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ग्वालियर-चंबल में शीतलहर का कहर: MP के 7 जिलों में अलर्ट, 20 से ज्यादा जिलों में घना कोहरा
Bhopal, MP
मध्यप्रदेश में ठंड ने एक बार फिर तीखा रुख अपना लिया है। ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग इस समय भीषण शीतलहर की चपेट में हैं। मौसम विभाग ने रविवार को ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना और सतना में कोल्ड वेव अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में तेज सर्द हवाएं चलने से दिन का तापमान भी सामान्य से नीचे बना रहेगा।
सुबह के समय प्रदेश के 20 से अधिक जिले कोहरे की मोटी चादर में लिपटे नजर आए। कहीं हल्का तो कहीं घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी कम हो गई और जनजीवन प्रभावित हुआ।
3 दिन बाद और बढ़ेगी ठंड की तीव्रता
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, फिलहाल तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव बना रहेगा, लेकिन तीन दिन बाद प्रदेश में एक बार फिर कड़ाके की ठंड लौटेगी। पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ने के बाद उत्तरी हवाएं और ज्यादा असर दिखाएंगी, जिससे रात का पारा और गिरेगा।
खजुराहो सबसे ठंडा, 3.6 डिग्री दर्ज
पिछली रात प्रदेश के 25 से ज्यादा शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड किया गया। छतरपुर का खजुराहो लगातार दूसरी रात प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां तापमान मात्र 3.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
शिवपुरी, राजगढ़, दतिया, नौगांव, रीवा, मंडला, पचमढ़ी और उमरिया जैसे इलाकों में भी पारा 7 डिग्री से नीचे बना रहा।
पांच बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 5.9 डिग्री, भोपाल में 7.2, इंदौर में 6.9, उज्जैन में 9 और जबलपुर में 9.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
जेट स्ट्रीम हवाओं से बढ़ी सर्दी
सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के मुताबिक, उत्तर भारत के ऊपर तेज गति से बह रही जेट स्ट्रीम हवाओं का असर मध्यप्रदेश पर भी पड़ रहा है। इसी वजह से उत्तरी हिस्सों में कंपकंपाने वाली ठंड महसूस की जा रही है। अगले दो दिन कोहरा और शीतलहर दोनों बने रहेंगे।
कोहरे से ट्रेनें लेट, यात्री परेशान
घने कोहरे का असर रेल यातायात पर भी दिख रहा है। दिल्ली से मध्यप्रदेश आने वाली कई ट्रेनें रोजाना घंटों की देरी से पहुंच रही हैं। मालवा एक्सप्रेस, पंजाब मेल और जनशताब्दी जैसी ट्रेनों की टाइमिंग लगातार बिगड़ी हुई है। भोपाल समेत कई स्टेशनों पर यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
इस बार सर्दी तोड़ रही रिकॉर्ड
इस सीजन की ठंड कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। नवंबर में 84 साल का रिकॉर्ड टूटा तो दिसंबर ने 25 साल का इतिहास बदल दिया। जनवरी की शुरुआत भी बेहद सर्द रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार ठंड की तीव्रता, कोहरा और शीतलहर तीनों का असर एक साथ देखने को मिल रहा है।
