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किसानों के लिए 10,500 करोड़ की स्वीकृति: सरसों में भावांतर, उड़द पर बोनस; योजनाएं 2031 तक जारी
भोपाल (म.प्र.)
कैबिनेट के फैसले से प्राकृतिक खेती, सिंचाई और खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों को बढ़ावा; डीबीटी से मिलेगा अंतर
मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों से जुड़ी पांच प्रमुख योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 10,500 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। मंगलवार को भोपाल में लिए गए कैबिनेट निर्णयों की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में दी। फैसले के तहत रबी विपणन वर्ष 2025-26 में सरसों पर भावांतर योजना लागू होगी और उड़द की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी के साथ 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा।
सरकार के अनुसार 23 मार्च से 30 मई के बीच अधिसूचित मंडियों में सरसों का मॉडल रेट 14 दिनों के औसत पर तय होगा। यदि बाजार मूल्य एमएसपी से कम रहता है, तो अंतर राशि सीधे लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से किसानों के खातों में जमा की जाएगी। अरहर सहित अन्य दालों की खरीदी भी एमएसपी पर किए जाने का निर्णय लिया गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि प्राकृतिक खेती, सिंचाई विस्तार, खाद्य सुरक्षा और ऑयलसीड मिशन से संबंधित योजनाओं की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रही थी। अवधि बढ़ाने का उद्देश्य उत्पादन लागत कम करना, तिलहन-दलहन का रकबा बढ़ाना और किसानों की आय में स्थिरता लाना है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मूल्य समर्थन और प्रत्यक्ष भुगतान की संयुक्त व्यवस्था से बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम घटेगा।
कैबिनेट ने खनिज अन्वेषण एवं विकास योजना के तहत नए संचालनालय भवन के निर्माण के लिए 34.02 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी। इससे जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) से जुड़ी मॉनिटरिंग, आईटी और कमांड सेंटर गतिविधियों को एकीकृत ढंग से संचालित किया जा सकेगा। डीएमएफ फंड योजना को भी मार्च 2031 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि खनिज प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए संसाधन उपलब्ध रहें।
पीने के पानी की आपूर्ति को लेकर सरकार ने संकेत दिया कि नल-जल योजना का संचालन चरणबद्ध तरीके से ग्राम पंचायतों को सौंपा जा सकता है। प्रदेश में लगभग 22,800 ग्राम पंचायतें हैं, जिनके माध्यम से स्थानीय स्तर पर रखरखाव और जवाबदेही मजबूत करने की योजना है।
प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग से जुड़े वेतन-भत्तों के संशोधित प्रावधानों को भी मंजूरी दी गई है। नए नियमों के अनुसार आयोग के अध्यक्ष को प्रमुख सचिव के समकक्ष वेतन-भत्ते मिलेंगे, जबकि सदस्यों के लिए दीर्घ प्रशासनिक अनुभव की शर्त रखी गई है।
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