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इस हफ्ते सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, निवेशकों में हलचल
बिजनेस डेस्क
चांदी ₹14,326 सस्ती होकर ₹2.43 लाख प्रति किलो, सोना ₹6,438 गिरकर ₹1.48 लाख पर, ऑल-टाइम हाई से अब तक भारी नुकसान
सोने और चांदी की कीमतों में इस हफ्ते बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे बाजार में निवेशकों के बीच हलचल बढ़ गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत में ₹6,438 की गिरावट आई है और अब यह घटकर लगभग ₹1.48 लाख पर आ गया है। पिछले हफ्ते यही कीमत करीब ₹1.54 लाख के स्तर पर थी। वहीं चांदी के दाम में भी तेज गिरावट देखने को मिली है और यह ₹14,326 कम होकर ₹2.43 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई है। इस गिरावट ने उन निवेशकों को खास तौर पर प्रभावित किया है जिन्होंने हाल के महीनों में ऊंचे दामों पर खरीदारी की थी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय की गिरावट अचानक नहीं है, बल्कि पिछले कई हफ्तों से बन रहे दबाव का परिणाम है। खासकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और निवेशकों के रुख में बदलाव ने इस ट्रेंड को और तेज कर दिया है। इस साल सोने और चांदी दोनों की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 31 दिसंबर 2025 को सोना करीब ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, जो जनवरी के अंत तक बढ़कर ₹1.76 लाख के ऑल-टाइम हाई तक पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट का दौर शुरू हो गया और अब तक सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब ₹28,000 तक सस्ता हो चुका है। चांदी के बाजार में भी इसी तरह का पैटर्न देखने को मिला है। दिसंबर 2025 में चांदी लगभग ₹2.30 लाख प्रति किलो के स्तर पर थी, जो जनवरी में तेजी से बढ़कर ₹3.86 लाख प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन उसके बाद से लगातार प्रॉफिट बुकिंग और बाजार में बिकवाली के चलते चांदी के दामों में भारी गिरावट आई है और अब तक यह करीब ₹1.43 लाख तक नीचे आ चुकी है।
इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण निवेशकों का ‘कैश की ओर रुख’ बताया जा रहा है। मिडिल ईस्ट और अन्य क्षेत्रों में चल रहे तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित नकदी (liquidity) बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में कई बड़े निवेशक अपने सोने-चांदी के होल्डिंग्स को बेचकर कैश में बदल रहे हैं ताकि अनिश्चित समय में वित्तीय स्थिरता बनी रहे।इसके अलावा जनवरी में सोना और चांदी दोनों ही अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गए थे, जिसके बाद बड़े निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी। इस प्रॉफिट बुकिंग के चलते बाजार में सप्लाई अचानक बढ़ गई और कीमतों पर दबाव बनने लगा। जब सप्लाई बढ़ती है और डिमांड तुलनात्मक रूप से स्थिर या कमजोर रहती है, तो कीमतों में गिरावट आना स्वाभाविक माना जाता है। दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक संकेतकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी कीमती धातुओं पर दबाव डाला है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने-चांदी जैसी कमोडिटी में निवेश कम हो जाता है। भारत में भी इस गिरावट का असर बाजारों में साफ देखा जा रहा है। ज्वेलरी कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में गिरावट से शॉर्ट टर्म में खरीदारी बढ़ सकती है, लेकिन निवेशक अभी भी असमंजस की स्थिति में हैं। कई लोग आगे और गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं, इसलिए बड़ी खरीद से बच रहे हैं।
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इस हफ्ते सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, निवेशकों में हलचल
बिजनेस डेस्क
सोने और चांदी की कीमतों में इस हफ्ते बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे बाजार में निवेशकों के बीच हलचल बढ़ गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत में ₹6,438 की गिरावट आई है और अब यह घटकर लगभग ₹1.48 लाख पर आ गया है। पिछले हफ्ते यही कीमत करीब ₹1.54 लाख के स्तर पर थी। वहीं चांदी के दाम में भी तेज गिरावट देखने को मिली है और यह ₹14,326 कम होकर ₹2.43 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई है। इस गिरावट ने उन निवेशकों को खास तौर पर प्रभावित किया है जिन्होंने हाल के महीनों में ऊंचे दामों पर खरीदारी की थी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय की गिरावट अचानक नहीं है, बल्कि पिछले कई हफ्तों से बन रहे दबाव का परिणाम है। खासकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और निवेशकों के रुख में बदलाव ने इस ट्रेंड को और तेज कर दिया है। इस साल सोने और चांदी दोनों की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 31 दिसंबर 2025 को सोना करीब ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, जो जनवरी के अंत तक बढ़कर ₹1.76 लाख के ऑल-टाइम हाई तक पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट का दौर शुरू हो गया और अब तक सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब ₹28,000 तक सस्ता हो चुका है। चांदी के बाजार में भी इसी तरह का पैटर्न देखने को मिला है। दिसंबर 2025 में चांदी लगभग ₹2.30 लाख प्रति किलो के स्तर पर थी, जो जनवरी में तेजी से बढ़कर ₹3.86 लाख प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन उसके बाद से लगातार प्रॉफिट बुकिंग और बाजार में बिकवाली के चलते चांदी के दामों में भारी गिरावट आई है और अब तक यह करीब ₹1.43 लाख तक नीचे आ चुकी है।
इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण निवेशकों का ‘कैश की ओर रुख’ बताया जा रहा है। मिडिल ईस्ट और अन्य क्षेत्रों में चल रहे तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित नकदी (liquidity) बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में कई बड़े निवेशक अपने सोने-चांदी के होल्डिंग्स को बेचकर कैश में बदल रहे हैं ताकि अनिश्चित समय में वित्तीय स्थिरता बनी रहे।इसके अलावा जनवरी में सोना और चांदी दोनों ही अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गए थे, जिसके बाद बड़े निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी। इस प्रॉफिट बुकिंग के चलते बाजार में सप्लाई अचानक बढ़ गई और कीमतों पर दबाव बनने लगा। जब सप्लाई बढ़ती है और डिमांड तुलनात्मक रूप से स्थिर या कमजोर रहती है, तो कीमतों में गिरावट आना स्वाभाविक माना जाता है। दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक संकेतकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी कीमती धातुओं पर दबाव डाला है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने-चांदी जैसी कमोडिटी में निवेश कम हो जाता है। भारत में भी इस गिरावट का असर बाजारों में साफ देखा जा रहा है। ज्वेलरी कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में गिरावट से शॉर्ट टर्म में खरीदारी बढ़ सकती है, लेकिन निवेशक अभी भी असमंजस की स्थिति में हैं। कई लोग आगे और गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं, इसलिए बड़ी खरीद से बच रहे हैं।
