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रायगढ़ में एल्युमिनियम व्यापारी से 50 हजार की ठगी, सस्ता माल देने का झांसा देकर आरोपी फरार
रायगढ़,(छ.ग.)
रायपुर की फर्जी फर्म बताकर लिया ऑर्डर, एडवांस राशि लेने के बाद न माल पहुंचाया और न लौटाए पैसे, लैलूंगा थाने में मामला दर्ज
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एल्युमिनियम कारोबारी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। लैलूंगा थाना क्षेत्र में रहने वाले एक व्यापारी से आरोपी ने खुद को रायपुर का एल्युमिनियम सप्लायर बताकर 50 हजार रुपए की ठगी कर ली। बताया जा रहा है कि आरोपी ने बाजार से कम कीमत पर एल्युमिनियम सेक्शन उपलब्ध कराने का दावा किया था। सस्ते दाम और जल्दी डिलीवरी का भरोसा देकर उसने व्यापारी से ऑर्डर लिया और एडवांस भुगतान हासिल कर लिया। रकम मिलने के बाद आरोपी ने संपर्क बंद कर दिया। मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांधी नगर वार्ड क्रमांक 7 निवासी विजय राणा एल्युमिनियम सेक्शन और ग्लास का कारोबार करते हैं। उनकी दुकान विजय एल्युमिनियम एंड ग्लास शॉप के नाम से संचालित होती है। 29 मई को उनके मोबाइल पर एक कॉल आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को एल्युमिनियम सेक्शन का व्यापारी बताते हुए अपना नाम मुकेश शर्मा बताया। उसने दावा किया कि उसकी फर्म रायपुर के भनपुरी स्थित बंजारी माता मंदिर के पास संचालित होती है और वह लंबे समय से एल्युमिनियम व्यापार से जुड़ा हुआ है। बातचीत के दौरान आरोपी ने बाजार की तुलना में कम कीमत पर माल उपलब्ध कराने की बात कही। व्यापारी को सौदा लाभदायक लगा और दोनों के बीच माल सप्लाई को लेकर चर्चा आगे बढ़ी। बताया गया कि आरोपी ने पांच बंडल एल्युमिनियम सेक्शन का ऑर्डर बुक किया, जिसकी कुल कीमत 1 लाख 23 हजार 843 रुपए तय हुई। सौदा तय होने के बाद आरोपी ने भुगतान के लिए एक क्यूआर कोड और मोबाइल नंबर भेजा। यह क्यूआर कोड शिवम कुमार नाम के व्यक्ति के नाम पर बताया गया। आरोपी ने माल भेजने से पहले 50 हजार रुपए एडवांस जमा करने की मांग की। कारोबारी ने भरोसा करते हुए उसी दिन बताए गए खाते में ऑनलाइन माध्यम से 50 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। आरोपी ने कहा कि दो दिनों के भीतर पूरा माल निर्धारित पते पर पहुंच जाएगा और बाकी भुगतान डिलीवरी के समय लिया जाएगा।
हालांकि तय समय गुजरने के बाद भी सामान नहीं पहुंचा। शुरुआत में व्यापारी ने सोचा कि परिवहन में देरी हो सकती है, लेकिन जब लगातार दो दिन और बीत गए तो उन्हें शक होने लगा। उन्होंने आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मोबाइल नंबर पर बात नहीं हो सकी। कई बार कॉल करने और संदेश भेजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इस बीच व्यापारी ने अपने स्तर पर आरोपी और उसकी बताई गई फर्म के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि जिस नाम और पते का उपयोग कर सौदा किया गया था, वह संदिग्ध है। कथित फर्म का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला और व्यापारी को एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद विजय राणा ने पूरे मामले की शिकायत लैलूंगा थाना पहुंचकर दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने भुगतान की रसीद, मोबाइल नंबर और अन्य उपलब्ध जानकारी पुलिस को सौंपी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार ऑनलाइन लेनदेन और मोबाइल नंबर से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। संबंधित बैंक खातों और डिजिटल भुगतान की जानकारी भी खंगाली जा रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके।पुलिस का कहना है कि वर्तमान समय में व्यापारियों को इस तरह के फर्जी सौदों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। कई मामलों में आरोपी खुद को बड़े सप्लायर या प्रतिष्ठित कारोबारी बताकर कम कीमत का लालच देते हैं और एडवांस राशि लेकर गायब हो जाते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी नए सप्लायर की पहचान, फर्म का पंजीकरण और व्यवसायिक रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है। केवल मोबाइल पर हुई बातचीत या सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर आर्थिक लेनदेन करना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
