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आपत्तिजनक पोस्ट मामले में यूट्यूबर मनीष पटेल ने किया सरेंडर
रीवा,(म.प्र.)
ब्राह्मण समाज पर विवादित टिप्पणी के बाद फरार था, कोर्ट से दो दिन की रिमांड मंजूर
रीवा में ब्राह्मण समाज की युवतियों को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में फरार चल रहे यूट्यूबर मनीष पटेल ने आखिरकार पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद बुधवार को वह रीवा के सिविल लाइन थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। बाद में उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दो दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की गई है। अब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े डिजिटल सबूत जुटाने में लगी हुई है।
मनीष पटेल रीवा जिले के खुटहा गांव का रहने वाला है और सोशल मीडिया पर उसकी बड़ी पहचान है। यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक समेत अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर उसके करीब 40 लाख फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, उसने 29 जनवरी को एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इस वीडियो में ब्राह्मण समाज की युवतियों को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। वीडियो सामने आने के बाद रीवा सहित आसपास के इलाकों में ब्राह्मण समाज के लोगों में नाराजगी फैल गई थी।
मामले को लेकर समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद सिविल लाइन थाने में मनीष पटेल के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया। एफआईआर के बाद से ही पुलिस उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन वह लगातार ठिकाने बदल रहा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए वह अलग-अलग शहरों में छिपकर रह रहा था और अपने करीबी लोगों के संपर्क में भी सीमित तरीके से था।
दिलचस्प बात यह रही कि फरारी के दौरान भी मनीष सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय बना रहा। उसने कई बार शादी समारोहों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और यात्राओं से जुड़े फोटो और वीडियो पोस्ट किए। इससे पुलिस को उसकी लोकेशन ट्रेस करने में मदद मिली। बताया जा रहा है कि पुलिस टावर लोकेशन और सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर लगातार उसकी निगरानी कर रही थी। जैसे-जैसे पुलिस का दबाव बढ़ता गया, वैसे-वैसे उसके विकल्प कम होते चले गए।
थाना प्रभारी विजय सिंह ने बताया कि पुलिस की लगातार घेराबंदी और निगरानी के चलते मनीष के पास आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके मोबाइल फोन को जब्त कर लिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवादित वीडियो किन परिस्थितियों में बनाया गया और उसे वायरल करने में कौन-कौन लोग शामिल थे।
पुलिस जांच का एक बड़ा हिस्सा अब डिजिटल सबूतों पर केंद्रित है। अधिकारियों के मुताबिक, मनीष के अन्य डिजिटल उपकरण, लैपटॉप और हार्ड ड्राइव की तलाश की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि वीडियो एडिटिंग, अपलोडिंग या सोशल मीडिया प्रमोशन में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। अगर जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर कंटेंट की जिम्मेदारी को लेकर एक बार फिर बहस शुरू कर दी है। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। लाखों फॉलोअर्स होने के कारण उनके वीडियो और बयान का असर भी बड़े स्तर पर होता है। ऐसे में किसी भी समुदाय या वर्ग के खिलाफ की गई टिप्पणी तुरंत विवाद का रूप ले सकती है। रीवा का यह मामला भी इसी तरह तेजी से वायरल हुआ और देखते ही देखते राज्यभर में चर्चा का विषय बन गया।
कानूनी जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। अगर किसी पोस्ट या वीडियो से सामाजिक तनाव बढ़ता है या किसी समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यही वजह है कि पुलिस अब इस मामले को केवल एक वायरल वीडियो के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द से जुड़े मुद्दे के तौर पर देख रही है।
उधर, ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने आरोपी की गिरफ्तारी को कानून की जीत बताया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए किसी भी समाज की महिलाओं या युवतियों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। समाज के लोगों ने पुलिस से मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में कोई इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न करे। पुलिस रिमांड के दौरान मनीष पटेल से लगातार पूछताछ कर रही है। जांच अधिकारी यह जानने की कोशिश में जुटे हैं कि विवादित कंटेंट बनाने के पीछे उसकी मंशा क्या थी और क्या यह सब केवल वायरल होने के उद्देश्य से किया गया था।
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आपत्तिजनक पोस्ट मामले में यूट्यूबर मनीष पटेल ने किया सरेंडर
रीवा,(म.प्र.)
