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प्याज-तेल-गैस ने बिगाड़ा रसोई का बजट, जुलाई में वेज थाली 4% और नॉन-वेज 9% महंगी
Business News
चिकन की कीमत में 14% उछाल का असर, आलू-टमाटर सस्ते होने से मिली थोड़ी राहत
महंगाई का असर अब घर की रसोई में तैयार होने वाली थाली पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जुलाई 2026 में शाकाहारी थाली की लागत पिछले साल के मुकाबले 4 प्रतिशत बढ़ गई, जबकि मांसाहारी थाली की लागत में 9 प्रतिशत का इजाफा हुआ। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज, खाद्य तेल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने खाने की लागत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
प्याज की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई परेशानी
वेज थाली की लागत बढ़ने में सबसे बड़ा योगदान प्याज की कीमतों का रहा। जुलाई में प्याज के दाम सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत बढ़े। इसके अलावा खाद्य तेल लगभग 11 प्रतिशत और रसोई गैस करीब 10 प्रतिशत महंगी हुई। प्याज की कीमतों में तेजी की वजह बाजार में पुराने महंगे स्टॉक की सप्लाई रही। इसके साथ ही महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के दौरान हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल तथा भंडारण को नुकसान पहुंचा, जिसका असर सप्लाई पर भी पड़ा।
चिकन महंगा हुआ तो नॉन-वेज थाली पर ज्यादा असर
नॉन-वेज थाली की लागत बढ़ने में ब्रॉयलर चिकन की कीमतों का बड़ा योगदान रहा। जुलाई में चिकन के दाम सालाना आधार पर करीब 14 प्रतिशत बढ़े। चूंकि नॉन-वेज थाली की लागत में चिकन की हिस्सेदारी काफी अधिक होती है, इसलिए इसके महंगे होने का सीधा असर पूरी थाली की कीमत पर पड़ा। प्याज, गैस और चिकन की महंगाई ने मिलकर नॉन-वेज थाली को वेज थाली की तुलना में ज्यादा महंगा कर दिया।
आलू-टमाटर ने दी राहत
महंगाई के बीच कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी भी देखने को मिली। जुलाई में आलू के दाम सालाना आधार पर 12 प्रतिशत नीचे आए, जबकि टमाटर की कीमत करीब 2 प्रतिशत कम हुई। आलू के उत्पादन में सुधार और बुवाई का रकबा बढ़ने से इसकी कीमतों में गिरावट आई। वहीं जुलाई में टमाटर की आवक बढ़ने से इसके दाम नियंत्रित रहे। इन दोनों सब्जियों की कीमत घटने से थाली की कुल लागत में होने वाली बढ़ोतरी कुछ सीमित रही।
एक महीने में वेज थाली 2% महंगी
जून की तुलना में भी जुलाई में वेज थाली की लागत करीब 2 प्रतिशत बढ़ी। इस दौरान प्याज की कीमत में करीब 23 प्रतिशत का उछाल आया, जबकि आलू भी लगभग 4 प्रतिशत महंगा हुआ। हालांकि टमाटर के दाम करीब 1 प्रतिशत घटे और कुछ दूसरी खाद्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहीं, जिससे थाली की लागत में बढ़ोतरी बहुत ज्यादा नहीं हुई।
नॉन-वेज थाली में जून के मुकाबले बड़ा बदलाव नहीं
मासिक आधार पर नॉन-वेज थाली की लागत लगभग स्थिर रही। इसका प्रमुख कारण जुलाई में ब्रॉयलर चिकन की कीमत में करीब 2 प्रतिशत की कमी रही। चिकन सस्ता होने से अन्य खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का असर कुछ हद तक संतुलित हो गया। यानी सालाना तुलना में जहां नॉन-वेज थाली 9 प्रतिशत महंगी हुई, वहीं महीने-दर-महीने इसकी लागत में बड़ा बदलाव नहीं आया।
रसोई के बजट पर बढ़ा दबाव
क्रिसिल की रिपोर्ट से साफ है कि खाने की थाली की लागत पर कई चीजों की कीमतों का एक साथ असर पड़ रहा है। प्याज, तेल, गैस और चिकन की महंगाई ने थाली का खर्च बढ़ाया है, जबकि आलू और टमाटर की कम कीमतों ने कुछ राहत दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सब्जियों, खाद्य तेल और ईंधन की कीमतों पर नजर रहेगी, क्योंकि इनका सीधा असर आम परिवार के मासिक रसोई बजट पर पड़ता है।
