मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस आक्रामक, हाईकोर्ट और सड़क दोनों मोर्चों पर लड़ाई की तैयारी

Digital Desk

On

राज्यसभा चुनाव में नामांकन खारिज होने के खिलाफ कांग्रेस 15 से 17 जून तक प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी, वहीं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी भी तेज

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद अब यह मामला केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को छोड़ने वाली नहीं है और इसके खिलाफ सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष करेगी। पार्टी ने एक ओर जहां मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं दूसरी ओर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति भी तैयार कर ली है।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है और पार्टी इसे न्यायिक मंच पर चुनौती देगी। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों के साथ बैठकों का दौर चल रहा है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं की राय ली जा रही है और चुनाव याचिका का मसौदा तैयार किया जा रहा है। मीनाक्षी नटराजन भी इन दिनों दिल्ली में हैं और कानूनी प्रक्रिया को लेकर पार्टी नेतृत्व के संपर्क में बनी हुई हैं।

कांग्रेस की रणनीति केवल न्यायालय तक सीमित नहीं है। पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच भी ले जाने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में 15 जून से 17 जून तक प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया गया है। कांग्रेस का मानना है कि इस मुद्दे को व्यापक जनसमर्थन दिलाने के लिए जनता के बीच जाना आवश्यक है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नामांकन निरस्त होने की कार्रवाई ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े किए हैं और इसी कारण विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।

आंदोलन की शुरुआत 15 जून को यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन से होगी। पार्टी के युवा कार्यकर्ता प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इसके अगले दिन 16 जून को कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई मैदान में उतरेगी। छात्र संगठन के कार्यकर्ता इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करेंगे और सरकार तथा चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाएंगे। 17 जून को महिला कांग्रेस आंदोलन की कमान संभालेगी। महिला कार्यकर्ता भी इस मामले को लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताएंगी। कांग्रेस इस मुद्दे को केवल कानूनी विवाद के रूप में नहीं बल्कि राजनीतिक संघर्ष के रूप में भी प्रस्तुत करना चाहती है। पार्टी को उम्मीद है कि इस मुद्दे के जरिए वह कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर सकेगी और राज्यसभा चुनाव से जुड़े विवाद को जनचर्चा का विषय बना पाएगी। दूसरी ओर भाजपा इस पूरे मामले को चुनावी प्रक्रिया के तहत लिया गया वैधानिक निर्णय बता रही है।

इस विवाद के बीच कांग्रेस की नजर अब हाईकोर्ट पर टिकी हुई है। पार्टी का प्रयास है कि अगले सप्ताह के भीतर चुनाव याचिका दायर कर दी जाए। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस चाहती है कि 21 जून से पहले इस मामले में किसी प्रकार की राहत मिल जाए। इसका कारण यह है कि इसके बाद राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित भाजपा उम्मीदवारों के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। भाजपा के तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं।

कांग्रेस की चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि समय रहते कानूनी हस्तक्षेप नहीं हुआ तो मामला और जटिल हो सकता है। पार्टी इसीलिए हर कानूनी पहलू का गहन अध्ययन कर रही है। चुनाव कानून के जानकारों से सलाह ली जा रही है ताकि याचिका को मजबूत आधार पर अदालत में पेश किया जा सके। पार्टी नेताओं का कहना है कि नियमानुसार चुनाव की घोषणा के 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दायर की जा सकती है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया को लेकर जल्दबाजी के बजाय पूरी तैयारी की जा रही है।

इससे पहले कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था। हालांकि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका को निरस्त कर दिया था। इसके अलावा निर्वाचन आयोग से भी कांग्रेस को कोई राहत नहीं मिली। इन घटनाक्रमों के बाद अब पार्टी की उम्मीदें हाईकोर्ट पर टिक गई हैं। कांग्रेस का मानना है कि अदालत में पूरे मामले की विस्तार से सुनवाई होने पर उसे न्याय मिल सकता है। एक ओर कांग्रेस इसे लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा बता रही है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक चर्चा में रह सकता है क्योंकि सड़क पर आंदोलन और अदालत में कानूनी चुनौती दोनों एक साथ आगे बढ़ने वाले हैं।

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
14 Jun 2026 By Vaishnavi.J

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस आक्रामक, हाईकोर्ट और सड़क दोनों मोर्चों पर लड़ाई की तैयारी

Digital Desk

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद अब यह मामला केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को छोड़ने वाली नहीं है और इसके खिलाफ सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष करेगी। पार्टी ने एक ओर जहां मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं दूसरी ओर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति भी तैयार कर ली है।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है और पार्टी इसे न्यायिक मंच पर चुनौती देगी। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों के साथ बैठकों का दौर चल रहा है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं की राय ली जा रही है और चुनाव याचिका का मसौदा तैयार किया जा रहा है। मीनाक्षी नटराजन भी इन दिनों दिल्ली में हैं और कानूनी प्रक्रिया को लेकर पार्टी नेतृत्व के संपर्क में बनी हुई हैं।