रीवा में ब्राह्मण समाज की युवतियों को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में फरार चल रहे यूट्यूबर मनीष पटेल ने आखिरकार पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद बुधवार को वह रीवा के सिविल लाइन थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। बाद में उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दो दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की गई है। अब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े डिजिटल सबूत जुटाने में लगी हुई है।
मनीष पटेल रीवा जिले के खुटहा गांव का रहने वाला है और सोशल मीडिया पर उसकी बड़ी पहचान है। यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक समेत अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर उसके करीब 40 लाख फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, उसने 29 जनवरी को एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इस वीडियो में ब्राह्मण समाज की युवतियों को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। वीडियो सामने आने के बाद रीवा सहित आसपास के इलाकों में ब्राह्मण समाज के लोगों में नाराजगी फैल गई थी।
मामले को लेकर समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद सिविल लाइन थाने में मनीष पटेल के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया। एफआईआर के बाद से ही पुलिस उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन वह लगातार ठिकाने बदल रहा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए वह अलग-अलग शहरों में छिपकर रह रहा था और अपने करीबी लोगों के संपर्क में भी सीमित तरीके से था।
दिलचस्प बात यह रही कि फरारी के दौरान भी मनीष सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय बना रहा। उसने कई बार शादी समारोहों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और यात्राओं से जुड़े फोटो और वीडियो पोस्ट किए। इससे पुलिस को उसकी लोकेशन ट्रेस करने में मदद मिली। बताया जा रहा है कि पुलिस टावर लोकेशन और सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर लगातार उसकी निगरानी कर रही थी। जैसे-जैसे पुलिस का दबाव बढ़ता गया, वैसे-वैसे उसके विकल्प कम होते चले गए।
थाना प्रभारी विजय सिंह ने बताया कि पुलिस की लगातार घेराबंदी और निगरानी के चलते मनीष के पास आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके मोबाइल फोन को जब्त कर लिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवादित वीडियो किन परिस्थितियों में बनाया गया और उसे वायरल करने में कौन-कौन लोग शामिल थे।
पुलिस जांच का एक बड़ा हिस्सा अब डिजिटल सबूतों पर केंद्रित है। अधिकारियों के मुताबिक, मनीष के अन्य डिजिटल उपकरण, लैपटॉप और हार्ड ड्राइव की तलाश की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि वीडियो एडिटिंग, अपलोडिंग या सोशल मीडिया प्रमोशन में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। अगर जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर कंटेंट की जिम्मेदारी को लेकर एक बार फिर बहस शुरू कर दी है। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। लाखों फॉलोअर्स होने के कारण उनके वीडियो और बयान का असर भी बड़े स्तर पर होता है। ऐसे में किसी भी समुदाय या वर्ग के खिलाफ की गई टिप्पणी तुरंत विवाद का रूप ले सकती है। रीवा का यह मामला भी इसी तरह तेजी से वायरल हुआ और देखते ही देखते राज्यभर में चर्चा का विषय बन गया।
कानूनी जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। अगर किसी पोस्ट या वीडियो से सामाजिक तनाव बढ़ता है या किसी समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यही वजह है कि पुलिस अब इस मामले को केवल एक वायरल वीडियो के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द से जुड़े मुद्दे के तौर पर देख रही है।
उधर, ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने आरोपी की गिरफ्तारी को कानून की जीत बताया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए किसी भी समाज की महिलाओं या युवतियों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। समाज के लोगों ने पुलिस से मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में कोई इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न करे। पुलिस रिमांड के दौरान मनीष पटेल से लगातार पूछताछ कर रही है। जांच अधिकारी यह जानने की कोशिश में जुटे हैं कि विवादित कंटेंट बनाने के पीछे उसकी मंशा क्या थी और क्या यह सब केवल वायरल होने के उद्देश्य से किया गया था।
