केरल की तुलना में मध्यप्रदेश में इलाज 4 गुना सस्ता, सरकारी योजनाओं ने आम आदमी का घटाया आधा बोझ

मध्य प्रदेश

By Rohit.P
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मध्यप्रदेश में इलाज के खर्च में केरल और अन्य राज्यों की तुलना में बड़ी राहत है। अब मध्यप्रदेश में कुल स्वास्थ्य खर्च का केवल 43% जनता को खुद वहन करना पड़ता है।

मध्यप्रदेश में इलाज का खर्च भारत के अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कम है, खासकर केरल के मुकाबले। आम धारणा के विपरीत कि बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली का मतलब महंगा इलाज है, आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश के लोग औसतन अपनी जेब से केवल ₹1,739 सालाना खर्च कर रहे हैं, जबकि केरल में यह आंकड़ा ₹7,889 है। इस कमी के बावजूद, मध्यप्रदेश की जनता को स्वास्थ्य सेवाओं के कुल खर्च का लगभग 43% अपनी जमा-पूंजी या उधारी से निकालना पड़ता है।

10 साल में स्वास्थ्य खर्च में उल्लेखनीय कमी

लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च का स्वरूप काफी बदल गया है। 2014-15 में हर व्यक्ति को अपने इलाज के लिए कुल स्वास्थ्य खर्च का 72% खुद वहन करना पड़ता था। सरकारी योजनाओं और मुफ्त इलाज के दायरे के विस्तार ने इस भार को 43% तक घटा दिया है।

केरल और मध्यप्रदेश की तुलना

केरल को अक्सर देश का सबसे मजबूत स्वास्थ्य मॉडल माना जाता है, लेकिन वहां के लोग अभी भी अपने इलाज के लिए ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं। केरल में आम व्यक्ति को सालाना ₹7,889 खर्च करना पड़ता है, जबकि मध्यप्रदेश में यह खर्च केवल ₹1,739 है। यह आंकड़ा यह स्पष्ट करता है कि कम संसाधनों के बावजूद मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य योजनाएं आम आदमी के लिए अधिक सुलभ साबित हो रही हैं।

आम आदमी की जेब पर असर

मध्यप्रदेश में कुल स्वास्थ्य खर्च का 43.3% जनता अपनी जेब से देती है। उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 63.7% है, जबकि केरल में यह 59.1% है। इस तुलना से यह स्पष्ट होता है कि मध्यप्रदेश के लोग देश के कई राज्यों की तुलना में कम आर्थिक बोझ उठाते हैं।

सरकारी पहल और भविष्य की संभावनाएं

मध्यप्रदेश में सरकारी योजनाओं के प्रभाव ने आम जनता पर खर्च का बोझ कम किया है। स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर और मुफ्त इलाज के दायरे में विस्तार ने इसे संभव बनाया है। यदि इसी तरह योजनाओं को आगे बढ़ाया गया, तो आने वाले वर्षों में जनता पर खर्च और भी घट सकता है।

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29 Mar 2026 By Rohit.P

केरल की तुलना में मध्यप्रदेश में इलाज 4 गुना सस्ता, सरकारी योजनाओं ने आम आदमी का घटाया आधा बोझ

मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश में इलाज का खर्च भारत के अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कम है, खासकर केरल के मुकाबले। आम धारणा के विपरीत कि बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली का मतलब महंगा इलाज है, आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश के लोग औसतन अपनी जेब से केवल ₹1,739 सालाना खर्च कर रहे हैं, जबकि केरल में यह आंकड़ा ₹7,889 है। इस कमी के बावजूद, मध्यप्रदेश की जनता को स्वास्थ्य सेवाओं के कुल खर्च का लगभग 43% अपनी जमा-पूंजी या उधारी से निकालना पड़ता है।

10 साल में स्वास्थ्य खर्च में उल्लेखनीय कमी

लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च का स्वरूप काफी बदल गया है। 2014-15 में हर व्यक्ति को अपने इलाज के लिए कुल स्वास्थ्य खर्च का 72% खुद वहन करना पड़ता था। सरकारी योजनाओं और मुफ्त इलाज के दायरे के विस्तार ने इस भार को 43% तक घटा दिया है।

केरल और मध्यप्रदेश की तुलना

केरल को अक्सर देश का सबसे मजबूत स्वास्थ्य मॉडल माना जाता है, लेकिन वहां के लोग अभी भी अपने इलाज के लिए ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं। केरल में आम व्यक्ति को सालाना ₹7,889 खर्च करना पड़ता है, जबकि मध्यप्रदेश में यह खर्च केवल ₹1,739 है। यह आंकड़ा यह स्पष्ट करता है कि कम संसाधनों के बावजूद मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य योजनाएं आम आदमी के लिए अधिक सुलभ साबित हो रही हैं।

आम आदमी की जेब पर असर

मध्यप्रदेश में कुल स्वास्थ्य खर्च का 43.3% जनता अपनी जेब से देती है। उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 63.7% है, जबकि केरल में यह 59.1% है। इस तुलना से यह स्पष्ट होता है कि मध्यप्रदेश के लोग देश के कई राज्यों की तुलना में कम आर्थिक बोझ उठाते हैं।

सरकारी पहल और भविष्य की संभावनाएं

मध्यप्रदेश में सरकारी योजनाओं के प्रभाव ने आम जनता पर खर्च का बोझ कम किया है। स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर और मुफ्त इलाज के दायरे में विस्तार ने इसे संभव बनाया है। यदि इसी तरह योजनाओं को आगे बढ़ाया गया, तो आने वाले वर्षों में जनता पर खर्च और भी घट सकता है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/compared-to-kerala-treatment-in-madhya-pradesh-is-4-times/article-49427

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