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मैक्सिको के पिको डी ओरिजाबा पर तिरंगा फहराने निकलेंगी ज्योति रात्रे
भोपाल,(म.प्र.)
उत्तरी अमेरिका के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी पर चढ़ाई की तैयारी, महिला पर्वतारोहण में बन सकता है नया इतिहास
भारतीय पर्वतारोहण जगत के लिए एक और गौरवपूर्ण क्षण सामने आने वाला है। देश की जानी-मानी पर्वतारोही ज्योति रात्रे अब अपने अगले बड़े अंतरराष्ट्रीय अभियान की तैयारी में जुटी हैं। इस बार उनका लक्ष्य मैक्सिको का प्रसिद्ध पिको डी ओरिजाबा शिखर है, जिसे उत्तरी अमेरिका का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी माना जाता है। इसकी ऊंचाई 5,636 मीटर यानी करीब 18,491 फीट है। बर्फ से ढके इस विशाल पर्वत पर चढ़ाई को दुनिया के कठिन पर्वतारोहण अभियानों में गिना जाता है। अगर ज्योति रात्रे इस मिशन में सफल होती हैं, तो वह इस शिखर पर तिरंगा फहराने वाली भारत की पहली महिला पर्वतारोही बन सकती हैं।
पिको डी ओरिजाबा को स्पेनिश भाषा में “सिटलाल्टेपेटल” भी कहा जाता है। यह एक सक्रिय स्ट्रेटोवोल्केनो है और पर्वतारोहियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां का मौसम तेजी से बदलता है और ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, तेज बर्फीली हवाएं तथा खड़ी ढलानें अभियान को बेहद कठिन बना देती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पर्वत पर चढ़ाई केवल शारीरिक ताकत का ही नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता और धैर्य का भी बड़ा परीक्षण होती है।
55 वर्षीय ज्योति रात्रे इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय अभियानों में भारत का नाम रोशन कर चुकी हैं। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलता हासिल की थी। इसके अलावा भी वह कई कठिन पर्वतों पर चढ़ाई कर चुकी हैं। लंबे समय से पर्वतारोहण से जुड़ी ज्योति रात्रे का नाम देश की अनुभवी महिला पर्वतारोहियों में लिया जाता है। अब उनका यह नया अभियान भारतीय महिला पर्वतारोहण के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।
प्रस्थान से पहले ज्योति रात्रे ने कहा कि पर्वतारोहण केवल शिखर तक पहुंचने का नाम नहीं है, बल्कि यह खुद से संघर्ष करने और सीमाओं को तोड़ने की प्रक्रिया भी है। उन्होंने कहा, “पर्वतारोहण हमें सिखाता है कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी शिखर असंभव नहीं होता। मैं चाहती हूं कि देश की हर महिला यह समझे कि सीमाएं वही होती हैं, जिन्हें हम खुद तय करते हैं।” उनका कहना है कि यह अभियान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का संदेश भी है।
ज्योति रात्रे खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और युवतियों को प्रेरित करना चाहती हैं। उनका मानना है कि भारत में आज भी कई महिलाएं संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पातीं। ऐसे में खेल और साहसिक अभियानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है।
इस अभियान के लिए ज्योति पिछले कई महीनों से विशेष प्रशिक्षण ले रही हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभ्यास, फिटनेस ट्रेनिंग और मानसिक तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पर्वतारोहण विशेषज्ञों के अनुसार पिको डी ओरिजाबा पर चढ़ाई के दौरान तापमान कई बार शून्य से काफी नीचे चला जाता है। इसके अलावा ग्लेशियर क्षेत्र में चलना और बर्फीली चढ़ाई करना तकनीकी रूप से भी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में अभियान के हर चरण में सावधानी और अनुशासन जरूरी होता है।
भारतीय पर्वतारोहण समुदाय में भी ज्योति रात्रे के इस अभियान को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई पर्वतारोहियों और खेल प्रेमियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग उनके साहस और संकल्प की सराहना कर रहे हैं। खेल जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि इस तरह के अभियान युवा पीढ़ी को रोमांचक खेलों की ओर आकर्षित करते हैं और देश में साहसिक खेलों को नई पहचान दिलाते हैं।
पर्वतारोहण केवल खेल नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक अनुशासन का प्रतीक है। ऊंचे पर्वतों पर चढ़ाई के दौरान पर्वतारोही को सीमित संसाधनों, कठिन मौसम और शारीरिक थकान के बीच खुद को संभालना पड़ता है। ऐसे अभियानों में सफलता हासिल करना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जाता। यही वजह है कि ज्योति रात्रे का यह मिशन केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं बल्कि प्रेरणा और साहस की कहानी के रूप में भी देखा जा रहा है।
अगर यह अभियान सफल रहता है तो भारतीय महिला पर्वतारोहण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। खासतौर पर महिलाओं के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण होगा कि उम्र और परिस्थितियां सपनों के बीच बाधा नहीं बन सकतीं। देशभर के खेल प्रेमियों की नजरें अब ज्योति रात्रे के इस मिशन पर टिकी हैं और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि वह मैक्सिको की इस चुनौतीपूर्ण चोटी पर तिरंगा फहराकर भारत का नाम रोशन करेंगी।
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मैक्सिको के पिको डी ओरिजाबा पर तिरंगा फहराने निकलेंगी ज्योति रात्रे
भोपाल,(म.प्र.)
