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इंदौर में बैंक मैनेजर के यौन उत्पीड़न के आरोप, जांच की मांग
इंदौर (म.प्र.)
इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व एक्सिस बैंक मैनेजर ने वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, कलेक्टर से जांच की मांग की गई है।
इंदौर में एक निजी बैंक की पूर्व मैनेजर द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने कार्यस्थल की सुरक्षा और व्यवहार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता ने वरिष्ठ अधिकारियों पर मानसिक, शारीरिक उत्पीड़न और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है।
इंदौर में बैंक मैनेजर आरोप मामला
इंदौर में बैंकिंग सेक्टर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक निजी बैंक की पूर्व ऑपरेशन हेड (बदला हुआ नाम निहारिका) ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न मामले में पीड़िता ने मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। पीड़िता का आरोप है कि कार्यस्थल पर उन्हें लगातार अश्लील टिप्पणियों, अनुचित व्यवहार और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही नौकरी छोड़ने के बाद भी उन्हें आर्थिक रूप से परेशान किए जाने का दावा किया गया है।
कार्यस्थल पर गंभीर आरोप
पीड़िता के अनुसार, फरवरी 2023 से मई 2025 के बीच उनके कार्यकाल में कई बार वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें केबिन में बुलाकर अश्लील इशारे किए और डबल मीनिंग बातें कही गईं।आरोप यह भी है कि मासिक धर्म के दौरान भी उन्हें लंबे समय तक खड़े रहकर मीटिंग में शामिल होना पड़ा और बैठने की अनुमति नहीं दी गई। साथ ही बैंक की अनिवार्य छुट्टियों का भी पालन नहीं होने दिया गया। इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न मामले में यह भी दावा किया गया है कि उनके अच्छे प्रदर्शन के बावजूद कार्यस्थल पर दबाव का माहौल लगातार बना रहा।
इस्तीफे के बाद विवाद
पीड़िता ने बताया कि लगातार दबाव और मानसिक उत्पीड़न के कारण उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, नोटिस पीरियड पूरा करने के बावजूद उन्हें कथित रूप से बकाया बोनस और अन्य भुगतान नहीं दिए गए।आरोप है कि बोनस मांगने पर क्षेत्रीय और जोनल अधिकारियों ने भुगतान रोक दिया और उन्हें विभिन्न स्तरों पर शिकायत करने के बावजूद राहत नहीं मिली।इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न मामला नौकरी छोड़ने के बाद भी जारी दबाव और धमकियों के आरोपों के कारण और गंभीर हो गया है।
धमकी और शिकायतें
पीड़िता का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें कथित रूप से धमकी दी गई कि उनका करियर बर्बाद कर दिया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगवाकर मानसिक रूप से परेशान करने का भी आरोप है। उन्होंने ‘शी-बॉक्स पोर्टल’ और सरकारी लेबर विभाग में भी शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने का दावा किया गया है।
बैंक का पक्ष और जांच की मांग
मामले में बैंक के डिप्टी एचआर अधिकारी ने कहा है कि उनके पास यौन उत्पीड़न से जुड़ी कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, बोनस भुगतान को लेकर एक अलग शिकायत मिलने की बात स्वीकार की गई है, जिसे बैंक नीति के अनुसार निपटाया गया। पीड़िता ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है।
यह मामला अब प्रशासनिक जांच की दिशा में बढ़ रहा है। इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न से जुड़ी इस शिकायत ने कार्यस्थल सुरक्षा और कॉरपोरेट जवाबदेही पर नई बहस को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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इंदौर में बैंक मैनेजर के यौन उत्पीड़न के आरोप, जांच की मांग
इंदौर (म.प्र.)
इंदौर में एक निजी बैंक की पूर्व मैनेजर द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने कार्यस्थल की सुरक्षा और व्यवहार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता ने वरिष्ठ अधिकारियों पर मानसिक, शारीरिक उत्पीड़न और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है।
इंदौर में बैंक मैनेजर आरोप मामला
इंदौर में बैंकिंग सेक्टर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक निजी बैंक की पूर्व ऑपरेशन हेड (बदला हुआ नाम निहारिका) ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न मामले में पीड़िता ने मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। पीड़िता का आरोप है कि कार्यस्थल पर उन्हें लगातार अश्लील टिप्पणियों, अनुचित व्यवहार और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही नौकरी छोड़ने के बाद भी उन्हें आर्थिक रूप से परेशान किए जाने का दावा किया गया है।
कार्यस्थल पर गंभीर आरोप
पीड़िता के अनुसार, फरवरी 2023 से मई 2025 के बीच उनके कार्यकाल में कई बार वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें केबिन में बुलाकर अश्लील इशारे किए और डबल मीनिंग बातें कही गईं।आरोप यह भी है कि मासिक धर्म के दौरान भी उन्हें लंबे समय तक खड़े रहकर मीटिंग में शामिल होना पड़ा और बैठने की अनुमति नहीं दी गई। साथ ही बैंक की अनिवार्य छुट्टियों का भी पालन नहीं होने दिया गया। इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न मामले में यह भी दावा किया गया है कि उनके अच्छे प्रदर्शन के बावजूद कार्यस्थल पर दबाव का माहौल लगातार बना रहा।
इस्तीफे के बाद विवाद
पीड़िता ने बताया कि लगातार दबाव और मानसिक उत्पीड़न के कारण उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, नोटिस पीरियड पूरा करने के बावजूद उन्हें कथित रूप से बकाया बोनस और अन्य भुगतान नहीं दिए गए।आरोप है कि बोनस मांगने पर क्षेत्रीय और जोनल अधिकारियों ने भुगतान रोक दिया और उन्हें विभिन्न स्तरों पर शिकायत करने के बावजूद राहत नहीं मिली।इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न मामला नौकरी छोड़ने के बाद भी जारी दबाव और धमकियों के आरोपों के कारण और गंभीर हो गया है।
धमकी और शिकायतें
पीड़िता का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें कथित रूप से धमकी दी गई कि उनका करियर बर्बाद कर दिया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगवाकर मानसिक रूप से परेशान करने का भी आरोप है। उन्होंने ‘शी-बॉक्स पोर्टल’ और सरकारी लेबर विभाग में भी शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने का दावा किया गया है।
बैंक का पक्ष और जांच की मांग
मामले में बैंक के डिप्टी एचआर अधिकारी ने कहा है कि उनके पास यौन उत्पीड़न से जुड़ी कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, बोनस भुगतान को लेकर एक अलग शिकायत मिलने की बात स्वीकार की गई है, जिसे बैंक नीति के अनुसार निपटाया गया। पीड़िता ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है।
यह मामला अब प्रशासनिक जांच की दिशा में बढ़ रहा है। इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न से जुड़ी इस शिकायत ने कार्यस्थल सुरक्षा और कॉरपोरेट जवाबदेही पर नई बहस को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
