9 साल बाद मध्य प्रदेश में लौटेगा छात्रसंघ चुनाव का दौर

मध्य प्रदेश

On

हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद सरकार ने दिया सितंबर 2026 में चुनाव कराने का भरोसा, ABVP और NSUI दोनों ने अपने संघर्ष का बताया परिणाम

मध्य प्रदेश में लगभग नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद छात्रसंघ चुनावों की वापसी का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र राजनीति को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। छात्र संगठनों से लेकर राजनीतिक दलों तक इस फैसले का स्वागत किया जा रहा है, वहीं इसके राजनीतिक और लोकतांत्रिक महत्व पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से प्रदेश में बंद थे। इस दौरान कई छात्र संगठनों ने लगातार चुनाव बहाल करने की मांग उठाई। हाल ही में जबलपुर निवासी छात्र अदनान अंसारी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा। इसके बाद सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस आश्वासन के बाद चुनाव कराने की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं।

छात्रसंघ चुनाव केवल कॉलेजों में प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं माने जाते, बल्कि इन्हें लोकतंत्र की पहली पाठशाला भी कहा जाता है। यहीं से अनेक छात्र भविष्य में सामाजिक और राजनीतिक नेतृत्व की ओर बढ़ते हैं। मध्य प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी छात्र राजनीति से निकलकर प्रदेश के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक पहुंचे हैं। उनके अलावा कई वरिष्ठ नेता छात्रसंघ चुनावों के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हुए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्रसंघ चुनाव युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझने, नेतृत्व विकसित करने और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर देते हैं। चुनावों के माध्यम से छात्र अपनी समस्याओं को संगठित रूप से उठाने और कॉलेज प्रशासन व सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने में सक्षम होते हैं।

Also Read:  मध्य प्रदेश में भवन निर्माण की मंजूरी हुई आसान, कई विभागों की NOC की अनिवार्यता खत्म

सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के प्रमुख छात्र संगठनों के बीच इसे लेकर श्रेय लेने की होड़ भी शुरू हो गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली बताया है। संगठन का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव युवाओं में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करते हैं। ABVP ने सरकार से मांग की है कि चुनाव पूरी तरह लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार कराए जाएं ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध रहे।

Also Read:  '75 लाख दो, जेल से बाहर आ जाओ'... कटनी CSP पर हत्या के आरोपी का बड़ा आरोप

दूसरी ओर कांग्रेस और राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) का दावा है कि यह फैसला उनके वर्षों के संघर्ष और लगातार किए गए आंदोलनों का परिणाम है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व NSUI नेता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि छात्रसंघ लोकतंत्र की नर्सरी होते हैं। उनका कहना है कि यदि छात्रसंघ सक्रिय रहते तो विद्यार्थियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे अधिक प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचाए जा सकते थे।

Also Read:  बारिश की कमी होगी दूर! मध्य प्रदेश में फिर एक्टिव हुआ मानसून, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

विवेक त्रिपाठी ने वर्ष 2016-17 के आंदोलन को याद करते हुए बताया कि उस समय छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने के लिए कई अनोखे अभियान चलाए गए थे। उन्होंने बताया कि तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री से मुलाकात नहीं होने पर छात्रों ने फिल्म मुन्नाभाई MBBS से प्रेरित होकर "गेट वेल सून" अभियान शुरू किया था। इस अभियान के तहत बड़ी संख्या में संदेश भेजे गए ताकि सरकार तक छात्रों की मांग पहुंच सके।

जब इसके बाद भी कोई निर्णय नहीं हुआ तो छात्र नेताओं ने मंत्री निवास का घेराव किया। उस दौरान बड़ी संख्या में छात्र नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया था। NSUI का कहना है कि उसी आंदोलन से प्रदेश में छात्र नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार हुई, जिसने लगातार छात्र हितों के मुद्दे उठाए।

भोपाल जिला NSUI अध्यक्ष अक्षय तोमर का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव बंद रहने से विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हुए। उनका मानना है कि कॉलेजों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण छात्र समस्याओं के समाधान में भी कठिनाई आती रही। चुनाव बहाल होने से कॉलेज परिसरों में लोकतांत्रिक वातावरण मजबूत होगा। छात्र अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे और शिक्षा, छात्रवृत्ति, पुस्तकालय, खेल, हॉस्टल तथा अन्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दे अधिक संगठित तरीके से उठाए जा सकेंगे।

