तीन रॉकेट फेल, आखिरी दांव और फिर इतिहास; ऐसे बनी स्पेसएक्स की सफलता की कहानी

बिजनेस डेस्क

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लगातार असफलताओं, आर्थिक संकट और दिवालिया होने की कगार से उठकर इलॉन मस्क ने स्पेसएक्स को दुनिया की सबसे प्रभावशाली अंतरिक्ष कंपनियों में बदल दिया। 55वें जन्मदिन पर जानिए इस सफर की पूरी कहानी।

आज दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शामिल इलॉन मस्क अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनकी कंपनी स्पेसएक्स का नाम अब अंतरिक्ष तकनीक की दुनिया में सबसे आगे गिना जाता है, लेकिन यहां तक पहुंचने का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी था जब लगातार तीन रॉकेट लॉन्च फेल हो चुके थे, टेस्ला आर्थिक संकट से जूझ रही थी और मस्क के पास बची हुई लगभग पूरी पूंजी चौथे लॉन्च पर लगी हुई थी। अगर वह मिशन भी असफल हो जाता तो स्पेसएक्स के साथ-साथ मस्क का कारोबारी भविष्य भी खत्म हो सकता था। लेकिन किस्मत और तकनीक दोनों ने साथ दिया और उसी लॉन्च ने इतिहास बदल दिया। आज स्पेसएक्स की सफलता ने मस्क को दुनिया के सबसे अमीर लोगों में सबसे आगे ला खड़ा किया है और उनकी संपत्ति ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े तक पहुंच चुकी है। इलॉन मस्क की कारोबारी यात्रा 1990 के दशक में शुरू हुई थी। उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी छोड़कर Zip2 नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया, जिसे बाद में कॉम्पैक ने खरीद लिया। इसके बाद उन्होंने X.com की शुरुआत की, जो आगे चलकर PayPal बना। जब eBay ने PayPal का अधिग्रहण किया तो मस्क को लगभग 180 मिलियन डॉलर मिले। आमतौर पर इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद लोग सुरक्षित निवेश करते हैं, लेकिन मस्क ने इसके उलट पूरा पैसा ऐसे क्षेत्रों में लगाया, जिन्हें उस समय बेहद जोखिम भरा माना जाता था। उन्होंने स्पेसएक्स, टेस्ला और सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स में अपनी अधिकांश पूंजी निवेश कर दी।

स्पेसएक्स की शुरुआत के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। साल 2001 में मस्क रूस गए थे, जहां उनका मकसद पुराने रॉकेट खरीदना था। लेकिन बातचीत के दौरान उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया और कीमतें भी उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा बताई गईं। बताया जाता है कि इसी अनुभव के बाद उन्होंने फैसला किया कि अगर रॉकेट इतने महंगे हैं तो उन्हें खुद बनाना चाहिए। उन्होंने रॉकेट निर्माण की लागत का अध्ययन किया और पाया कि कच्चे माल की वास्तविक कीमत अंतिम कीमत का बहुत छोटा हिस्सा होती है। यहीं से कम लागत में अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने का विचार जन्मा। स्पेसएक्स के शुरुआती साल बेहद कठिन रहे। पहला फाल्कन-1 रॉकेट मार्च 2006 में लॉन्च हुआ, लेकिन उड़ान भरने के कुछ समय बाद तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दूसरी उड़ान भी लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी। तीसरे मिशन में भी रॉकेट ऑर्बिट तक पहुंचने से पहले नष्ट हो गया। लगातार तीन असफलताओं के बाद निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ने लगा था। कंपनी आर्थिक संकट में थी और मस्क भी निजी तौर पर लगभग दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गए थे। कई लोगों ने सलाह दी कि अब इस प्रोजेक्ट को बंद कर देना चाहिए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

28 सितंबर 2008 का दिन स्पेसएक्स के इतिहास का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ। चौथा फाल्कन-1 मिशन सफल रहा और पहली बार किसी निजी कंपनी का रॉकेट पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचने में कामयाब हुआ। इस उपलब्धि ने न सिर्फ स्पेसएक्स को बचा लिया बल्कि पूरी अंतरिक्ष इंडस्ट्री की सोच बदल दी। इसके बाद कंपनी को बड़े सरकारी और व्यावसायिक अनुबंध मिलने शुरू हुए और धीरे-धीरे उसका विस्तार तेज हो गया। स्पेसएक्स की सबसे बड़ी उपलब्धियों में फाल्कन-9 रॉकेट का विकास माना जाता है। पहले रॉकेट का पहला चरण मिशन पूरा होने के बाद समुद्र में गिरकर नष्ट हो जाता था, लेकिन स्पेसएक्स ने ऐसा सिस्टम विकसित किया जिसमें रॉकेट का पहला चरण वापस धरती पर सुरक्षित उतर सकता है और दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। दिसंबर 2015 में पहली बार फाल्कन-9 की सफल लैंडिंग हुई। इस तकनीक ने लॉन्च की लागत में भारी कमी लाई और अंतरिक्ष मिशनों को पहले की तुलना में काफी सस्ता बना दिया।