कांग्रेस की रणनीति केवल न्यायालय तक सीमित नहीं है। पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच भी ले जाने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में 15 जून से 17 जून तक प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया गया है। कांग्रेस का मानना है कि इस मुद्दे को व्यापक जनसमर्थन दिलाने के लिए जनता के बीच जाना आवश्यक है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नामांकन निरस्त होने की कार्रवाई ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े किए हैं और इसी कारण विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।

आंदोलन की शुरुआत 15 जून को यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन से होगी। पार्टी के युवा कार्यकर्ता प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इसके अगले दिन 16 जून को कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई मैदान में उतरेगी। छात्र संगठन के कार्यकर्ता इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करेंगे और सरकार तथा चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाएंगे। 17 जून को महिला कांग्रेस आंदोलन की कमान संभालेगी। महिला कार्यकर्ता भी इस मामले को लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताएंगी। कांग्रेस इस मुद्दे को केवल कानूनी विवाद के रूप में नहीं बल्कि राजनीतिक संघर्ष के रूप में भी प्रस्तुत करना चाहती है। पार्टी को उम्मीद है कि इस मुद्दे के जरिए वह कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर सकेगी और राज्यसभा चुनाव से जुड़े विवाद को जनचर्चा का विषय बना पाएगी। दूसरी ओर भाजपा इस पूरे मामले को चुनावी प्रक्रिया के तहत लिया गया वैधानिक निर्णय बता रही है।

इस विवाद के बीच कांग्रेस की नजर अब हाईकोर्ट पर टिकी हुई है। पार्टी का प्रयास है कि अगले सप्ताह के भीतर चुनाव याचिका दायर कर दी जाए। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस चाहती है कि 21 जून से पहले इस मामले में किसी प्रकार की राहत मिल जाए। इसका कारण यह है कि इसके बाद राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित भाजपा उम्मीदवारों के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। भाजपा के तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं।

कांग्रेस की चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि समय रहते कानूनी हस्तक्षेप नहीं हुआ तो मामला और जटिल हो सकता है। पार्टी इसीलिए हर कानूनी पहलू का गहन अध्ययन कर रही है। चुनाव कानून के जानकारों से सलाह ली जा रही है ताकि याचिका को मजबूत आधार पर अदालत में पेश किया जा सके। पार्टी नेताओं का कहना है कि नियमानुसार चुनाव की घोषणा के 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दायर की जा सकती है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया को लेकर जल्दबाजी के बजाय पूरी तैयारी की जा रही है।

इससे पहले कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था। हालांकि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका को निरस्त कर दिया था। इसके अलावा निर्वाचन आयोग से भी कांग्रेस को कोई राहत नहीं मिली। इन घटनाक्रमों के बाद अब पार्टी की उम्मीदें हाईकोर्ट पर टिक गई हैं। कांग्रेस का मानना है कि अदालत में पूरे मामले की विस्तार से सुनवाई होने पर उसे न्याय मिल सकता है। एक ओर कांग्रेस इसे लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा बता रही है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक चर्चा में रह सकता है क्योंकि सड़क पर आंदोलन और अदालत में कानूनी चुनौती दोनों एक साथ आगे बढ़ने वाले हैं।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/if-meenakshi-natarajans-nomination-is-rejected-congress-is-preparing-to/article-55924

खबरें और भी हैं

गे फ्रेंड के साथ मिलकर पत्नी से दुष्कर्म का आरोप, पति फरार

टाप न्यूज

गे फ्रेंड के साथ मिलकर पत्नी से दुष्कर्म का आरोप, पति फरार

अंबिकापुर में महिला ने पति और उसके दोस्त पर दुष्कर्म, प्रताड़ना और जान से मारने की धमकी देने का आरोप...
छत्तीसगढ़ 
गे फ्रेंड के साथ मिलकर पत्नी से दुष्कर्म का आरोप, पति फरार

सूर्या कप सिल्वर लीग का आगाज आज से, 44 टीमें दिखाएंगी दम

रायपुर में 63 दिनों तक चलने वाले राज्य के चर्चित टेनिस क्रिकेट टूर्नामेंट में 900 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, विजेता टीम...
छत्तीसगढ़ 
सूर्या कप सिल्वर लीग का आगाज आज से, 44 टीमें दिखाएंगी दम

दुर्ग में ऑनलाइन सट्टे पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, होटल से दो युवक गिरफ्तार

खम्हरिया स्थित होटल में मोबाइल और टैब के जरिए चल रहा था ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क, पुलिस ने 60 हजार नकद...
छत्तीसगढ़ 
दुर्ग में ऑनलाइन सट्टे पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, होटल से दो युवक गिरफ्तार

सरोना शराब दुकान में 7 लाख की बड़ी चोरी, लॉकर उखाड़ ले गए बदमाश

रायपुर के सरोना स्थित विदेशी शराब दुकान को निशाना बनाकर चोर नकदी से भरा लॉकर और CCTV का DVR ले...
छत्तीसगढ़  रायपुर 
सरोना शराब दुकान में 7 लाख की बड़ी चोरी, लॉकर उखाड़ ले गए बदमाश

बिजनेस

Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.