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इंदौर गैस हादसा: हाईकोर्ट में गलत हलफनामे पर एसडीएम ने मांगी माफी, सरकार ने बदला अपना पक्ष
इंदौर (म.प्र.)
इलाज और मुआवजे को लेकर सुनवाई के दौरान प्रशासन ने दी सफाई, हाईकोर्ट ने पीड़ितों के हितों की सुरक्षा पर दिया जोर
इंदौर के विजय नगर इलाके में अवंतिका गैस पाइपलाइन हादसे के बाद झुलसे लोगों के इलाज और मुआवजे से जुड़े मामले में शुक्रवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में अहम सुनवाई हुई। पिछली तारीख पर अदालत के सामने पेश किए गए सरकारी हलफनामे में इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा चुकाए जाने का दावा किया गया था, लेकिन बाद में इस जानकारी पर सवाल खड़े हो गए। इसी मामले में अदालत के निर्देश पर जूनी इंदौर के एसडीएम घनश्याम धनगर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट पहुंचे और शपथ पत्र में दर्ज तथ्यों को लेकर हुई चूक पर खेद जताया। प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि जानकारी प्रस्तुत करने के दौरान तथ्य सही तरीके से स्पष्ट नहीं हो पाए, जिसकी वजह से भ्रम की स्थिति बनी।
सुनवाई के दौरान शासन ने अदालत के सामने यह भी स्पष्ट किया कि गैस पाइपलाइन हादसे में घायल किसी भी व्यक्ति के इलाज का खर्च सरकार ही वहन करेगी। अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी पीड़ित का उपचार अभी भी जारी है या अस्पताल का भुगतान बाकी है तो उसे भी सरकारी स्तर पर पूरा किया जाएगा। कोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए प्रशासन और नगर निगम को निर्देश दिए कि इलाज और आर्थिक सहायता दोनों मामलों में किसी भी पीड़ित के साथ लापरवाही नहीं होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि राहत और मुआवजे से जुड़ी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाई जाए ताकि प्रभावित परिवारों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
दरअसल, पिछली सुनवाई में सरकार की ओर से दावा किया गया था कि हादसे में घायल सभी लोगों के इलाज का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, पीड़ित पक्ष ने इस दावे का विरोध करते हुए अदालत को अलग तस्वीर दिखाई। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गिरी उर्फ राजकुमारी झाला की ओर से बताया गया कि उनका उपचार अब भी अहमदाबाद के अस्पताल में जारी है और अस्पताल का लाखों रुपये का बिल अब तक जमा नहीं किया गया है। इस दावे के बाद अदालत ने सरकारी हलफनामे की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था।
शुक्रवार को जब एसडीएम अदालत में पेश हुए तो उन्होंने स्वीकार किया कि हलफनामे में जो जानकारी दी गई थी, वह वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शा सकी। उन्होंने अदालत से इस त्रुटि के लिए क्षमा भी मांगी। शासन की ओर से यह भी कहा गया कि प्रशासन का उद्देश्य किसी भी तथ्य को छिपाना नहीं था, बल्कि जानकारी प्रस्तुत करने में समन्वय की कमी रह गई थी। इसके बाद अदालत ने सरकारी पक्ष से यह सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में न्यायालय के समक्ष केवल पूरी तरह सत्यापित जानकारी ही प्रस्तुत की जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हादसे में प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को इलाज की सुविधा और आर्थिक सहायता समय पर मिलनी चाहिए। यदि किसी अस्पताल का भुगतान शेष है या किसी पीड़ित को उपचार में आर्थिक कठिनाई आ रही है, तो संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई करे। अदालत ने प्रशासन को यह भी निर्देश दिया कि राहत प्रक्रिया की नियमित निगरानी की जाए और पीड़ित परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखा जाए ताकि किसी प्रकार की शिकायत की गुंजाइश न रहे।
इसी मामले में मुआवजे की राशि को लेकर भी चर्चा हुई। अदालत ने कहा कि प्रत्येक पीड़ित को कितनी आर्थिक सहायता मिलेगी, इसका विस्तृत आकलन संबंधित दस्तावेजों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा। इस विषय पर अगली सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई है। माना जा रहा है कि उस दिन राहत राशि, उपचार की स्थिति और प्रशासन द्वारा किए गए पालन की रिपोर्ट अदालत के सामने रखी जाएगी।
सुनवाई के दौरान हाल ही में इंदौर के संचार नगर क्षेत्र में गैस पाइपलाइन लीकेज के बाद आग लगने की घटना का मुद्दा भी उठा। अदालत ने इस घटना को भी गंभीर मानते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई। न्यायालय ने संकेत दिए कि गैस पाइपलाइन से जुड़ी घटनाओं को अलग-अलग मामलों के रूप में देखने के बजाय व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के नजरिए से भी समीक्षा की जानी चाहिए। अदालत ने संबंधित विभागों से गैस नेटवर्क की निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था को लेकर भी जवाब मांगा।
अवंतिका गैस एजेंसी की भूमिका पर भी सुनवाई के दौरान चर्चा हुई। अदालत ने कहा कि अब तक एजेंसी की ओर से विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में अगली सुनवाई में एजेंसी को भी अपना जवाब दाखिल करना होगा। न्यायालय यह जानना चाहता है कि पाइपलाइन संचालन, रखरखाव और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर एजेंसी ने क्या कदम उठाए थे और हादसे के बाद उसकी क्या जिम्मेदारी बनती है। इसी आधार पर आगे की सुनवाई में विभिन्न पक्षों से जुड़े तथ्यों की जांच की जाएगी।
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इंदौर गैस हादसा: हाईकोर्ट में गलत हलफनामे पर एसडीएम ने मांगी माफी, सरकार ने बदला अपना पक्ष
इंदौर (म.प्र.)