इसी रणनीति का असर यह हुआ कि स्पेसएक्स ने वैश्विक कमर्शियल लॉन्च बाजार में मजबूत पकड़ बना ली। आज दुनिया के कई देशों, निजी कंपनियों और अंतरिक्ष एजेंसियों के सैटेलाइट स्पेसएक्स के जरिए लॉन्च किए जाते हैं। कंपनी का ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक अंतरिक्ष यात्रियों और सामान को पहुंचाने का नियमित माध्यम बन चुका है। हाल के वर्षों में यह स्पेसक्राफ्ट कई महत्वपूर्ण मानव मिशनों का हिस्सा भी रहा है। स्पेसएक्स अब केवल रॉकेट लॉन्च करने वाली कंपनी नहीं रह गई है। कंपनी स्टारशिप जैसे पूरी तरह रीयूजेबल रॉकेट पर काम कर रही है, जिसे भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह के मिशनों के लिए इस्तेमाल करने की योजना है। इलॉन मस्क का कहना है कि उनका अंतिम लक्ष्य इंसानों को बहुग्रहीय सभ्यता बनाना है। इसी दिशा में कंपनी चंद्रमा पर औद्योगिक गतिविधियों और भविष्य की अंतरिक्ष तकनीकों को लेकर भी लंबे समय की योजनाओं पर काम कर रही है। आज जब इलॉन मस्क अपने 55वें जन्मदिन पर दुनिया के सबसे प्रभावशाली उद्यमियों में गिने जाते हैं, तब उनकी कहानी केवल सफलता की नहीं बल्कि लगातार असफलताओं के बाद भी हार न मानने की मिसाल बन चुकी है।

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28 Jun 2026 By Vaishnavi.J

तीन रॉकेट फेल, आखिरी दांव और फिर इतिहास; ऐसे बनी स्पेसएक्स की सफलता की कहानी

बिजनेस डेस्क

आज दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शामिल इलॉन मस्क अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनकी कंपनी स्पेसएक्स का नाम अब अंतरिक्ष तकनीक की दुनिया में सबसे आगे गिना जाता है, लेकिन यहां तक पहुंचने का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी था जब लगातार तीन रॉकेट लॉन्च फेल हो चुके थे, टेस्ला आर्थिक संकट से जूझ रही थी और मस्क के पास बची हुई लगभग पूरी पूंजी चौथे लॉन्च पर लगी हुई थी। अगर वह मिशन भी असफल हो जाता तो स्पेसएक्स के साथ-साथ मस्क का कारोबारी भविष्य भी खत्म हो सकता था। लेकिन किस्मत और तकनीक दोनों ने साथ दिया और उसी लॉन्च ने इतिहास बदल दिया। आज स्पेसएक्स की सफलता ने मस्क को दुनिया के सबसे अमीर लोगों में सबसे आगे ला खड़ा किया है और उनकी संपत्ति ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े तक पहुंच चुकी है। इलॉन मस्क की कारोबारी यात्रा 1990 के दशक में शुरू हुई थी। उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी छोड़कर Zip2 नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया, जिसे बाद में कॉम्पैक ने खरीद लिया। इसके बाद उन्होंने X.com की शुरुआत की, जो आगे चलकर PayPal बना। जब eBay ने PayPal का अधिग्रहण किया तो मस्क को लगभग 180 मिलियन डॉलर मिले। आमतौर पर इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद लोग सुरक्षित निवेश करते हैं, लेकिन मस्क ने इसके उलट पूरा पैसा ऐसे क्षेत्रों में लगाया, जिन्हें उस समय बेहद जोखिम भरा माना जाता था। उन्होंने स्पेसएक्स, टेस्ला और सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स में अपनी अधिकांश पूंजी निवेश कर दी।

