PF निकासी और FD ब्याज पर कटा TDS वापस कैसे मिलेगा? ITR फाइल करने से मिल सकता है टैक्स रिफंड

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पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में अलग-अलग नियम, सही तरीके से ITR दाखिल करने पर बैंक खाते में आ सकता है अतिरिक्त टैक्स रिफंड

आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय आते ही सबसे ज्यादा सवाल टैक्स रिफंड को लेकर पूछे जाते हैं। कई नौकरीपेशा और वरिष्ठ नागरिक ऐसे हैं, जिनके फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर बैंक पहले ही TDS काट लेता है। वहीं, कुछ मामलों में कर्मचारी भविष्य निधि (PF) की समय से पहले निकासी पर भी टैक्स काटा जाता है। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि कटा हुआ टैक्स वापस नहीं मिल सकता, जबकि यदि आपकी कुल टैक्स देनदारी कम बनती है तो ITR दाखिल कर आप इस राशि का रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। टैक्स रिफंड अपने आप नहीं मिलता। इसके लिए आयकर रिटर्न सही जानकारी के साथ दाखिल करना जरूरी होता है। आयकर विभाग आपकी कुल आय, लागू टैक्स स्लैब, कटौतियों और पहले से कटे TDS का मिलान करता है। यदि पहले से जमा टैक्स आपकी वास्तविक देनदारी से अधिक होता है तो अतिरिक्त राशि सीधे आपके बैंक खाते में भेज दी जाती है। पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाले करदाताओं को कई तरह की टैक्स छूट का लाभ मिलता है। धारा 80C के तहत निवेश, पीएफ, जीवन बीमा और अन्य योग्य निवेशों पर कटौती का दावा किया जा सकता है। इसके अलावा धारा 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर भी राहत मिलती है। इन कटौतियों के कारण कुल कर योग्य आय कम हो जाती है और कई मामलों में पहले से कटा TDS पूरी तरह या आंशिक रूप से वापस मिल सकता है। हालांकि FD से मिलने वाला ब्याज और टैक्स योग्य PF निकासी को आय में दिखाना अनिवार्य होता है।

नई टैक्स व्यवस्था में अधिकांश पारंपरिक कटौतियां उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टैक्स रिफंड नहीं मिलेगा। यदि आपकी कुल टैक्स देनदारी पहले से कटे TDS से कम है तो नई व्यवस्था में भी रिफंड का दावा किया जा सकता है। अंतिम निर्णय आपकी कुल आय, लागू टैक्स स्लैब और उपलब्ध टैक्स राहत के आधार पर किया जाता है। रिफंड प्राप्त करने के लिए सबसे पहले आयकर पोर्टल पर अपने PAN से जुड़े खाते के माध्यम से लॉगिन करना होगा। इसके बाद Form 26AS और Annual Information Statement (AIS) की जांच करनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि FD ब्याज और PF निकासी पर कटा TDS सही तरीके से दर्ज है। यदि किसी प्रकार की विसंगति दिखाई देती है तो पहले उसे ठीक करवाना बेहतर रहता है।

इसके बाद सही असेसमेंट ईयर का चयन करते हुए पुरानी या नई टैक्स व्यवस्था में से उपयुक्त विकल्प चुनना होगा। रिटर्न भरते समय वेतन, FD ब्याज, PF निकासी, किराया, व्यवसाय या अन्य सभी कर योग्य आय की जानकारी सही-सही दर्ज करनी चाहिए। यदि पुरानी टैक्स व्यवस्था का चयन किया गया है तो पात्र निवेश और खर्चों की कटौतियां भी शामिल करनी होंगी। सभी जानकारी भरने के बाद रिटर्न जमा कर उसका सत्यापन करना आवश्यक है। सत्यापन पूरा होने के बाद ही आयकर विभाग रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू करता है। PF निकासी पर हर स्थिति में टैक्स नहीं लगता। यदि कर्मचारी निर्धारित नियमों के अनुसार तय अवधि पूरी करने के बाद PF निकालता है तो सामान्य परिस्थितियों में TDS नहीं काटा जाता। लेकिन समय से पहले निकासी करने पर कुछ मामलों में टैक्स कट सकता है। वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज "Income from Other Sources" के अंतर्गत कर योग्य माना जाता है। यदि ब्याज निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है तो बैंक TDS काट सकता है।

 ITR दाखिल करने से पहले सभी दस्तावेजों का मिलान अवश्य कर लें। PAN की जानकारी अपडेट होनी चाहिए, बैंक खाते का विवरण सही होना चाहिए और Form 26AS तथा AIS में दिखाई गई TDS जानकारी आपके रिकॉर्ड से मेल खानी चाहिए। यदि किसी बैंक या संस्था द्वारा TDS जमा नहीं किया गया है या गलत जानकारी दर्ज हुई है तो पहले उसे ठीक करवाना जरूरी है। समय पर ITR दाखिल करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। निर्धारित समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर न केवल जुर्माना लग सकता है बल्कि टैक्स रिफंड मिलने में भी देरी हो सकती है। इसलिए करदाताओं को सलाह दी जाती है कि सभी वित्तीय दस्तावेज तैयार रखें और अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते रिटर्न दाखिल करें। सही जानकारी, सटीक आय विवरण और उचित टैक्स व्यवस्था का चयन करके PF निकासी और FD ब्याज पर कटे अतिरिक्त TDS का रिफंड आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