भारतीय पर्वतारोहण जगत के लिए एक और गौरवपूर्ण क्षण सामने आने वाला है। देश की जानी-मानी पर्वतारोही ज्योति रात्रे अब अपने अगले बड़े अंतरराष्ट्रीय अभियान की तैयारी में जुटी हैं। इस बार उनका लक्ष्य मैक्सिको का प्रसिद्ध पिको डी ओरिजाबा शिखर है, जिसे उत्तरी अमेरिका का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी माना जाता है। इसकी ऊंचाई 5,636 मीटर यानी करीब 18,491 फीट है। बर्फ से ढके इस विशाल पर्वत पर चढ़ाई को दुनिया के कठिन पर्वतारोहण अभियानों में गिना जाता है। अगर ज्योति रात्रे इस मिशन में सफल होती हैं, तो वह इस शिखर पर तिरंगा फहराने वाली भारत की पहली महिला पर्वतारोही बन सकती हैं।
पिको डी ओरिजाबा को स्पेनिश भाषा में “सिटलाल्टेपेटल” भी कहा जाता है। यह एक सक्रिय स्ट्रेटोवोल्केनो है और पर्वतारोहियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां का मौसम तेजी से बदलता है और ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, तेज बर्फीली हवाएं तथा खड़ी ढलानें अभियान को बेहद कठिन बना देती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पर्वत पर चढ़ाई केवल शारीरिक ताकत का ही नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता और धैर्य का भी बड़ा परीक्षण होती है।
55 वर्षीय ज्योति रात्रे इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय अभियानों में भारत का नाम रोशन कर चुकी हैं। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलता हासिल की थी। इसके अलावा भी वह कई कठिन पर्वतों पर चढ़ाई कर चुकी हैं। लंबे समय से पर्वतारोहण से जुड़ी ज्योति रात्रे का नाम देश की अनुभवी महिला पर्वतारोहियों में लिया जाता है। अब उनका यह नया अभियान भारतीय महिला पर्वतारोहण के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।
प्रस्थान से पहले ज्योति रात्रे ने कहा कि पर्वतारोहण केवल शिखर तक पहुंचने का नाम नहीं है, बल्कि यह खुद से संघर्ष करने और सीमाओं को तोड़ने की प्रक्रिया भी है। उन्होंने कहा, “पर्वतारोहण हमें सिखाता है कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी शिखर असंभव नहीं होता। मैं चाहती हूं कि देश की हर महिला यह समझे कि सीमाएं वही होती हैं, जिन्हें हम खुद तय करते हैं।” उनका कहना है कि यह अभियान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का संदेश भी है।
ज्योति रात्रे खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और युवतियों को प्रेरित करना चाहती हैं। उनका मानना है कि भारत में आज भी कई महिलाएं संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पातीं। ऐसे में खेल और साहसिक अभियानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है।
इस अभियान के लिए ज्योति पिछले कई महीनों से विशेष प्रशिक्षण ले रही हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभ्यास, फिटनेस ट्रेनिंग और मानसिक तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पर्वतारोहण विशेषज्ञों के अनुसार पिको डी ओरिजाबा पर चढ़ाई के दौरान तापमान कई बार शून्य से काफी नीचे चला जाता है। इसके अलावा ग्लेशियर क्षेत्र में चलना और बर्फीली चढ़ाई करना तकनीकी रूप से भी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में अभियान के हर चरण में सावधानी और अनुशासन जरूरी होता है।
भारतीय पर्वतारोहण समुदाय में भी ज्योति रात्रे के इस अभियान को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई पर्वतारोहियों और खेल प्रेमियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग उनके साहस और संकल्प की सराहना कर रहे हैं। खेल जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि इस तरह के अभियान युवा पीढ़ी को रोमांचक खेलों की ओर आकर्षित करते हैं और देश में साहसिक खेलों को नई पहचान दिलाते हैं।
पर्वतारोहण केवल खेल नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक अनुशासन का प्रतीक है। ऊंचे पर्वतों पर चढ़ाई के दौरान पर्वतारोही को सीमित संसाधनों, कठिन मौसम और शारीरिक थकान के बीच खुद को संभालना पड़ता है। ऐसे अभियानों में सफलता हासिल करना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जाता। यही वजह है कि ज्योति रात्रे का यह मिशन केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं बल्कि प्रेरणा और साहस की कहानी के रूप में भी देखा जा रहा है।
अगर यह अभियान सफल रहता है तो भारतीय महिला पर्वतारोहण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। खासतौर पर महिलाओं के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण होगा कि उम्र और परिस्थितियां सपनों के बीच बाधा नहीं बन सकतीं। देशभर के खेल प्रेमियों की नजरें अब ज्योति रात्रे के इस मिशन पर टिकी हैं और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि वह मैक्सिको की इस चुनौतीपूर्ण चोटी पर तिरंगा फहराकर भारत का नाम रोशन करेंगी।
