सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, चांदी ₹2.62 लाख पर पहुंची

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दो दिन में ₹9,000 तक सस्ती हुई चांदी, सोना भी ₹1,800 गिरकर ₹1.57 लाख प्रति 10 ग्राम पर आया

भारत के सर्राफा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेज गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 27 मई को दोनों कीमती धातुओं के दामों में बड़ी कमी देखने को मिली है। चांदी की कीमत में जहां दो दिन में करीब 9,000 रुपये की गिरावट आई है, वहीं सोना भी लगातार सस्ता हो रहा है।

IBJA के अनुसार, 1 किलो चांदी की कीमत आज 4,503 रुपये घटकर 2.62 लाख रुपये पर आ गई है। यह गिरावट पिछले कुछ दिनों से जारी है और निवेशकों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। वहीं, 24 कैरेट शुद्ध सोने का दाम भी 10 ग्राम पर 571 रुपये गिरकर 1.57 लाख रुपये पर पहुंच गया है।

पिछले दो दिनों में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है, जिससे कुल मिलाकर यह करीब 9,000 रुपये सस्ती हो चुकी है। सोने की कीमतों में भी लगभग 1,800 रुपये की कमी दर्ज की गई है। लगातार हो रही इस गिरावट ने सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है और निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल है।

सोने की कीमतों के पिछले रुझानों पर नजर डालें तो इस साल की शुरुआत में इसमें तेज उछाल देखा गया था। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना करीब 1.33 लाख रुपये के स्तर पर था। इसके बाद 29 जनवरी 2026 को यह रिकॉर्ड 1.76 लाख रुपये के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गया था। हालांकि उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट और उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है।

वर्तमान में सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 19,000 रुपये नीचे आ चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की गिरावट मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण आई है। कई निवेशकों ने ऊंचे दामों पर खरीद के बाद अब मुनाफा निकालना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई है।

चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भी अधिक तेज रहा है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी का भाव करीब 2.30 लाख रुपये प्रति किलो था, जो 29 जनवरी 2026 को रिकॉर्ड 3.86 लाख रुपये के ऑलटाइम हाई तक पहुंच गया। लेकिन उसके बाद इसमें तेज गिरावट देखने को मिली है।

पिछले कुछ महीनों में चांदी लगभग 1.24 लाख रुपये सस्ती हो चुकी है। यह गिरावट 118 दिनों के भीतर दर्ज की गई है, जो बताती है कि चांदी में सोने की तुलना में ज्यादा अस्थिरता रही है। इस बार की गिरावट सामान्य बाजार ट्रेंड से थोड़ी अलग है। आमतौर पर वैश्विक तनाव या युद्ध जैसी स्थितियों में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी जाती है, क्योंकि इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार मिडिल ईस्ट तनाव के बावजूद निवेशक सोने-चांदी से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इसका एक बड़ा कारण ‘कैश होल्डिंग’ की प्रवृत्ति है। वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक अपनी संपत्ति को लिक्विड यानी नकद रूप में रखना पसंद कर रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत उपयोग किया जा सके। इसी वजह से गोल्ड और सिल्वर में बिकवाली बढ़ी है।

दूसरा बड़ा कारण प्रॉफिट बुकिंग भी है। जनवरी में जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, तब कई बड़े निवेशकों ने खरीदारी की थी। अब जब कीमतें ऊंचे स्तर से नीचे आई हैं, तो उन्होंने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया है। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतों पर दबाव पड़ा।

भारतीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें केवल घरेलू मांग और आपूर्ति पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक हालात पर भी निर्भर करती हैं। इस समय डॉलर इंडेक्स में मजबूती और वैश्विक बाजार में अस्थिरता ने भी कीमतों को प्रभावित किया है।

त्योहारी और शादी के सीजन को देखते हुए आम उपभोक्ताओं के लिए यह गिरावट राहत भरी मानी जा सकती है, लेकिन निवेशकों के लिए यह स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में हल्की रिकवरी भी हो सकती है, लेकिन यह वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगा।

इसी बीच ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों को भी सलाह दी जा रही है कि वे खरीदारी से पहले हॉलमार्क सर्टिफाइड सोना ही चुनें। BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) का हॉलमार्क सोने की शुद्धता की गारंटी देता है। साथ ही, ग्राहकों को यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि वे खरीदारी से पहले अलग-अलग स्रोतों से दामों की पुष्टि करें, ताकि सही कीमत पर निवेश किया जा सके।

