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गणेशोत्सव से पहले रायपुर के मूर्तिकारों की बदली रणनीति, AI डिजाइन वाली प्रतिमाओं से बना रहे दूरी
रायपुर (छ.ग.)
पिछले वर्ष धार्मिक स्वरूप को लेकर हुए विवाद के बाद बढ़ी सतर्कता, इस बार पारंपरिक रूपों में तैयार हो रही हजारों गणेश प्रतिमाएं, ग्राहकों की नई मांगों के बीच मूर्तिकार धार्मिक मर्यादा को दे रहे प्राथमिकता
गणेशोत्सव की तैयारियों के साथ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मूर्तिकारों की कार्यशालाएं पूरी रफ्तार से चल रही हैं। आगामी गणेश चतुर्थी को लेकर शहरभर में भगवान गणेश की छोटी-बड़ी हजारों प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इस बार बाजार में भगवान गणेश के कई पारंपरिक और धार्मिक स्वरूप देखने को मिल रहे हैं, लेकिन एक बदलाव सबसे ज्यादा चर्चा में है। अधिकांश मूर्तिकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए डिजाइन पर आधारित प्रतिमाएं बनाने से परहेज कर रहे हैं। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था और परंपरा को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रयोगों से दूरी बनाना ही उचित है।
रायपुर में हर वर्ष गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में सार्वजनिक पंडालों और घरों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इस बार भी शहर में हजारों प्रतिमाओं की स्थापना की तैयारी है। मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में अंतिम रंग-रोगन, सजावट और आकर्षक रूप देने का काम तेजी से चल रहा है। समय पर प्रतिमाएं तैयार कर श्रद्धालुओं तक पहुंचाने के लिए कलाकार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
इस वर्ष भगवान गणेश के अनेक पारंपरिक स्वरूप तैयार किए जा रहे हैं। इनमें शिव स्वरूप, श्रीराम स्वरूप, श्रीकृष्ण रूप, बाल गणेश, बालाजी और अर्धनारीश्वर जैसे धार्मिक स्वरूप प्रमुख हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि श्रद्धालुओं की मांग भी इस बार अधिकतर पारंपरिक और शास्त्रीय स्वरूपों की ओर देखने को मिल रही है।
हालांकि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच कई ग्राहक AI से तैयार की गई आकर्षक तस्वीरें लेकर भी मूर्तिकारों के पास पहुंच रहे हैं और उसी तरह की प्रतिमा बनाने का अनुरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद अधिकांश कलाकार ऐसे डिजाइन स्वीकार करने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि धार्मिक प्रतिमाओं में किसी भी प्रकार का प्रयोग करते समय परंपराओं, धार्मिक भावनाओं और सामाजिक संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है।
मूर्तिकारों के अनुसार पिछले वर्ष एक विशेष डिजाइन वाली गणेश प्रतिमा को लेकर शहर में विवाद की स्थिति बनी थी। प्रतिमा के स्वरूप पर कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद मामला काफी चर्चा में रहा। इस घटना के बाद मूर्तिकारों ने निर्णय लिया कि धार्मिक प्रतिमाओं में ऐसे किसी भी प्रयोग से बचा जाएगा, जिससे भविष्य में विवाद की संभावना उत्पन्न हो।
कलाकारों का कहना है कि AI द्वारा तैयार की गई तस्वीरें देखने में आकर्षक और आधुनिक जरूर होती हैं, लेकिन हर डिजाइन धार्मिक दृष्टि से स्वीकार्य हो, यह आवश्यक नहीं है। इसलिए वे केवल उन प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं जो पारंपरिक मान्यताओं और पूजा-पद्धति के अनुरूप हों। उनका मानना है कि धार्मिक आयोजनों में कला के साथ आस्था का संतुलन बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
इस बार रायपुर के कई मूर्तिकारों ने पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी है। प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह प्राकृतिक मिट्टी, प्राकृतिक रंगों और पर्यावरण अनुकूल सामग्री से प्रतिमाएं तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं में भी इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसे देखते हुए कलाकार उसी दिशा में अधिक काम कर रहे हैं।
गणेशोत्सव के करीब आते ही बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगी है। सजावटी सामग्री, पूजा सामग्री और प्रतिमाओं की खरीदारी के लिए लोग बड़ी संख्या में बाजार पहुंच रहे हैं। सार्वजनिक गणेश उत्सव समितियां भी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में प्रतिमाओं की डिलीवरी का काम और तेज हो जाएगा, इसलिए सभी कार्यशालाओं में लगातार काम जारी है।
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गणेशोत्सव से पहले रायपुर के मूर्तिकारों की बदली रणनीति, AI डिजाइन वाली प्रतिमाओं से बना रहे दूरी
रायपुर (छ.ग.)