स्पेसएक्स की शुरुआत के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। साल 2001 में मस्क रूस गए थे, जहां उनका मकसद पुराने रॉकेट खरीदना था। लेकिन बातचीत के दौरान उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया और कीमतें भी उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा बताई गईं। बताया जाता है कि इसी अनुभव के बाद उन्होंने फैसला किया कि अगर रॉकेट इतने महंगे हैं तो उन्हें खुद बनाना चाहिए। उन्होंने रॉकेट निर्माण की लागत का अध्ययन किया और पाया कि कच्चे माल की वास्तविक कीमत अंतिम कीमत का बहुत छोटा हिस्सा होती है। यहीं से कम लागत में अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने का विचार जन्मा। स्पेसएक्स के शुरुआती साल बेहद कठिन रहे। पहला फाल्कन-1 रॉकेट मार्च 2006 में लॉन्च हुआ, लेकिन उड़ान भरने के कुछ समय बाद तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दूसरी उड़ान भी लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी। तीसरे मिशन में भी रॉकेट ऑर्बिट तक पहुंचने से पहले नष्ट हो गया। लगातार तीन असफलताओं के बाद निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ने लगा था। कंपनी आर्थिक संकट में थी और मस्क भी निजी तौर पर लगभग दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गए थे। कई लोगों ने सलाह दी कि अब इस प्रोजेक्ट को बंद कर देना चाहिए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

28 सितंबर 2008 का दिन स्पेसएक्स के इतिहास का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ। चौथा फाल्कन-1 मिशन सफल रहा और पहली बार किसी निजी कंपनी का रॉकेट पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचने में कामयाब हुआ। इस उपलब्धि ने न सिर्फ स्पेसएक्स को बचा लिया बल्कि पूरी अंतरिक्ष इंडस्ट्री की सोच बदल दी। इसके बाद कंपनी को बड़े सरकारी और व्यावसायिक अनुबंध मिलने शुरू हुए और धीरे-धीरे उसका विस्तार तेज हो गया। स्पेसएक्स की सबसे बड़ी उपलब्धियों में फाल्कन-9 रॉकेट का विकास माना जाता है। पहले रॉकेट का पहला चरण मिशन पूरा होने के बाद समुद्र में गिरकर नष्ट हो जाता था, लेकिन स्पेसएक्स ने ऐसा सिस्टम विकसित किया जिसमें रॉकेट का पहला चरण वापस धरती पर सुरक्षित उतर सकता है और दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। दिसंबर 2015 में पहली बार फाल्कन-9 की सफल लैंडिंग हुई। इस तकनीक ने लॉन्च की लागत में भारी कमी लाई और अंतरिक्ष मिशनों को पहले की तुलना में काफी सस्ता बना दिया।

इसी रणनीति का असर यह हुआ कि स्पेसएक्स ने वैश्विक कमर्शियल लॉन्च बाजार में मजबूत पकड़ बना ली। आज दुनिया के कई देशों, निजी कंपनियों और अंतरिक्ष एजेंसियों के सैटेलाइट स्पेसएक्स के जरिए लॉन्च किए जाते हैं। कंपनी का ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक अंतरिक्ष यात्रियों और सामान को पहुंचाने का नियमित माध्यम बन चुका है। हाल के वर्षों में यह स्पेसक्राफ्ट कई महत्वपूर्ण मानव मिशनों का हिस्सा भी रहा है। स्पेसएक्स अब केवल रॉकेट लॉन्च करने वाली कंपनी नहीं रह गई है। कंपनी स्टारशिप जैसे पूरी तरह रीयूजेबल रॉकेट पर काम कर रही है, जिसे भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह के मिशनों के लिए इस्तेमाल करने की योजना है। इलॉन मस्क का कहना है कि उनका अंतिम लक्ष्य इंसानों को बहुग्रहीय सभ्यता बनाना है। इसी दिशा में कंपनी चंद्रमा पर औद्योगिक गतिविधियों और भविष्य की अंतरिक्ष तकनीकों को लेकर भी लंबे समय की योजनाओं पर काम कर रही है। आज जब इलॉन मस्क अपने 55वें जन्मदिन पर दुनिया के सबसे प्रभावशाली उद्यमियों में गिने जाते हैं, तब उनकी कहानी केवल सफलता की नहीं बल्कि लगातार असफलताओं के बाद भी हार न मानने की मिसाल बन चुकी है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/three-rockets-failed-the-last-bet-and-then-history-became/article-57192

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