इंदौर के विजय नगर इलाके में अवंतिका गैस पाइपलाइन हादसे के बाद झुलसे लोगों के इलाज और मुआवजे से जुड़े मामले में शुक्रवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में अहम सुनवाई हुई। पिछली तारीख पर अदालत के सामने पेश किए गए सरकारी हलफनामे में इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा चुकाए जाने का दावा किया गया था, लेकिन बाद में इस जानकारी पर सवाल खड़े हो गए। इसी मामले में अदालत के निर्देश पर जूनी इंदौर के एसडीएम घनश्याम धनगर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट पहुंचे और शपथ पत्र में दर्ज तथ्यों को लेकर हुई चूक पर खेद जताया। प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि जानकारी प्रस्तुत करने के दौरान तथ्य सही तरीके से स्पष्ट नहीं हो पाए, जिसकी वजह से भ्रम की स्थिति बनी।
सुनवाई के दौरान शासन ने अदालत के सामने यह भी स्पष्ट किया कि गैस पाइपलाइन हादसे में घायल किसी भी व्यक्ति के इलाज का खर्च सरकार ही वहन करेगी। अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी पीड़ित का उपचार अभी भी जारी है या अस्पताल का भुगतान बाकी है तो उसे भी सरकारी स्तर पर पूरा किया जाएगा। कोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए प्रशासन और नगर निगम को निर्देश दिए कि इलाज और आर्थिक सहायता दोनों मामलों में किसी भी पीड़ित के साथ लापरवाही नहीं होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि राहत और मुआवजे से जुड़ी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाई जाए ताकि प्रभावित परिवारों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
दरअसल, पिछली सुनवाई में सरकार की ओर से दावा किया गया था कि हादसे में घायल सभी लोगों के इलाज का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, पीड़ित पक्ष ने इस दावे का विरोध करते हुए अदालत को अलग तस्वीर दिखाई। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गिरी उर्फ राजकुमारी झाला की ओर से बताया गया कि उनका उपचार अब भी अहमदाबाद के अस्पताल में जारी है और अस्पताल का लाखों रुपये का बिल अब तक जमा नहीं किया गया है। इस दावे के बाद अदालत ने सरकारी हलफनामे की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था।
शुक्रवार को जब एसडीएम अदालत में पेश हुए तो उन्होंने स्वीकार किया कि हलफनामे में जो जानकारी दी गई थी, वह वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शा सकी। उन्होंने अदालत से इस त्रुटि के लिए क्षमा भी मांगी। शासन की ओर से यह भी कहा गया कि प्रशासन का उद्देश्य किसी भी तथ्य को छिपाना नहीं था, बल्कि जानकारी प्रस्तुत करने में समन्वय की कमी रह गई थी। इसके बाद अदालत ने सरकारी पक्ष से यह सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में न्यायालय के समक्ष केवल पूरी तरह सत्यापित जानकारी ही प्रस्तुत की जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हादसे में प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को इलाज की सुविधा और आर्थिक सहायता समय पर मिलनी चाहिए। यदि किसी अस्पताल का भुगतान शेष है या किसी पीड़ित को उपचार में आर्थिक कठिनाई आ रही है, तो संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई करे। अदालत ने प्रशासन को यह भी निर्देश दिया कि राहत प्रक्रिया की नियमित निगरानी की जाए और पीड़ित परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखा जाए ताकि किसी प्रकार की शिकायत की गुंजाइश न रहे।
इसी मामले में मुआवजे की राशि को लेकर भी चर्चा हुई। अदालत ने कहा कि प्रत्येक पीड़ित को कितनी आर्थिक सहायता मिलेगी, इसका विस्तृत आकलन संबंधित दस्तावेजों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा। इस विषय पर अगली सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई है। माना जा रहा है कि उस दिन राहत राशि, उपचार की स्थिति और प्रशासन द्वारा किए गए पालन की रिपोर्ट अदालत के सामने रखी जाएगी।
सुनवाई के दौरान हाल ही में इंदौर के संचार नगर क्षेत्र में गैस पाइपलाइन लीकेज के बाद आग लगने की घटना का मुद्दा भी उठा। अदालत ने इस घटना को भी गंभीर मानते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई। न्यायालय ने संकेत दिए कि गैस पाइपलाइन से जुड़ी घटनाओं को अलग-अलग मामलों के रूप में देखने के बजाय व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के नजरिए से भी समीक्षा की जानी चाहिए। अदालत ने संबंधित विभागों से गैस नेटवर्क की निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था को लेकर भी जवाब मांगा।
अवंतिका गैस एजेंसी की भूमिका पर भी सुनवाई के दौरान चर्चा हुई। अदालत ने कहा कि अब तक एजेंसी की ओर से विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में अगली सुनवाई में एजेंसी को भी अपना जवाब दाखिल करना होगा। न्यायालय यह जानना चाहता है कि पाइपलाइन संचालन, रखरखाव और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर एजेंसी ने क्या कदम उठाए थे और हादसे के बाद उसकी क्या जिम्मेदारी बनती है। इसी आधार पर आगे की सुनवाई में विभिन्न पक्षों से जुड़े तथ्यों की जांच की जाएगी।
