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अमेरिका के ईरान युद्ध खत्म करने के ऐलान से शेयर बाजार में जोरदार उछाल
बिजनेस डेस्क
वैश्विक बाजारों में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच सेंसेक्स 900 अंकों से अधिक चढ़ा, निफ्टी भी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा
अमेरिका द्वारा ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की घोषणा के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने निवेशकों के उत्साह को बढ़ाया, जिसका असर घरेलू बाजार में खुलते ही दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूत बढ़त दर्ज की और बाजार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी का माहौल बना रहा।
शुक्रवार सुबह बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 921.30 अंक की बढ़त के साथ 74,753.85 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 254.20 अंक चढ़कर 23,417.25 पर कारोबार करता नजर आया। पिछले कुछ दिनों से भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर निवेशकों के बीच चिंता बनी हुई थी, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से युद्ध समाप्त होने की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल दिखाई दिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होने की खबर का सबसे बड़ा असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ा है। जैसे ही युद्ध समाप्त होने की जानकारी सामने आई, एशियाई बाजारों में तेजी का माहौल बन गया। यूरोपीय और अमेरिकी वायदा बाजारों में भी मजबूती देखी गई, जिसका सकारात्मक प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स में दोबारा रुचि दिखाई और बाजार में खरीदारी का दबाव बढ़ गया।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी इस तेजी का एक बड़ा कारण मानी जा रही है। युद्ध और तनाव के दौरान तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही थी, जिससे आयातक देशों की चिंता बढ़ गई थी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में नरमी को घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक यदि कच्चा तेल नियंत्रित स्तर पर बना रहता है तो महंगाई पर दबाव कम हो सकता है और कंपनियों की लागत भी घट सकती है।
शेयर बाजार में विमानन क्षेत्र की कंपनियों ने सबसे अधिक ध्यान खींचा। इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। विमानन कंपनियों के लिए ईंधन सबसे बड़ा खर्च होता है और तेल की कीमतों में कमी का सीधा फायदा उन्हें मिलता है। यही वजह रही कि निवेशकों ने इस क्षेत्र में दिलचस्पी दिखाई। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में भी मजबूती दर्ज की गई।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों ने भी बाजार को समर्थन दिया। एचडीएफसी बैंक और बजाज फाइनेंस जैसे बड़े शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता कम होने पर निवेश और आर्थिक गतिविधियों में सुधार की उम्मीद बढ़ जाती है, जिसका सीधा लाभ वित्तीय संस्थानों को मिल सकता है। इसी उम्मीद के चलते बैंकिंग शेयरों में खरीदारी का रुझान देखा गया।
कारोबार के दौरान ट्रेंट और इटरनल जैसे शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। निवेशकों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो उपभोक्ता मांग में सुधार आ सकता है। इससे रिटेल और उपभोक्ता क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को फायदा मिलने की संभावना है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए अहम बनी हुई हैं। पिछले कुछ समय से वैश्विक तनाव और अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए थे। अब हालात सामान्य होने की उम्मीद के बीच विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ सकता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार में मजबूती बनी रह सकती है।
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए थे। निवेशकों को डर था कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। हालांकि अब युद्ध समाप्त होने की घोषणा के बाद इन आशंकाओं में कमी आई है। यही वजह है कि वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति दोबारा बढ़ती दिखाई दे रही है।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर भी रहेगी। इसके अलावा तेल की कीमतों की दिशा, विदेशी निवेश प्रवाह और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल शुक्रवार के कारोबारी सत्र में निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल दिखाई दिया और अधिकांश सेक्टर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। अमेरिका द्वारा ईरान युद्ध समाप्त करने के ऐलान ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को राहत दी है। भारतीय शेयर बाजार ने भी इस खबर का स्वागत किया और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों में मजबूत उछाल देखने को मिला।
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अमेरिका के ईरान युद्ध खत्म करने के ऐलान से शेयर बाजार में जोरदार उछाल
बिजनेस डेस्क
अमेरिका द्वारा ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की घोषणा के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने निवेशकों के उत्साह को बढ़ाया, जिसका असर घरेलू बाजार में खुलते ही दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूत बढ़त दर्ज की और बाजार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी का माहौल बना रहा।
शुक्रवार सुबह बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 921.30 अंक की बढ़त के साथ 74,753.85 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 254.20 अंक चढ़कर 23,417.25 पर कारोबार करता नजर आया। पिछले कुछ दिनों से भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर निवेशकों के बीच चिंता बनी हुई थी, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से युद्ध समाप्त होने की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल दिखाई दिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होने की खबर का सबसे बड़ा असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ा है। जैसे ही युद्ध समाप्त होने की जानकारी सामने आई, एशियाई बाजारों में तेजी का माहौल बन गया। यूरोपीय और अमेरिकी वायदा बाजारों में भी मजबूती देखी गई, जिसका सकारात्मक प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स में दोबारा रुचि दिखाई और बाजार में खरीदारी का दबाव बढ़ गया।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी इस तेजी का एक बड़ा कारण मानी जा रही है। युद्ध और तनाव के दौरान तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही थी, जिससे आयातक देशों की चिंता बढ़ गई थी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में नरमी को घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक यदि कच्चा तेल नियंत्रित स्तर पर बना रहता है तो महंगाई पर दबाव कम हो सकता है और कंपनियों की लागत भी घट सकती है।
शेयर बाजार में विमानन क्षेत्र की कंपनियों ने सबसे अधिक ध्यान खींचा। इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। विमानन कंपनियों के लिए ईंधन सबसे बड़ा खर्च होता है और तेल की कीमतों में कमी का सीधा फायदा उन्हें मिलता है। यही वजह रही कि निवेशकों ने इस क्षेत्र में दिलचस्पी दिखाई। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में भी मजबूती दर्ज की गई।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों ने भी बाजार को समर्थन दिया। एचडीएफसी बैंक और बजाज फाइनेंस जैसे बड़े शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता कम होने पर निवेश और आर्थिक गतिविधियों में सुधार की उम्मीद बढ़ जाती है, जिसका सीधा लाभ वित्तीय संस्थानों को मिल सकता है। इसी उम्मीद के चलते बैंकिंग शेयरों में खरीदारी का रुझान देखा गया।
कारोबार के दौरान ट्रेंट और इटरनल जैसे शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। निवेशकों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो उपभोक्ता मांग में सुधार आ सकता है। इससे रिटेल और उपभोक्ता क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को फायदा मिलने की संभावना है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए अहम बनी हुई हैं। पिछले कुछ समय से वैश्विक तनाव और अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए थे। अब हालात सामान्य होने की उम्मीद के बीच विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ सकता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार में मजबूती बनी रह सकती है।
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए थे। निवेशकों को डर था कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। हालांकि अब युद्ध समाप्त होने की घोषणा के बाद इन आशंकाओं में कमी आई है। यही वजह है कि वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति दोबारा बढ़ती दिखाई दे रही है।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर भी रहेगी। इसके अलावा तेल की कीमतों की दिशा, विदेशी निवेश प्रवाह और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल शुक्रवार के कारोबारी सत्र में निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल दिखाई दिया और अधिकांश सेक्टर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। अमेरिका द्वारा ईरान युद्ध समाप्त करने के ऐलान ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को राहत दी है। भारतीय शेयर बाजार ने भी इस खबर का स्वागत किया और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों में मजबूत उछाल देखने को मिला।