हालांकि चुनावों के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। पिछले वर्षों में छात्रसंघ चुनावों के दौरान कई स्थानों पर हिंसा, अनुशासनहीनता और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगते रहे हैं। इसी कारण विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमबद्ध होनी चाहिए।

ABVP ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने की मांग की है। इन सिफारिशों में उम्मीदवारों की आयु सीमा, खर्च की सीमा, शैक्षणिक योग्यता और चुनाव प्रचार के नियम स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं। यदि इनका पालन किया जाता है तो चुनाव अधिक शांतिपूर्ण और निष्पक्ष हो सकते हैं।

सरकार की ओर से अभी विस्तृत चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है, लेकिन सितंबर में चुनाव कराने के आश्वासन के बाद उच्च शिक्षा विभाग तैयारियों में जुट सकता है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को भी चुनाव प्रक्रिया के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए जाने की संभावना है।

Recommended for You

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
05 Aug 2026 By Vaishnavi.J

9 साल बाद मध्य प्रदेश में लौटेगा छात्रसंघ चुनाव का दौर

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में लगभग नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद छात्रसंघ चुनावों की वापसी का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र राजनीति को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। छात्र संगठनों से लेकर राजनीतिक दलों तक इस फैसले का स्वागत किया जा रहा है, वहीं इसके राजनीतिक और लोकतांत्रिक महत्व पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से प्रदेश में बंद थे। इस दौरान कई छात्र संगठनों ने लगातार चुनाव बहाल करने की मांग उठाई। हाल ही में जबलपुर निवासी छात्र अदनान अंसारी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा। इसके बाद सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस आश्वासन के बाद चुनाव कराने की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं।

छात्रसंघ चुनाव केवल कॉलेजों में प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं माने जाते, बल्कि इन्हें लोकतंत्र की पहली पाठशाला भी कहा जाता है। यहीं से अनेक छात्र भविष्य में सामाजिक और राजनीतिक नेतृत्व की ओर बढ़ते हैं। मध्य प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी छात्र राजनीति से निकलकर प्रदेश के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक पहुंचे हैं। उनके अलावा कई वरिष्ठ नेता छात्रसंघ चुनावों के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हुए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्रसंघ चुनाव युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझने, नेतृत्व विकसित करने और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर देते हैं। चुनावों के माध्यम से छात्र अपनी समस्याओं को संगठित रूप से उठाने और कॉलेज प्रशासन व सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने में सक्षम होते हैं।

सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के प्रमुख छात्र संगठनों के बीच इसे लेकर श्रेय लेने की होड़ भी शुरू हो गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली बताया है। संगठन का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव युवाओं में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करते हैं। ABVP ने सरकार से मांग की है कि चुनाव पूरी तरह लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार कराए जाएं ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध रहे।

दूसरी ओर कांग्रेस और राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) का दावा है कि यह फैसला उनके वर्षों के संघर्ष और लगातार किए गए आंदोलनों का परिणाम है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व NSUI नेता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि छात्रसंघ लोकतंत्र की नर्सरी होते हैं। उनका कहना है कि यदि छात्रसंघ सक्रिय रहते तो विद्यार्थियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे अधिक प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचाए जा सकते थे।

विवेक त्रिपाठी ने वर्ष 2016-17 के आंदोलन को याद करते हुए बताया कि उस समय छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने के लिए कई अनोखे अभियान चलाए गए थे। उन्होंने बताया कि तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री से मुलाकात नहीं होने पर छात्रों ने फिल्म मुन्नाभाई MBBS से प्रेरित होकर "गेट वेल सून" अभियान शुरू किया था। इस अभियान के तहत बड़ी संख्या में संदेश भेजे गए ताकि सरकार तक छात्रों की मांग पहुंच सके।

जब इसके बाद भी कोई निर्णय नहीं हुआ तो छात्र नेताओं ने मंत्री निवास का घेराव किया। उस दौरान बड़ी संख्या में छात्र नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया था। NSUI का कहना है कि उसी आंदोलन से प्रदेश में छात्र नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार हुई, जिसने लगातार छात्र हितों के मुद्दे उठाए।

भोपाल जिला NSUI अध्यक्ष अक्षय तोमर का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव बंद रहने से विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हुए। उनका मानना है कि कॉलेजों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण छात्र समस्याओं के समाधान में भी कठिनाई आती रही। चुनाव बहाल होने से कॉलेज परिसरों में लोकतांत्रिक वातावरण मजबूत होगा। छात्र अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे और शिक्षा, छात्रवृत्ति, पुस्तकालय, खेल, हॉस्टल तथा अन्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दे अधिक संगठित तरीके से उठाए जा सकेंगे।

