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रायपुर ड्रग्स रैकेट का भंडाफोड़, ‘भूतनाथ गैंग’ से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, डेड ड्रॉप सिस्टम से हो रही थी सप्लाई
रायपुर (छ.ग.)
ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क का खुलासा, रायपुर में डेड ड्रॉप सिस्टम से चल रहा नशे का हाईटेक रैकेट, दिल्ली से जुड़ा बड़ा सिंडिकेट सामने आया।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नशीले पदार्थों की सप्लाई से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि यह पूरा सिंडिकेट दिल्ली से संचालित किया जा रहा था, जहां बैठे आरोपी कोरियर सिस्टम और डिजिटल माध्यमों के जरिए देश के कई राज्यों में ड्रग्स की सप्लाई कर रहे थे। शुरुआती जांच में ‘प्रोफेसर गैंग’ से जुड़े लिंक भी मिले हैं।
‘भूतनाथ गैंग’ और नाइजीरियन कनेक्शन
इस पूरे नेटवर्क का एक अहम चेहरा ‘भूतनाथ’ बताया जा रहा है, जिसे जांच में विदेशी नागरिक और नाइजीरियन नेटवर्क से जुड़ा माना गया है। यह शख्स कथित रूप से अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का हिस्सा है, जो एमडीएमए, कोकीन और पार्टी ड्रग्स की सप्लाई भारत के अलग-अलग हिस्सों में करता था।
मास्टरमाइंड की भूमिका और ऑपरेशन पैटर्न
जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे रैकेट को महेश खड़का और कुसुम हिन्दुजा मिलकर दिल्ली से ऑपरेट कर रहे थे। ये लोग कोडवर्ड, फर्जी पहचान और डिजिटल पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल कर सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाए रखते थे।
दुबई से भारत तक फैला ड्रग्स रूट
सूत्रों के मुताबिक ड्रग्स की शुरुआत दुबई से होती थी। वहां से खेप भारत भेजी जाती और बाद में गुजरात में प्रोसेसिंग के बाद दिल्ली पहुंचती थी। इसके बाद यह नेटवर्क रायपुर सहित कई राज्यों में सप्लाई करता था।
डेड ड्रॉप सिस्टम से होती थी डिलीवरी
इस नेटवर्क की सबसे चौंकाने वाली तकनीक ‘डेड ड्रॉप सिस्टम’ थी, जिसमें ड्रग्स को सुनसान जगहों पर रख दिया जाता था। ग्राहकों को लोकेशन और वीडियो भेजकर वहां से माल उठाने के लिए कहा जाता था। इससे सीधा संपर्क कम होता था और पुलिस की पकड़ से बचने की कोशिश की जाती थी।
कोरियर और डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल
ड्रग्स सप्लाई में कोरियर बॉक्स और ऑनलाइन पेमेंट का इस्तेमाल किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में सप्लाई चेन को ट्रैक से बचाने के लिए डिजिटल लेनदेन और लोकेशन शेयरिंग का सहारा लिया गया।
रैपिडो राइडरों के जरिए अंतिम डिलीवरी
नेटवर्क के स्थानीय संचालन में रैपिडो के राइडरों का भी इस्तेमाल किया गया। ड्रग्स रिसीव करने के बाद इसे अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाने का काम स्थानीय एजेंट्स द्वारा किया जाता था, जिनमें कुनाल मंगतानी जैसे नाम सामने आए हैं।
पुलिस कार्रवाई और लगातार खुलासे
पिछले कुछ वर्षों में रायपुर पुलिस ने इस तरह के मामलों में कई बड़ी कार्रवाई की है। दर्जनों आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और करोड़ों की ड्रग्स जब्त की गई है, लेकिन यह नेटवर्क समय-समय पर नए तरीकों से सक्रिय हो जाता है।
युवाओं को बना रहा था निशाना
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क खासकर युवाओं को टारगेट कर रहा था। सोशल मीडिया, पार्टी कल्चर और ऑनलाइन संपर्कों के जरिए नशे का जाल फैलाया जा रहा था, जिससे यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।
