मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला: मेधावी छात्र पुरस्कार और साइकिल योजना अगले पांच साल जारी

भोपाल (म.प्र.)

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वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कई छात्र व जनजातीय कल्याण योजनाओं को मंजूरी

भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने छात्र और जनजातीय कल्याण से जुड़ी प्रमुख योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया। विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को स्वीकृति देने के साथ ही साइकिल प्रदाय योजना, मेधावी छात्र पुरस्कार योजना और छात्रावास उत्कृष्टता पुरस्कार जैसी योजनाओं को 2030-31 तक निरंतर संचालित करने की मंजूरी दी गई।

कैबिनेट ने जनजातीय कार्य विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं के संचालन को भी निरंतरता देने का फैसला किया। क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम, निर्देशन एवं प्रशासन योजना, अनुश्रवण और मूल्यांकन इकाइयां तथा जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजनाओं के लिए 52 करोड़ 75 लाख रुपये राजस्व मद और 1 करोड़ 12 लाख रुपये पूंजीगत मद सहित कुल 53 करोड़ 97 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बस्तियों के विकास, 1032 कार्यालय भवनों के निर्माण, विद्युतीकरण कार्य, टंट्या भील मंदिर के जीर्णोद्धार और ग्रामीण विद्यालयों के उन्नयन व संधारण के लिए भी योजनाओं को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया। इसके लिए 101 करोड़ 75 लाख रुपये राजस्व तथा 482 करोड़ रुपये पूंजीगत मद सहित कुल 583 करोड़ 75 लाख रुपये का अनुमोदन किया गया।

इसी अवधि के लिए कक्षा 11वीं, 12वीं और महाविद्यालयीन विद्यार्थियों हेतु पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को भी स्वीकृति दी गई। इसके लिए 4,230 करोड़ 82 लाख रुपये की वित्तीय व्यवस्था मंजूर की गई है।

‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के संचालन के लिए 847 करोड़ 89 लाख रुपये की मंजूरी दी गई, जिसमें 498 करोड़ 90 लाख रुपये पूंजीगत और 348 करोड़ 99 लाख रुपये राजस्व मद शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त शैक्षणिक संस्थाओं, आश्रम और छात्रावासों में उत्कृष्टता पुरस्कार, साइकिल वितरण, सूचना प्रौद्योगिकी कार्य, विद्यार्थी कल्याण और जनजातीय संस्कृति संरक्षण जैसी योजनाओं के लिए 519 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई।

विशेष पिछड़े अनुसूचित जनजाति समूह अभिकरण, कोल जनजाति विकास अभिकरण और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 59 करोड़ 6 लाख रुपये की राजस्व राशि स्वीकृत की गई। वहीं कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को जारी रखने हेतु 690 करोड़ 69 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

राज्य सरकार के इस निर्णय को छात्र और जनजातीय कल्याण योजनाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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