काशी में सीएम मोहन यादव का देसी अंदाज, कचौड़ी-लस्सी का स्वाद लिया, विक्रमादित्य महानाट्य देखने की अपील की

भोपाल (म.प्र.)

By Rohit.P
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मोहन यादव वाराणसी दौरे में राम भंडार पर कचौड़ी-लस्सी का आनंद लिया और विक्रमादित्य महानाट्य देखने की अपील की, काशी की आध्यात्मिकता की सराहना की।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान सादगी और अपनापन दिखाते हुए लोगों का दिल जीत लिया। दूसरे दिन सुबह वे अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ राम भंडार (Ram Bhandar) पहुंचे। यहां उन्होंने दुकानदार से मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या खिलाओगे। इस सहज बातचीत ने वहां मौजूद लोगों को आकर्षित कर लिया।

सीएम ने कचौड़ी-सब्जी और लस्सी का ऑर्डर दिया और आम लोगों के बीच बैठकर नाश्ता किया। खास बात यह रही कि उन्होंने खुद ही बिल का भुगतान किया, जिससे उनकी सादगी और व्यवहारिकता झलकती है।

बाबा विश्वनाथ की कृपा से बार-बार काशी आगमन

सीएम मोहन यादव ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें बाबा विश्वनाथ की कृपा से सात दिनों के भीतर दो बार काशी आने का अवसर मिला। कशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) की आध्यात्मिक ऊर्जा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां आकर आत्मिक शांति का अनुभव होता है।

उन्होंने काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए इसे देश की आध्यात्मिक राजधानी बताया।

विक्रमादित्य महानाट्य की जमकर सराहना

सीएम ने काशी में आयोजित विक्रमोत्सव 2026 के तहत मंचित विक्रमादित्य महानाट्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति बेहद अद्भुत है और हर व्यक्ति को इसे जरूर देखना चाहिए।

3 अप्रैल को इस भव्य आयोजन का शुभारंभ योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) और मोहन यादव ने मिलकर किया था। इस दौरान मोहन यादव ने योगी आदित्यनाथ को वैदिक घड़ी भी भेंट की।

ऐतिहासिक परंपरा और सांस्कृतिक जुड़ाव पर जोर

सीएम ने अपने संबोधन में भारतीय परंपरा और इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और बलराम की तरह ही भर्तृहरि और विक्रमादित्य की जोड़ी भी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने बताया कि भर्तृहरि की दीक्षा भूमि उज्जैन रही, जबकि उनकी साधना काशी के पास चुनार किले में हुई थी।

उन्होंने यह भी कहा कि विक्रमादित्य की परंपरा आज भी समाज को प्रेरित कर रही है और इस प्रकार के आयोजन दो राज्यों के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाते हैं।

कलाकारों की समर्पण भावना की सराहना

सीएम मोहन यादव ने महानाट्य में शामिल कलाकारों की तारीफ करते हुए कहा कि इनमें कई डॉक्टर और इंजीनियर भी शामिल हैं, जो अपनी पेशेवर जिंदगी के साथ-साथ इस सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए समर्पित हैं। यह उनके जुनून और संस्कृति के प्रति प्रेम को दर्शाता है।

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05 Apr 2026 By Rohit.P

काशी में सीएम मोहन यादव का देसी अंदाज, कचौड़ी-लस्सी का स्वाद लिया, विक्रमादित्य महानाट्य देखने की अपील की

भोपाल (म.प्र.)

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान सादगी और अपनापन दिखाते हुए लोगों का दिल जीत लिया। दूसरे दिन सुबह वे अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ राम भंडार (Ram Bhandar) पहुंचे। यहां उन्होंने दुकानदार से मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या खिलाओगे। इस सहज बातचीत ने वहां मौजूद लोगों को आकर्षित कर लिया।

सीएम ने कचौड़ी-सब्जी और लस्सी का ऑर्डर दिया और आम लोगों के बीच बैठकर नाश्ता किया। खास बात यह रही कि उन्होंने खुद ही बिल का भुगतान किया, जिससे उनकी सादगी और व्यवहारिकता झलकती है।

बाबा विश्वनाथ की कृपा से बार-बार काशी आगमन

सीएम मोहन यादव ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें बाबा विश्वनाथ की कृपा से सात दिनों के भीतर दो बार काशी आने का अवसर मिला। कशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) की आध्यात्मिक ऊर्जा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां आकर आत्मिक शांति का अनुभव होता है।

उन्होंने काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए इसे देश की आध्यात्मिक राजधानी बताया।

विक्रमादित्य महानाट्य की जमकर सराहना

सीएम ने काशी में आयोजित विक्रमोत्सव 2026 के तहत मंचित विक्रमादित्य महानाट्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति बेहद अद्भुत है और हर व्यक्ति को इसे जरूर देखना चाहिए।

3 अप्रैल को इस भव्य आयोजन का शुभारंभ योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) और मोहन यादव ने मिलकर किया था। इस दौरान मोहन यादव ने योगी आदित्यनाथ को वैदिक घड़ी भी भेंट की।

ऐतिहासिक परंपरा और सांस्कृतिक जुड़ाव पर जोर

सीएम ने अपने संबोधन में भारतीय परंपरा और इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और बलराम की तरह ही भर्तृहरि और विक्रमादित्य की जोड़ी भी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने बताया कि भर्तृहरि की दीक्षा भूमि उज्जैन रही, जबकि उनकी साधना काशी के पास चुनार किले में हुई थी।

उन्होंने यह भी कहा कि विक्रमादित्य की परंपरा आज भी समाज को प्रेरित कर रही है और इस प्रकार के आयोजन दो राज्यों के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाते हैं।

कलाकारों की समर्पण भावना की सराहना

सीएम मोहन यादव ने महानाट्य में शामिल कलाकारों की तारीफ करते हुए कहा कि इनमें कई डॉक्टर और इंजीनियर भी शामिल हैं, जो अपनी पेशेवर जिंदगी के साथ-साथ इस सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए समर्पित हैं। यह उनके जुनून और संस्कृति के प्रति प्रेम को दर्शाता है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/in-kashi-cm-mohan-yadav-tasted-the-desi-style-kachori-lassi/article-50201

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