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भक्ति और आस्था से गूंजा रायपुर, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
Digital Desk
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सोने की झाड़ू से निभाई पारंपरिक छेरापहरा रस्म, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कंधों पर उठाकर महाप्रभु को रथ तक पहुंचाया।
भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा के पावन अवसर पर गुरुवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। रायपुर के अवंति विहार-गायत्री नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से निकली भव्य रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूरे वातावरण को जय जगन्नाथ के उद्घोष से भक्तिमय बना दिया। पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और पुष्प वर्षा के बीच भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले।
रथयात्रा का सबसे प्रमुख आकर्षण पारंपरिक ‘छेरापहरा’ की रस्म रही। इस दौरान छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महाप्रभु के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की सफाई कर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा और सेवाभाव का परिचय दिया। यह परंपरा भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है, जिसका संदेश है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और सेवा सबसे बड़ा धर्म है।
रथयात्रा शुरू होने से पहले मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने विधिवत पूजा कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों, आकर्षक विद्युत सज्जा और पारंपरिक अलंकरण से भव्य रूप दिया गया था। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर में लगी रहीं और लोगों ने महाप्रभु के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को अपने कंधों पर उठाकर पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ रथ तक पहुंचाया। इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। जैसे ही भगवान की प्रतिमा रथ पर विराजमान हुई, श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ रथ को खींचना शुरू किया और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त किया। मान्यता है कि भगवान के रथ को खींचने से जीवन में सुख, समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में रथ के साथ चलते दिखाई दिए। कई स्थानों पर सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया गया, जबकि श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेयजल, प्रसाद और चिकित्सा सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी की गई थीं।
रथयात्रा को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। जिन मार्गों से रथयात्रा गुजरनी थी, वहां पहले से सफाई, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार पूरे आयोजन की निगरानी करते रहे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए रायपुर ट्रैफिक पुलिस ने कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया। लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और पुलिस के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।
रायपुर के अलावा प्रदेश के अन्य प्रमुख जगन्नाथ मंदिरों से भी भव्य रथयात्राएं निकाली गईं। हर जगह भक्तों ने पारंपरिक वेशभूषा में भजन-कीर्तन करते हुए महाप्रभु का स्वागत किया। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया, जिससे धार्मिक उत्सव का उल्लास और अधिक बढ़ गया।
छेरापहरा की परंपरा का इस रथयात्रा में विशेष महत्व माना जाता है। इस परंपरा के तहत राजा या राज्य का सर्वोच्च प्रतिनिधि स्वयं झाड़ू लगाकर यह संदेश देता है कि भगवान के सामने कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। रायपुर में भी इसी परंपरा का निर्वहन राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सोने की झाड़ू से किया। बताया जाता है कि महाप्रभु के रथ के मार्ग की सफाई के लिए लगभग सवा किलो वजनी दो विशेष सोने की झाड़ुओं का उपयोग किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ वर्ष में एक बार अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर अपने भक्तों का हाल जानने नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। इस अवसर पर भक्तों को भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन का दुर्लभ अवसर मिलता है। यही कारण है कि हर वर्ष इस रथयात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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भक्ति और आस्था से गूंजा रायपुर, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
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भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा के पावन अवसर पर गुरुवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। रायपुर के अवंति विहार-गायत्री नगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से निकली भव्य रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूरे वातावरण को जय जगन्नाथ के उद्घोष से भक्तिमय बना दिया। पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और पुष्प वर्षा के बीच भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले।
रथयात्रा का सबसे प्रमुख आकर्षण पारंपरिक ‘छेरापहरा’ की रस्म रही। इस दौरान छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महाप्रभु के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की सफाई कर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा और सेवाभाव का परिचय दिया। यह परंपरा भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है, जिसका संदेश है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और सेवा सबसे बड़ा धर्म है।
रथयात्रा शुरू होने से पहले मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने विधिवत पूजा कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों, आकर्षक विद्युत सज्जा और पारंपरिक अलंकरण से भव्य रूप दिया गया था। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर में लगी रहीं और लोगों ने महाप्रभु के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को अपने कंधों पर उठाकर पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ रथ तक पहुंचाया। इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। जैसे ही भगवान की प्रतिमा रथ पर विराजमान हुई, श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ रथ को खींचना शुरू किया और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त किया। मान्यता है कि भगवान के रथ को खींचने से जीवन में सुख, समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में रथ के साथ चलते दिखाई दिए। कई स्थानों पर सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया गया, जबकि श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेयजल, प्रसाद और चिकित्सा सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी की गई थीं।
रथयात्रा को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। जिन मार्गों से रथयात्रा गुजरनी थी, वहां पहले से सफाई, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार पूरे आयोजन की निगरानी करते रहे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए रायपुर ट्रैफिक पुलिस ने कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया। लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और पुलिस के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।
रायपुर के अलावा प्रदेश के अन्य प्रमुख जगन्नाथ मंदिरों से भी भव्य रथयात्राएं निकाली गईं। हर जगह भक्तों ने पारंपरिक वेशभूषा में भजन-कीर्तन करते हुए महाप्रभु का स्वागत किया। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया, जिससे धार्मिक उत्सव का उल्लास और अधिक बढ़ गया।
छेरापहरा की परंपरा का इस रथयात्रा में विशेष महत्व माना जाता है। इस परंपरा के तहत राजा या राज्य का सर्वोच्च प्रतिनिधि स्वयं झाड़ू लगाकर यह संदेश देता है कि भगवान के सामने कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। रायपुर में भी इसी परंपरा का निर्वहन राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सोने की झाड़ू से किया। बताया जाता है कि महाप्रभु के रथ के मार्ग की सफाई के लिए लगभग सवा किलो वजनी दो विशेष सोने की झाड़ुओं का उपयोग किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ वर्ष में एक बार अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर अपने भक्तों का हाल जानने नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। इस अवसर पर भक्तों को भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन का दुर्लभ अवसर मिलता है। यही कारण है कि हर वर्ष इस रथयात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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