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भोजशाला पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, धार की ऐतिहासिक इमारत को वाग्देवी मंदिर माना
इंदौर/धार (म.प्र.)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना। ASI आदेश रद्द, नमाज की अनुमति खत्म, सुरक्षा बढ़ाई गई।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को धार की भोजशाला के बारे में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें इसे वाग्देवी अर्थात मां सरस्वती का मंदिर मान लिया गया है। कोर्ट के आदेश में कहा गया कि पुरातात्विक साक्ष्यों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और एएसआई की सर्वे रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि यह स्थल एक प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र रहा है। हाईकोर्ट ने अयोध्या मामले का भी जिक्र किया और कहा कि ऐतिहासिक और संरक्षित धार्मिक स्थलों की पहचान में पुरातात्विक तथ्यों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। इस फैसले के बाद धार शहर में सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत सक्रिय कर दिया गया। भोजशाला के मुख्य गेट पर बैरिकेड्स लगा दिए गए और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। शुक्रवार होने के कारण प्रशासन पहले से ही अलर्ट था, क्योंकि इसी दिन यहां जुमे की नमाज अदा की जाती रही है।
कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानी ASI के 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हिंदुओं को पूजा के सीमित अधिकार और मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज करने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि 1958 के प्राचीन स्मारक कानून के तहत भोजशाला का प्रबंधन ASI के पास रहेगा, लेकिन केंद्र सरकार और ASI को यह तय करना होगा कि मंदिर का संचालन और व्यवस्था कैसे होगी। मुस्लिम पक्ष, जो इसे पहले कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है, को अदालत ने सलाह दी कि वो अलग मस्जिद के लिए सरकार से जमीन मांगें। फैसले के बाद शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि वे हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन फैसले की समीक्षा के बाद सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। बताया जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद और शोभा मेनन ने सुनवाई के दौरान ASI सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे, उनका कहना था कि भोजशाला में किसी स्थापित मूर्ति के प्रमाण नहीं हैं और धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को होना चाहिए।
दूसरी ओर, हिंदू पक्ष ने कोर्ट में दावा किया कि भोजशाला सदियों पुराना सरस्वती मंदिर है और यहां नियमित पूजा-अर्चना की परंपरा रही है। उन्होंने ASI सर्वे, शिलालेख, स्थापत्य अवशेष और राजा भोज के समय के दस्तावेजों का हवाला दिया। जैन समाज ने भी सुनवाई में दावा किया कि यहां मिली प्रतिमा मां अंबिका की है और भोजशाला को जैन तीर्थ घोषित किया जाना चाहिए। करीब 98 दिन चले वैज्ञानिक सर्वे और लंबी सुनवाई के बाद आए इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार और इंदौर प्रशासन ने संवेदनशीलता को देखते हुए जिलेभर से करीब 1200 पुलिसकर्मियों को बुलाया है। रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स भी तैनात की गई है। शहर में फ्लैग मार्च निकाला गया और दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की गई। भोज उत्सव समिति ने भोजशाला के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ भी कराया।
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भोजशाला पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, धार की ऐतिहासिक इमारत को वाग्देवी मंदिर माना
इंदौर/धार (म.प्र.)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को धार की भोजशाला के बारे में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें इसे वाग्देवी अर्थात मां सरस्वती का मंदिर मान लिया गया है। कोर्ट के आदेश में कहा गया कि पुरातात्विक साक्ष्यों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और एएसआई की सर्वे रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि यह स्थल एक प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र रहा है। हाईकोर्ट ने अयोध्या मामले का भी जिक्र किया और कहा कि ऐतिहासिक और संरक्षित धार्मिक स्थलों की पहचान में पुरातात्विक तथ्यों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। इस फैसले के बाद धार शहर में सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत सक्रिय कर दिया गया। भोजशाला के मुख्य गेट पर बैरिकेड्स लगा दिए गए और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। शुक्रवार होने के कारण प्रशासन पहले से ही अलर्ट था, क्योंकि इसी दिन यहां जुमे की नमाज अदा की जाती रही है।
कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानी ASI के 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हिंदुओं को पूजा के सीमित अधिकार और मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज करने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि 1958 के प्राचीन स्मारक कानून के तहत भोजशाला का प्रबंधन ASI के पास रहेगा, लेकिन केंद्र सरकार और ASI को यह तय करना होगा कि मंदिर का संचालन और व्यवस्था कैसे होगी। मुस्लिम पक्ष, जो इसे पहले कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है, को अदालत ने सलाह दी कि वो अलग मस्जिद के लिए सरकार से जमीन मांगें। फैसले के बाद शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि वे हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन फैसले की समीक्षा के बाद सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। बताया जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद और शोभा मेनन ने सुनवाई के दौरान ASI सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे, उनका कहना था कि भोजशाला में किसी स्थापित मूर्ति के प्रमाण नहीं हैं और धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को होना चाहिए।
दूसरी ओर, हिंदू पक्ष ने कोर्ट में दावा किया कि भोजशाला सदियों पुराना सरस्वती मंदिर है और यहां नियमित पूजा-अर्चना की परंपरा रही है। उन्होंने ASI सर्वे, शिलालेख, स्थापत्य अवशेष और राजा भोज के समय के दस्तावेजों का हवाला दिया। जैन समाज ने भी सुनवाई में दावा किया कि यहां मिली प्रतिमा मां अंबिका की है और भोजशाला को जैन तीर्थ घोषित किया जाना चाहिए। करीब 98 दिन चले वैज्ञानिक सर्वे और लंबी सुनवाई के बाद आए इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार और इंदौर प्रशासन ने संवेदनशीलता को देखते हुए जिलेभर से करीब 1200 पुलिसकर्मियों को बुलाया है। रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स भी तैनात की गई है। शहर में फ्लैग मार्च निकाला गया और दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की गई। भोज उत्सव समिति ने भोजशाला के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ भी कराया।
