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बिना इंटरनेट और मोबाइल के बढ़ रहा जनरल नॉलेज, गांव की दीवारें बनीं बच्चों की पाठशाला
बिलासपुर,(छ.ग.)
बिलासपुर के ग्राम पंचायत सेलर में विद्यार्थियों के लिए अनोखी पहल शुरू की गई है। स्कूल जाने वाले रास्ते की दीवारों पर सामान्य ज्ञान के प्रश्न लिखे जा रहे हैं, ताकि बच्चे रोज पढ़ते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।
बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत सेलर में शिक्षा को लेकर एक अनोखी पहल शुरू की गई है, जिसकी चर्चा अब आसपास के इलाकों में भी होने लगी है। यहां बच्चों के जनरल नॉलेज को मजबूत बनाने के लिए स्कूल के रास्ते की दीवारों को ही खुली पाठशाला में बदल दिया गया है। गांव के सरपंच धनंजय सिंह के नेतृत्व में स्कूल से मुख्य गुड्डी तक की दीवारों पर सामान्य ज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न लिखे गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी रोजाना स्कूल आते-जाते इन प्रश्नों को पढ़ें और बिना अलग से समय निकाले सामान्य ज्ञान की तैयारी करते रहें। इस पहल की खास बात यह है कि इसमें किसी प्रकार की सरकारी राशि का उपयोग नहीं किया जा रहा, बल्कि पूरा कार्य ग्रामीणों के जनसहयोग से किया जा रहा है। ग्राम पंचायत का मानना है कि आज के समय में लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा में सामान्य ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में यदि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही इतिहास, भूगोल, विज्ञान, भारतीय संविधान, खेल, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं की जानकारी मिलती रहे तो आगे चलकर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में काफी मदद मिलेगी। इसी सोच के साथ गांव में दीवार लेखन का यह अभियान शुरू किया गया है। विद्यार्थी रोज जब स्कूल जाएंगे और लौटेंगे तो इन प्रश्नों पर उनकी नजर पड़ेगी। धीरे-धीरे यही जानकारी उनकी याददाश्त का हिस्सा बन जाएगी और पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि भी बढ़ेगी।
इस अभियान को केवल एक बार का प्रयोग बनाकर नहीं छोड़ा गया है। पंचायत ने पहले से ही इसकी आगे की योजना भी तैयार कर ली है। तय किया गया है कि हर 60 दिन बाद दीवारों पर लिखे पुराने प्रश्न हटाकर उनकी जगह नए प्रश्न लिखे जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को लगातार नई जानकारी मिलती रहेगी और वे एक ही विषय तक सीमित नहीं रहेंगे। हर दो महीने में अलग-अलग विषयों के प्रश्न लिखे जाने से बच्चों का ज्ञान लगातार बढ़ेगा और उन्हें देश-दुनिया से जुड़ी नई जानकारियां भी मिलती रहेंगी। पंचायत ने इस पहल को और प्रभावी बनाने के लिए प्रतियोगिता का भी रास्ता चुना है। प्रत्येक दो माह बाद कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए सामान्य ज्ञान की परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा। पंचायत का मानना है कि पुरस्कार मिलने से बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होगी और वे नियमित रूप से पढ़ाई के लिए प्रेरित होंगे। इससे केवल अच्छे अंक लाने की सोच नहीं बल्कि सीखने की आदत भी विकसित होगी।
इस अभियान में केवल पंचायत ही नहीं बल्कि पूरा गांव सहयोग कर रहा है। स्कूल विकास समिति के अध्यक्ष, समिति के सदस्य, शिक्षक और गांव के कई गणमान्य नागरिक इसमें सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। दीवारों पर प्रश्न लिखने से लेकर उन्हें समय-समय पर बदलने तक का पूरा काम जनसहयोग से किया जा रहा है। पंचायत का कहना है कि भविष्य में गांव के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल लिखे जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। सरपंच धनंजय सिंह का कहना है कि यदि विद्यार्थी प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी सामान्य ज्ञान की जानकारी भी हासिल करते रहें तो 12वीं तक पहुंचते-पहुंचते उनके पास हजारों महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह होगा। इससे वे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिक आत्मविश्वास के साथ शामिल हो सकेंगे। उनका मानना है कि पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि गांव का वातावरण भी सीखने वाला बन जाए तो बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है।
शिक्षकों का भी कहना है कि बच्चों के लिए यह पहल काफी उपयोगी साबित होगी। सामान्य तौर पर विद्यार्थी सामान्य ज्ञान को अलग विषय मानकर कम महत्व देते हैं, लेकिन जब वही जानकारी रोज रास्ते में दिखाई देगी तो उसे पढ़ना उनकी आदत बन जाएगी। बार-बार एक ही प्रश्न देखने और पढ़ने से याददाश्त मजबूत होती है और बिना किसी अतिरिक्त दबाव के सीखने की प्रक्रिया भी आसान हो जाती है। यह तरीका खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के उन विद्यार्थियों के लिए अधिक फायदेमंद हो सकता है, जिनके पास इंटरनेट या डिजिटल संसाधनों की सीमित पहुंच है। सामान्य ज्ञान केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। यह व्यक्तित्व विकास, तार्किक सोच और जागरूक नागरिक बनने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश, संविधान, विज्ञान, पर्यावरण और समसामयिक घटनाओं की जानकारी बच्चों को समाज और दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है। ऐसे प्रयास ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। ग्राम पंचायत सेलर की यह पहल अब दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। कम संसाधनों में शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने का यह मॉडल दिखाता है कि यदि स्थानीय स्तर पर इच्छाशक्ति और जनसहयोग हो तो बड़े बदलाव संभव हैं। आने वाले समय में यदि अन्य पंचायतें भी इस तरह के प्रयास अपनाती हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उनकी तैयारी पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकती है।
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बिना इंटरनेट और मोबाइल के बढ़ रहा जनरल नॉलेज, गांव की दीवारें बनीं बच्चों की पाठशाला
बिलासपुर,(छ.ग.)
बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत सेलर में शिक्षा को लेकर एक अनोखी पहल शुरू की गई है, जिसकी चर्चा अब आसपास के इलाकों में भी होने लगी है। यहां बच्चों के जनरल नॉलेज को मजबूत बनाने के लिए स्कूल के रास्ते की दीवारों को ही खुली पाठशाला में बदल दिया गया है। गांव के सरपंच धनंजय सिंह के नेतृत्व में स्कूल से मुख्य गुड्डी तक की दीवारों पर सामान्य ज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न लिखे गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी रोजाना स्कूल आते-जाते इन प्रश्नों को पढ़ें और बिना अलग से समय निकाले सामान्य ज्ञान की तैयारी करते रहें। इस पहल की खास बात यह है कि इसमें किसी प्रकार की सरकारी राशि का उपयोग नहीं किया जा रहा, बल्कि पूरा कार्य ग्रामीणों के जनसहयोग से किया जा रहा है। ग्राम पंचायत का मानना है कि आज के समय में लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा में सामान्य ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में यदि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही इतिहास, भूगोल, विज्ञान, भारतीय संविधान, खेल, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं की जानकारी मिलती रहे तो आगे चलकर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में काफी मदद मिलेगी। इसी सोच के साथ गांव में दीवार लेखन का यह अभियान शुरू किया गया है। विद्यार्थी रोज जब स्कूल जाएंगे और लौटेंगे तो इन प्रश्नों पर उनकी नजर पड़ेगी। धीरे-धीरे यही जानकारी उनकी याददाश्त का हिस्सा बन जाएगी और पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि भी बढ़ेगी।
इस अभियान को केवल एक बार का प्रयोग बनाकर नहीं छोड़ा गया है। पंचायत ने पहले से ही इसकी आगे की योजना भी तैयार कर ली है। तय किया गया है कि हर 60 दिन बाद दीवारों पर लिखे पुराने प्रश्न हटाकर उनकी जगह नए प्रश्न लिखे जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को लगातार नई जानकारी मिलती रहेगी और वे एक ही विषय तक सीमित नहीं रहेंगे। हर दो महीने में अलग-अलग विषयों के प्रश्न लिखे जाने से बच्चों का ज्ञान लगातार बढ़ेगा और उन्हें देश-दुनिया से जुड़ी नई जानकारियां भी मिलती रहेंगी। पंचायत ने इस पहल को और प्रभावी बनाने के लिए प्रतियोगिता का भी रास्ता चुना है। प्रत्येक दो माह बाद कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए सामान्य ज्ञान की परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा। पंचायत का मानना है कि पुरस्कार मिलने से बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होगी और वे नियमित रूप से पढ़ाई के लिए प्रेरित होंगे। इससे केवल अच्छे अंक लाने की सोच नहीं बल्कि सीखने की आदत भी विकसित होगी।
इस अभियान में केवल पंचायत ही नहीं बल्कि पूरा गांव सहयोग कर रहा है। स्कूल विकास समिति के अध्यक्ष, समिति के सदस्य, शिक्षक और गांव के कई गणमान्य नागरिक इसमें सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। दीवारों पर प्रश्न लिखने से लेकर उन्हें समय-समय पर बदलने तक का पूरा काम जनसहयोग से किया जा रहा है। पंचायत का कहना है कि भविष्य में गांव के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल लिखे जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। सरपंच धनंजय सिंह का कहना है कि यदि विद्यार्थी प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी सामान्य ज्ञान की जानकारी भी हासिल करते रहें तो 12वीं तक पहुंचते-पहुंचते उनके पास हजारों महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह होगा। इससे वे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिक आत्मविश्वास के साथ शामिल हो सकेंगे। उनका मानना है कि पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि गांव का वातावरण भी सीखने वाला बन जाए तो बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है।
शिक्षकों का भी कहना है कि बच्चों के लिए यह पहल काफी उपयोगी साबित होगी। सामान्य तौर पर विद्यार्थी सामान्य ज्ञान को अलग विषय मानकर कम महत्व देते हैं, लेकिन जब वही जानकारी रोज रास्ते में दिखाई देगी तो उसे पढ़ना उनकी आदत बन जाएगी। बार-बार एक ही प्रश्न देखने और पढ़ने से याददाश्त मजबूत होती है और बिना किसी अतिरिक्त दबाव के सीखने की प्रक्रिया भी आसान हो जाती है। यह तरीका खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के उन विद्यार्थियों के लिए अधिक फायदेमंद हो सकता है, जिनके पास इंटरनेट या डिजिटल संसाधनों की सीमित पहुंच है। सामान्य ज्ञान केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। यह व्यक्तित्व विकास, तार्किक सोच और जागरूक नागरिक बनने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश, संविधान, विज्ञान, पर्यावरण और समसामयिक घटनाओं की जानकारी बच्चों को समाज और दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है। ऐसे प्रयास ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। ग्राम पंचायत सेलर की यह पहल अब दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। कम संसाधनों में शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने का यह मॉडल दिखाता है कि यदि स्थानीय स्तर पर इच्छाशक्ति और जनसहयोग हो तो बड़े बदलाव संभव हैं। आने वाले समय में यदि अन्य पंचायतें भी इस तरह के प्रयास अपनाती हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उनकी तैयारी पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकती है।