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रायपुर ड्रग्स रैकेट का भंडाफोड़, ‘भूतनाथ गैंग’ से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, डेड ड्रॉप सिस्टम से हो रही थी सप्लाई
रायपुर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नशीले पदार्थों की सप्लाई से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि यह पूरा सिंडिकेट दिल्ली से संचालित किया जा रहा था, जहां बैठे आरोपी कोरियर सिस्टम और डिजिटल माध्यमों के जरिए देश के कई राज्यों में ड्रग्स की सप्लाई कर रहे थे। शुरुआती जांच में ‘प्रोफेसर गैंग’ से जुड़े लिंक भी मिले हैं।
‘भूतनाथ गैंग’ और नाइजीरियन कनेक्शन
इस पूरे नेटवर्क का एक अहम चेहरा ‘भूतनाथ’ बताया जा रहा है, जिसे जांच में विदेशी नागरिक और नाइजीरियन नेटवर्क से जुड़ा माना गया है। यह शख्स कथित रूप से अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का हिस्सा है, जो एमडीएमए, कोकीन और पार्टी ड्रग्स की सप्लाई भारत के अलग-अलग हिस्सों में करता था।
मास्टरमाइंड की भूमिका और ऑपरेशन पैटर्न
जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे रैकेट को महेश खड़का और कुसुम हिन्दुजा मिलकर दिल्ली से ऑपरेट कर रहे थे। ये लोग कोडवर्ड, फर्जी पहचान और डिजिटल पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल कर सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाए रखते थे।
दुबई से भारत तक फैला ड्रग्स रूट
सूत्रों के मुताबिक ड्रग्स की शुरुआत दुबई से होती थी। वहां से खेप भारत भेजी जाती और बाद में गुजरात में प्रोसेसिंग के बाद दिल्ली पहुंचती थी। इसके बाद यह नेटवर्क रायपुर सहित कई राज्यों में सप्लाई करता था।
डेड ड्रॉप सिस्टम से होती थी डिलीवरी
इस नेटवर्क की सबसे चौंकाने वाली तकनीक ‘डेड ड्रॉप सिस्टम’ थी, जिसमें ड्रग्स को सुनसान जगहों पर रख दिया जाता था। ग्राहकों को लोकेशन और वीडियो भेजकर वहां से माल उठाने के लिए कहा जाता था। इससे सीधा संपर्क कम होता था और पुलिस की पकड़ से बचने की कोशिश की जाती थी।
कोरियर और डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल
ड्रग्स सप्लाई में कोरियर बॉक्स और ऑनलाइन पेमेंट का इस्तेमाल किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में सप्लाई चेन को ट्रैक से बचाने के लिए डिजिटल लेनदेन और लोकेशन शेयरिंग का सहारा लिया गया।
रैपिडो राइडरों के जरिए अंतिम डिलीवरी
नेटवर्क के स्थानीय संचालन में रैपिडो के राइडरों का भी इस्तेमाल किया गया। ड्रग्स रिसीव करने के बाद इसे अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाने का काम स्थानीय एजेंट्स द्वारा किया जाता था, जिनमें कुनाल मंगतानी जैसे नाम सामने आए हैं।
पुलिस कार्रवाई और लगातार खुलासे
पिछले कुछ वर्षों में रायपुर पुलिस ने इस तरह के मामलों में कई बड़ी कार्रवाई की है। दर्जनों आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और करोड़ों की ड्रग्स जब्त की गई है, लेकिन यह नेटवर्क समय-समय पर नए तरीकों से सक्रिय हो जाता है।
युवाओं को बना रहा था निशाना
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क खासकर युवाओं को टारगेट कर रहा था। सोशल मीडिया, पार्टी कल्चर और ऑनलाइन संपर्कों के जरिए नशे का जाल फैलाया जा रहा था, जिससे यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।