गणेशोत्सव की तैयारियों के साथ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मूर्तिकारों की कार्यशालाएं पूरी रफ्तार से चल रही हैं। आगामी गणेश चतुर्थी को लेकर शहरभर में भगवान गणेश की छोटी-बड़ी हजारों प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इस बार बाजार में भगवान गणेश के कई पारंपरिक और धार्मिक स्वरूप देखने को मिल रहे हैं, लेकिन एक बदलाव सबसे ज्यादा चर्चा में है। अधिकांश मूर्तिकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए डिजाइन पर आधारित प्रतिमाएं बनाने से परहेज कर रहे हैं। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था और परंपरा को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रयोगों से दूरी बनाना ही उचित है।
रायपुर में हर वर्ष गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में सार्वजनिक पंडालों और घरों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इस बार भी शहर में हजारों प्रतिमाओं की स्थापना की तैयारी है। मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में अंतिम रंग-रोगन, सजावट और आकर्षक रूप देने का काम तेजी से चल रहा है। समय पर प्रतिमाएं तैयार कर श्रद्धालुओं तक पहुंचाने के लिए कलाकार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
इस वर्ष भगवान गणेश के अनेक पारंपरिक स्वरूप तैयार किए जा रहे हैं। इनमें शिव स्वरूप, श्रीराम स्वरूप, श्रीकृष्ण रूप, बाल गणेश, बालाजी और अर्धनारीश्वर जैसे धार्मिक स्वरूप प्रमुख हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि श्रद्धालुओं की मांग भी इस बार अधिकतर पारंपरिक और शास्त्रीय स्वरूपों की ओर देखने को मिल रही है।
हालांकि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच कई ग्राहक AI से तैयार की गई आकर्षक तस्वीरें लेकर भी मूर्तिकारों के पास पहुंच रहे हैं और उसी तरह की प्रतिमा बनाने का अनुरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद अधिकांश कलाकार ऐसे डिजाइन स्वीकार करने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि धार्मिक प्रतिमाओं में किसी भी प्रकार का प्रयोग करते समय परंपराओं, धार्मिक भावनाओं और सामाजिक संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है।
मूर्तिकारों के अनुसार पिछले वर्ष एक विशेष डिजाइन वाली गणेश प्रतिमा को लेकर शहर में विवाद की स्थिति बनी थी। प्रतिमा के स्वरूप पर कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद मामला काफी चर्चा में रहा। इस घटना के बाद मूर्तिकारों ने निर्णय लिया कि धार्मिक प्रतिमाओं में ऐसे किसी भी प्रयोग से बचा जाएगा, जिससे भविष्य में विवाद की संभावना उत्पन्न हो।
कलाकारों का कहना है कि AI द्वारा तैयार की गई तस्वीरें देखने में आकर्षक और आधुनिक जरूर होती हैं, लेकिन हर डिजाइन धार्मिक दृष्टि से स्वीकार्य हो, यह आवश्यक नहीं है। इसलिए वे केवल उन प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं जो पारंपरिक मान्यताओं और पूजा-पद्धति के अनुरूप हों। उनका मानना है कि धार्मिक आयोजनों में कला के साथ आस्था का संतुलन बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
इस बार रायपुर के कई मूर्तिकारों ने पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी है। प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह प्राकृतिक मिट्टी, प्राकृतिक रंगों और पर्यावरण अनुकूल सामग्री से प्रतिमाएं तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं में भी इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसे देखते हुए कलाकार उसी दिशा में अधिक काम कर रहे हैं।
गणेशोत्सव के करीब आते ही बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगी है। सजावटी सामग्री, पूजा सामग्री और प्रतिमाओं की खरीदारी के लिए लोग बड़ी संख्या में बाजार पहुंच रहे हैं। सार्वजनिक गणेश उत्सव समितियां भी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में प्रतिमाओं की डिलीवरी का काम और तेज हो जाएगा, इसलिए सभी कार्यशालाओं में लगातार काम जारी है।