हालांकि चुनावों के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। पिछले वर्षों में छात्रसंघ चुनावों के दौरान कई स्थानों पर हिंसा, अनुशासनहीनता और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगते रहे हैं। इसी कारण विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमबद्ध होनी चाहिए।

ABVP ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने की मांग की है। इन सिफारिशों में उम्मीदवारों की आयु सीमा, खर्च की सीमा, शैक्षणिक योग्यता और चुनाव प्रचार के नियम स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं। यदि इनका पालन किया जाता है तो चुनाव अधिक शांतिपूर्ण और निष्पक्ष हो सकते हैं।

सरकार की ओर से अभी विस्तृत चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है, लेकिन सितंबर में चुनाव कराने के आश्वासन के बाद उच्च शिक्षा विभाग तैयारियों में जुट सकता है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को भी चुनाव प्रक्रिया के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए जाने की संभावना है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/student-union-elections-will-return-in-madhya-pradesh-after-9/article-60758

टाप न्यूज

दिल्ली विधानसभा का छठा मॉनसून सत्र 7 अगस्त से, कड़ी सुरक्षा और डिजिटल व्यवस्था के बीच होगी कार्यवाही

धमकी भरे ई-मेल के बाद विधानसभा परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई, NeVA पोर्टल से पहली बार पूरी तरह पेपरलेस प्रक्रिया...
देश विदेश  टॉप न्यूज़  ब्रेकिंग न्यूज 
दिल्ली विधानसभा का छठा मॉनसून सत्र 7 अगस्त से, कड़ी सुरक्षा और डिजिटल व्यवस्था के बीच होगी कार्यवाही

झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद गरमाया, भूख हड़ताल से सरकार पर बढ़ा दबाव

रांची में अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी, केंद्रीय एजेंसियों से जांच और कथित पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष पड़ताल की मांग; कई...
देश विदेश  टॉप न्यूज़ 
झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद गरमाया, भूख हड़ताल से सरकार पर बढ़ा दबाव

पीएम मोदी का वीडियो हटाना मेटा को पड़ा भारी, संसद ने जुकरबर्ग से मांगी माफी

संसदीय समिति ने वीडियो हटाने को लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल बताया, तकनीकी गड़बड़ी की दलील पर जताई नाराजगी; जवाबदेही तय...
देश विदेश  टॉप न्यूज़ 
पीएम मोदी का वीडियो हटाना मेटा को पड़ा भारी, संसद ने जुकरबर्ग से मांगी माफी

52वें जन्मदिन पर जानिए काजोल की जिंदगी के अनसुने किस्से, सुपरस्टार बनने तक का शानदार सफर

शरारती बचपन, यादगार फिल्में, अजय देवगन से प्रेम कहानी और शाहरुख-करण संग गहरी दोस्ती ने बनाया काजोल को बॉलीवुड की...
बालीवुड 
52वें जन्मदिन पर जानिए काजोल की जिंदगी के अनसुने किस्से, सुपरस्टार बनने तक का शानदार सफर

बिजनेस

बीएचईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने कंपनी की 62वीं वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों को संबोधित किया बीएचईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने कंपनी की 62वीं वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों को संबोधित किया
बीएचईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, श्री के. सदाशिव मूर्ति ने आज कंपनी के निदेशक मंडल की उपस्थिति में कंपनी...
डिसेंट्रलाइज्ड सेंट्रलाइज्ड फाइनेंस का नियमन: तेजी से बढ़ते VDA इकोसिस्टम में कमियों को दूर करने की जरूरत
बिना थर्ड पार्टी बीमा वाले वाहनों पर सख्ती की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और IRDA को दिए बड़े निर्देश
RBI MPC Meeting 2026: क्या बदलेगी ब्याज दर? आज 10 बजे गवर्नर करेंगे बड़ा ऐलान, रेपो रेट 5.25% पर रहने की उम्मीद
एक्सपोनेंशियल रियल एस्टेट वर्ल्ड की 9वीं फिजिकल मीट सफलतापूर्वक संपन्न: सस्टेनेबल डिज़ाइन, सहयोग और नई पीढ़ी के नवोन्मेषकों पर रहा मुख्य ज़ोर
Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.