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27 Jun 2026 By Vaishnavi.J

PF निकासी और FD ब्याज पर कटा TDS वापस कैसे मिलेगा? ITR फाइल करने से मिल सकता है टैक्स रिफंड

बिजनेस डेस्क

आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय आते ही सबसे ज्यादा सवाल टैक्स रिफंड को लेकर पूछे जाते हैं। कई नौकरीपेशा और वरिष्ठ नागरिक ऐसे हैं, जिनके फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर बैंक पहले ही TDS काट लेता है। वहीं, कुछ मामलों में कर्मचारी भविष्य निधि (PF) की समय से पहले निकासी पर भी टैक्स काटा जाता है। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि कटा हुआ टैक्स वापस नहीं मिल सकता, जबकि यदि आपकी कुल टैक्स देनदारी कम बनती है तो ITR दाखिल कर आप इस राशि का रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। टैक्स रिफंड अपने आप नहीं मिलता। इसके लिए आयकर रिटर्न सही जानकारी के साथ दाखिल करना जरूरी होता है। आयकर विभाग आपकी कुल आय, लागू टैक्स स्लैब, कटौतियों और पहले से कटे TDS का मिलान करता है। यदि पहले से जमा टैक्स आपकी वास्तविक देनदारी से अधिक होता है तो अतिरिक्त राशि सीधे आपके बैंक खाते में भेज दी जाती है। पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाले करदाताओं को कई तरह की टैक्स छूट का लाभ मिलता है। धारा 80C के तहत निवेश, पीएफ, जीवन बीमा और अन्य योग्य निवेशों पर कटौती का दावा किया जा सकता है। इसके अलावा धारा 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर भी राहत मिलती है। इन कटौतियों के कारण कुल कर योग्य आय कम हो जाती है और कई मामलों में पहले से कटा TDS पूरी तरह या आंशिक रूप से वापस मिल सकता है। हालांकि FD से मिलने वाला ब्याज और टैक्स योग्य PF निकासी को आय में दिखाना अनिवार्य होता है।

नई टैक्स व्यवस्था में अधिकांश पारंपरिक कटौतियां उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टैक्स रिफंड नहीं मिलेगा। यदि आपकी कुल टैक्स देनदारी पहले से कटे TDS से कम है तो नई व्यवस्था में भी रिफंड का दावा किया जा सकता है। अंतिम निर्णय आपकी कुल आय, लागू टैक्स स्लैब और उपलब्ध टैक्स राहत के आधार पर किया जाता है। रिफंड प्राप्त करने के लिए सबसे पहले आयकर पोर्टल पर अपने PAN से जुड़े खाते के माध्यम से लॉगिन करना होगा। इसके बाद Form 26AS और Annual Information Statement (AIS) की जांच करनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि FD ब्याज और PF निकासी पर कटा TDS सही तरीके से दर्ज है। यदि किसी प्रकार की विसंगति दिखाई देती है तो पहले उसे ठीक करवाना बेहतर रहता है।

इसके बाद सही असेसमेंट ईयर का चयन करते हुए पुरानी या नई टैक्स व्यवस्था में से उपयुक्त विकल्प चुनना होगा। रिटर्न भरते समय वेतन, FD ब्याज, PF निकासी, किराया, व्यवसाय या अन्य सभी कर योग्य आय की जानकारी सही-सही दर्ज करनी चाहिए। यदि पुरानी टैक्स व्यवस्था का चयन किया गया है तो पात्र निवेश और खर्चों की कटौतियां भी शामिल करनी होंगी। सभी जानकारी भरने के बाद रिटर्न जमा कर उसका सत्यापन करना आवश्यक है। सत्यापन पूरा होने के बाद ही आयकर विभाग रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू करता है। PF निकासी पर हर स्थिति में टैक्स नहीं लगता। यदि कर्मचारी निर्धारित नियमों के अनुसार तय अवधि पूरी करने के बाद PF निकालता है तो सामान्य परिस्थितियों में TDS नहीं काटा जाता। लेकिन समय से पहले निकासी करने पर कुछ मामलों में टैक्स कट सकता है। वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज "Income from Other Sources" के अंतर्गत कर योग्य माना जाता है। यदि ब्याज निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है तो बैंक TDS काट सकता है।

 ITR दाखिल करने से पहले सभी दस्तावेजों का मिलान अवश्य कर लें। PAN की जानकारी अपडेट होनी चाहिए, बैंक खाते का विवरण सही होना चाहिए और Form 26AS तथा AIS में दिखाई गई TDS जानकारी आपके रिकॉर्ड से मेल खानी चाहिए। यदि किसी बैंक या संस्था द्वारा TDS जमा नहीं किया गया है या गलत जानकारी दर्ज हुई है तो पहले उसे ठीक करवाना जरूरी है। समय पर ITR दाखिल करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। निर्धारित समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर न केवल जुर्माना लग सकता है बल्कि टैक्स रिफंड मिलने में भी देरी हो सकती है। इसलिए करदाताओं को सलाह दी जाती है कि सभी वित्तीय दस्तावेज तैयार रखें और अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते रिटर्न दाखिल करें। सही जानकारी, सटीक आय विवरण और उचित टैक्स व्यवस्था का चयन करके PF निकासी और FD ब्याज पर कटे अतिरिक्त TDS का रिफंड आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a3f6ca73121d/article-57102

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