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प्याज-तेल-गैस ने बिगाड़ा रसोई का बजट, जुलाई में वेज थाली 4% और नॉन-वेज 9% महंगी
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महंगाई का असर अब घर की रसोई में तैयार होने वाली थाली पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जुलाई 2026 में शाकाहारी थाली की लागत पिछले साल के मुकाबले 4 प्रतिशत बढ़ गई, जबकि मांसाहारी थाली की लागत में 9 प्रतिशत का इजाफा हुआ। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज, खाद्य तेल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने खाने की लागत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
प्याज की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई परेशानी
वेज थाली की लागत बढ़ने में सबसे बड़ा योगदान प्याज की कीमतों का रहा। जुलाई में प्याज के दाम सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत बढ़े। इसके अलावा खाद्य तेल लगभग 11 प्रतिशत और रसोई गैस करीब 10 प्रतिशत महंगी हुई। प्याज की कीमतों में तेजी की वजह बाजार में पुराने महंगे स्टॉक की सप्लाई रही। इसके साथ ही महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के दौरान हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल तथा भंडारण को नुकसान पहुंचा, जिसका असर सप्लाई पर भी पड़ा।
चिकन महंगा हुआ तो नॉन-वेज थाली पर ज्यादा असर
नॉन-वेज थाली की लागत बढ़ने में ब्रॉयलर चिकन की कीमतों का बड़ा योगदान रहा। जुलाई में चिकन के दाम सालाना आधार पर करीब 14 प्रतिशत बढ़े। चूंकि नॉन-वेज थाली की लागत में चिकन की हिस्सेदारी काफी अधिक होती है, इसलिए इसके महंगे होने का सीधा असर पूरी थाली की कीमत पर पड़ा। प्याज, गैस और चिकन की महंगाई ने मिलकर नॉन-वेज थाली को वेज थाली की तुलना में ज्यादा महंगा कर दिया।
आलू-टमाटर ने दी राहत
महंगाई के बीच कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी भी देखने को मिली। जुलाई में आलू के दाम सालाना आधार पर 12 प्रतिशत नीचे आए, जबकि टमाटर की कीमत करीब 2 प्रतिशत कम हुई। आलू के उत्पादन में सुधार और बुवाई का रकबा बढ़ने से इसकी कीमतों में गिरावट आई। वहीं जुलाई में टमाटर की आवक बढ़ने से इसके दाम नियंत्रित रहे। इन दोनों सब्जियों की कीमत घटने से थाली की कुल लागत में होने वाली बढ़ोतरी कुछ सीमित रही।
एक महीने में वेज थाली 2% महंगी
जून की तुलना में भी जुलाई में वेज थाली की लागत करीब 2 प्रतिशत बढ़ी। इस दौरान प्याज की कीमत में करीब 23 प्रतिशत का उछाल आया, जबकि आलू भी लगभग 4 प्रतिशत महंगा हुआ। हालांकि टमाटर के दाम करीब 1 प्रतिशत घटे और कुछ दूसरी खाद्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहीं, जिससे थाली की लागत में बढ़ोतरी बहुत ज्यादा नहीं हुई।
नॉन-वेज थाली में जून के मुकाबले बड़ा बदलाव नहीं
मासिक आधार पर नॉन-वेज थाली की लागत लगभग स्थिर रही। इसका प्रमुख कारण जुलाई में ब्रॉयलर चिकन की कीमत में करीब 2 प्रतिशत की कमी रही। चिकन सस्ता होने से अन्य खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का असर कुछ हद तक संतुलित हो गया। यानी सालाना तुलना में जहां नॉन-वेज थाली 9 प्रतिशत महंगी हुई, वहीं महीने-दर-महीने इसकी लागत में बड़ा बदलाव नहीं आया।
रसोई के बजट पर बढ़ा दबाव
क्रिसिल की रिपोर्ट से साफ है कि खाने की थाली की लागत पर कई चीजों की कीमतों का एक साथ असर पड़ रहा है। प्याज, तेल, गैस और चिकन की महंगाई ने थाली का खर्च बढ़ाया है, जबकि आलू और टमाटर की कम कीमतों ने कुछ राहत दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सब्जियों, खाद्य तेल और ईंधन की कीमतों पर नजर रहेगी, क्योंकि इनका सीधा असर आम परिवार के मासिक रसोई बजट पर पड़ता है।
