया गया, जिसमें कुल 12.405 किलोग्राम गांजा निकला। बरामद मादक पदार्थ की कीमत करीब 6.25 लाख रुपए आंकी गई है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ओडिशा के झारसुगुड़ा निवासी प्रकाश नायक उर्फ पप्पू (41), नेहा सिंह (34) और जांजगीर-चांपा जिले की अर्चना सिंह (27) के रूप में हुई है। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गांजा कहां से लाया गया था और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। इसके अलावा इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने अपने साथ पांच साल के बच्चे को इसलिए रखा था ताकि किसी को उन पर आसानी से शक न हो। आमतौर पर परिवार के साथ यात्रा करने वालों पर कम संदेह किया जाता है और इसी बात का फायदा उठाने की कोशिश की गई। हालांकि पुलिस को पहले से ही सूचना में बच्चे के साथ होने की जानकारी मिल गई थी, जिसके चलते टीम पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंची और कार्रवाई सफल रही। जब्ती की कार्रवाई के बाद पुलिस ने गांजा, ट्रॉली बैग और अन्य सामान को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। तीनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत में पेशी के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। वहीं उनके साथ मिले बच्चे की सुरक्षा और देखभाल को ध्यान में रखते हुए उसे बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है।
पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का संबंध किसी बड़े अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह से तो नहीं है। मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। बिलासपुर पुलिस का कहना है कि जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई है ताकि मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं भी नशीले पदार्थों की तस्करी या संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में नशीले पदार्थों की तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। पुलिस का मानना है कि सीमावर्ती राज्यों से गांजे की अवैध सप्लाई रोकने के लिए लगातार निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। बिलासपुर की यह कार्रवाई भी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।
