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ओंकारेश्वर में राष्ट्रपति बोलीं- सिकल सेल स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले पूरा
Digital Desk
विश्व सिकल सेल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की सराहना, मुख्यमंत्री ने 2027 से पहले 1.60 करोड़ स्क्रीनिंग पूरी करने का लक्ष्य दोहराया
विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर शुक्रवार को मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की सराहना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, अधिकारी और जनजातीय समुदाय के लोग मौजूद रहे। इस दौरान राष्ट्रपति ने सिकल सेल मिशन से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न स्टॉल पर जाकर बीमारी की पहचान, जांच और उपचार से संबंधित जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ उल्लेखनीय कार्य किया है और स्क्रीनिंग का जो लक्ष्य तय किया गया था, उसे निर्धारित समय से पहले पूरा करना एक बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय स्तर पर जो लक्ष्य निर्धारित किए गए थे, उनमें से कई को मध्यप्रदेश ने समय से पहले हासिल कर लिया है। उन्हें जो जानकारी दी गई है, उसके अनुसार प्रदेश में सवा करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि केवल जांच करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को बीमारी के बारे में सही जानकारी देना और समय पर उपचार उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि बड़ी संख्या में लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे भविष्य में बीमारी की रोकथाम में मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया को केवल एक स्वास्थ्य समस्या के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसका संबंध जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य, आनुवंशिक जागरूकता और सामाजिक व्यवहार में बदलाव से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस चुनौती को गंभीरता से लिया है और पिछले कुछ वर्षों में कई स्तरों पर समन्वित प्रयास किए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय सिकल सेल मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसका उद्देश्य बीमारी का स्थायी समाधान खोजना है। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रदेश सरकार वर्ष 2027 से पहले लक्षित आबादी की स्क्रीनिंग पूरी करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि जब स्क्रीनिंग का कार्य पूरा हो जाएगा, तब उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन पर और अधिक प्रभावी ढंग से काम किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में चलाया जा रहा यह अभियान आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सुधार का महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में मध्यप्रदेश में 1 करोड़ 32 लाख लोगों की सिकल सेल जांच की जा चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2027 से पहले 1 करोड़ 60 लाख लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य भी पूरा कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और सिकल सेल मिशन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता और समय पर जांच की व्यवस्था मजबूत की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान सिकल सेल मरीजों, नियमित रक्तदाताओं और समाज में जागरूकता फैलाने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कई ग्राम पंचायतों ने अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी मंच से सम्मान दिया गया, जिन्होंने अपने क्षेत्रों में लोगों को जांच के लिए प्रेरित किया।
आयोजन स्थल पर लगी प्रदर्शनी में सिकल सेल एनीमिया की पहचान, स्क्रीनिंग, उपचार और सरकारी सहायता योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने लोगों को बीमारी से बचाव और प्रबंधन के तरीकों के बारे में बताया। स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श की व्यवस्था भी की गई थी, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने जानकारी प्राप्त की। सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ सकती है। इसे रोकने के लिए विवाह पूर्व जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। युवक और युवती की जांच के आधार पर उन्हें संभावित जोखिमों की जानकारी दी जाती है, ताकि भविष्य में बीमारी की संभावना को कम किया जा सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच और सही परामर्श के माध्यम से इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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ओंकारेश्वर में राष्ट्रपति बोलीं- सिकल सेल स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले पूरा
Digital Desk
विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर शुक्रवार को मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की सराहना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, अधिकारी और जनजातीय समुदाय के लोग मौजूद रहे। इस दौरान राष्ट्रपति ने सिकल सेल मिशन से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न स्टॉल पर जाकर बीमारी की पहचान, जांच और उपचार से संबंधित जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ उल्लेखनीय कार्य किया है और स्क्रीनिंग का जो लक्ष्य तय किया गया था, उसे निर्धारित समय से पहले पूरा करना एक बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय स्तर पर जो लक्ष्य निर्धारित किए गए थे, उनमें से कई को मध्यप्रदेश ने समय से पहले हासिल कर लिया है। उन्हें जो जानकारी दी गई है, उसके अनुसार प्रदेश में सवा करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि केवल जांच करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को बीमारी के बारे में सही जानकारी देना और समय पर उपचार उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि बड़ी संख्या में लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे भविष्य में बीमारी की रोकथाम में मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया को केवल एक स्वास्थ्य समस्या के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसका संबंध जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य, आनुवंशिक जागरूकता और सामाजिक व्यवहार में बदलाव से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस चुनौती को गंभीरता से लिया है और पिछले कुछ वर्षों में कई स्तरों पर समन्वित प्रयास किए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय सिकल सेल मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसका उद्देश्य बीमारी का स्थायी समाधान खोजना है। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रदेश सरकार वर्ष 2027 से पहले लक्षित आबादी की स्क्रीनिंग पूरी करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि जब स्क्रीनिंग का कार्य पूरा हो जाएगा, तब उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन पर और अधिक प्रभावी ढंग से काम किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में चलाया जा रहा यह अभियान आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सुधार का महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में मध्यप्रदेश में 1 करोड़ 32 लाख लोगों की सिकल सेल जांच की जा चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2027 से पहले 1 करोड़ 60 लाख लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य भी पूरा कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और सिकल सेल मिशन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता और समय पर जांच की व्यवस्था मजबूत की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान सिकल सेल मरीजों, नियमित रक्तदाताओं और समाज में जागरूकता फैलाने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कई ग्राम पंचायतों ने अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी मंच से सम्मान दिया गया, जिन्होंने अपने क्षेत्रों में लोगों को जांच के लिए प्रेरित किया।
आयोजन स्थल पर लगी प्रदर्शनी में सिकल सेल एनीमिया की पहचान, स्क्रीनिंग, उपचार और सरकारी सहायता योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने लोगों को बीमारी से बचाव और प्रबंधन के तरीकों के बारे में बताया। स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श की व्यवस्था भी की गई थी, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने जानकारी प्राप्त की। सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ सकती है। इसे रोकने के लिए विवाह पूर्व जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। युवक और युवती की जांच के आधार पर उन्हें संभावित जोखिमों की जानकारी दी जाती है, ताकि भविष्य में बीमारी की संभावना को कम किया जा सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच और सही परामर्श के माध्यम से इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