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रायगढ़ में एल्युमिनियम व्यापारी से 50 हजार की ठगी, सस्ता माल देने का झांसा देकर आरोपी फरार
रायगढ़,(छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एल्युमिनियम कारोबारी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। लैलूंगा थाना क्षेत्र में रहने वाले एक व्यापारी से आरोपी ने खुद को रायपुर का एल्युमिनियम सप्लायर बताकर 50 हजार रुपए की ठगी कर ली। बताया जा रहा है कि आरोपी ने बाजार से कम कीमत पर एल्युमिनियम सेक्शन उपलब्ध कराने का दावा किया था। सस्ते दाम और जल्दी डिलीवरी का भरोसा देकर उसने व्यापारी से ऑर्डर लिया और एडवांस भुगतान हासिल कर लिया। रकम मिलने के बाद आरोपी ने संपर्क बंद कर दिया। मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांधी नगर वार्ड क्रमांक 7 निवासी विजय राणा एल्युमिनियम सेक्शन और ग्लास का कारोबार करते हैं। उनकी दुकान विजय एल्युमिनियम एंड ग्लास शॉप के नाम से संचालित होती है। 29 मई को उनके मोबाइल पर एक कॉल आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को एल्युमिनियम सेक्शन का व्यापारी बताते हुए अपना नाम मुकेश शर्मा बताया। उसने दावा किया कि उसकी फर्म रायपुर के भनपुरी स्थित बंजारी माता मंदिर के पास संचालित होती है और वह लंबे समय से एल्युमिनियम व्यापार से जुड़ा हुआ है। बातचीत के दौरान आरोपी ने बाजार की तुलना में कम कीमत पर माल उपलब्ध कराने की बात कही। व्यापारी को सौदा लाभदायक लगा और दोनों के बीच माल सप्लाई को लेकर चर्चा आगे बढ़ी। बताया गया कि आरोपी ने पांच बंडल एल्युमिनियम सेक्शन का ऑर्डर बुक किया, जिसकी कुल कीमत 1 लाख 23 हजार 843 रुपए तय हुई। सौदा तय होने के बाद आरोपी ने भुगतान के लिए एक क्यूआर कोड और मोबाइल नंबर भेजा। यह क्यूआर कोड शिवम कुमार नाम के व्यक्ति के नाम पर बताया गया। आरोपी ने माल भेजने से पहले 50 हजार रुपए एडवांस जमा करने की मांग की। कारोबारी ने भरोसा करते हुए उसी दिन बताए गए खाते में ऑनलाइन माध्यम से 50 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। आरोपी ने कहा कि दो दिनों के भीतर पूरा माल निर्धारित पते पर पहुंच जाएगा और बाकी भुगतान डिलीवरी के समय लिया जाएगा।
हालांकि तय समय गुजरने के बाद भी सामान नहीं पहुंचा। शुरुआत में व्यापारी ने सोचा कि परिवहन में देरी हो सकती है, लेकिन जब लगातार दो दिन और बीत गए तो उन्हें शक होने लगा। उन्होंने आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मोबाइल नंबर पर बात नहीं हो सकी। कई बार कॉल करने और संदेश भेजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इस बीच व्यापारी ने अपने स्तर पर आरोपी और उसकी बताई गई फर्म के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि जिस नाम और पते का उपयोग कर सौदा किया गया था, वह संदिग्ध है। कथित फर्म का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला और व्यापारी को एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद विजय राणा ने पूरे मामले की शिकायत लैलूंगा थाना पहुंचकर दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने भुगतान की रसीद, मोबाइल नंबर और अन्य उपलब्ध जानकारी पुलिस को सौंपी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार ऑनलाइन लेनदेन और मोबाइल नंबर से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। संबंधित बैंक खातों और डिजिटल भुगतान की जानकारी भी खंगाली जा रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके।पुलिस का कहना है कि वर्तमान समय में व्यापारियों को इस तरह के फर्जी सौदों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। कई मामलों में आरोपी खुद को बड़े सप्लायर या प्रतिष्ठित कारोबारी बताकर कम कीमत का लालच देते हैं और एडवांस राशि लेकर गायब हो जाते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी नए सप्लायर की पहचान, फर्म का पंजीकरण और व्यवसायिक रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है। केवल मोबाइल पर हुई बातचीत या सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर आर्थिक लेनदेन करना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