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27 May 2026 By Vaishnavi.J

सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, चांदी ₹2.62 लाख पर पहुंची

Digital Desk

भारत के सर्राफा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेज गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 27 मई को दोनों कीमती धातुओं के दामों में बड़ी कमी देखने को मिली है। चांदी की कीमत में जहां दो दिन में करीब 9,000 रुपये की गिरावट आई है, वहीं सोना भी लगातार सस्ता हो रहा है।

IBJA के अनुसार, 1 किलो चांदी की कीमत आज 4,503 रुपये घटकर 2.62 लाख रुपये पर आ गई है। यह गिरावट पिछले कुछ दिनों से जारी है और निवेशकों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। वहीं, 24 कैरेट शुद्ध सोने का दाम भी 10 ग्राम पर 571 रुपये गिरकर 1.57 लाख रुपये पर पहुंच गया है।

पिछले दो दिनों में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है, जिससे कुल मिलाकर यह करीब 9,000 रुपये सस्ती हो चुकी है। सोने की कीमतों में भी लगभग 1,800 रुपये की कमी दर्ज की गई है। लगातार हो रही इस गिरावट ने सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है और निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल है।

सोने की कीमतों के पिछले रुझानों पर नजर डालें तो इस साल की शुरुआत में इसमें तेज उछाल देखा गया था। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना करीब 1.33 लाख रुपये के स्तर पर था। इसके बाद 29 जनवरी 2026 को यह रिकॉर्ड 1.76 लाख रुपये के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गया था। हालांकि उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट और उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है।

वर्तमान में सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 19,000 रुपये नीचे आ चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की गिरावट मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण आई है। कई निवेशकों ने ऊंचे दामों पर खरीद के बाद अब मुनाफा निकालना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई है।

चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भी अधिक तेज रहा है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी का भाव करीब 2.30 लाख रुपये प्रति किलो था, जो 29 जनवरी 2026 को रिकॉर्ड 3.86 लाख रुपये के ऑलटाइम हाई तक पहुंच गया। लेकिन उसके बाद इसमें तेज गिरावट देखने को मिली है।

पिछले कुछ महीनों में चांदी लगभग 1.24 लाख रुपये सस्ती हो चुकी है। यह गिरावट 118 दिनों के भीतर दर्ज की गई है, जो बताती है कि चांदी में सोने की तुलना में ज्यादा अस्थिरता रही है। इस बार की गिरावट सामान्य बाजार ट्रेंड से थोड़ी अलग है। आमतौर पर वैश्विक तनाव या युद्ध जैसी स्थितियों में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी जाती है, क्योंकि इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार मिडिल ईस्ट तनाव के बावजूद निवेशक सोने-चांदी से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इसका एक बड़ा कारण ‘कैश होल्डिंग’ की प्रवृत्ति है। वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक अपनी संपत्ति को लिक्विड यानी नकद रूप में रखना पसंद कर रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत उपयोग किया जा सके। इसी वजह से गोल्ड और सिल्वर में बिकवाली बढ़ी है।

दूसरा बड़ा कारण प्रॉफिट बुकिंग भी है। जनवरी में जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, तब कई बड़े निवेशकों ने खरीदारी की थी। अब जब कीमतें ऊंचे स्तर से नीचे आई हैं, तो उन्होंने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया है। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतों पर दबाव पड़ा।

भारतीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें केवल घरेलू मांग और आपूर्ति पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक हालात पर भी निर्भर करती हैं। इस समय डॉलर इंडेक्स में मजबूती और वैश्विक बाजार में अस्थिरता ने भी कीमतों को प्रभावित किया है।

त्योहारी और शादी के सीजन को देखते हुए आम उपभोक्ताओं के लिए यह गिरावट राहत भरी मानी जा सकती है, लेकिन निवेशकों के लिए यह स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में हल्की रिकवरी भी हो सकती है, लेकिन यह वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगा।

इसी बीच ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों को भी सलाह दी जा रही है कि वे खरीदारी से पहले हॉलमार्क सर्टिफाइड सोना ही चुनें। BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) का हॉलमार्क सोने की शुद्धता की गारंटी देता है। साथ ही, ग्राहकों को यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि वे खरीदारी से पहले अलग-अलग स्रोतों से दामों की पुष्टि करें, ताकि सही कीमत पर निवेश किया जा सके।

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-fall-in-gold-and-silver-silver-reached-%E2%82%B9-262/article-54325

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