भोपाल के बड़े तालाब की फिर तय होगी सीमा, ड्रोन-सैटेलाइट से होगा वैज्ञानिक सर्वे: 347 अतिक्रमण पहले ही चिन्हित

Digital Desk

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एनजीटी के निर्देश के बाद बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL), जलभराव क्षेत्र और सीमा का नए सिरे से वैज्ञानिक सर्वे कराया जाएगा। ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, जियो-टैगिंग और ग्राउंड ट्रुथिंग से वास्तविक स्थिति का आकलन होगा।

राजधानी भोपाल की पहचान और शहर की जल व्यवस्था की अहम कड़ी बड़े तालाब की सीमा अब नए सिरे से तय की जाएगी। बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया और वास्तविक जलभराव क्षेत्र को स्पष्ट करने के लिए प्रशासन आधुनिक तकनीक की मदद लेगा। इसके तहत ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, जियो-टैगिंग और ग्राउंड ट्रुथिंग के जरिए जमीन पर मौजूद स्थिति का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। यह कदम राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के बाद उठाया जा रहा है। 

इस सर्वे का सबसे अहम उद्देश्य तालाब की Full Tank Level (FTL) सीमा और उससे जुड़े क्षेत्र को स्पष्ट करना है। मौजूदा समय में तालाब लगभग फुल टैंक लेवल के करीब है। ऐसे में जलभराव की वास्तविक स्थिति का आकलन कर यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि तालाब की प्राकृतिक सीमा कहां तक है।

15 दिन में रिपोर्ट की तैयारी

NGT के निर्देश के अनुसार बड़े तालाब की वास्तविक सीमा का वैज्ञानिक सर्वे कर 15 दिन के भीतर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सर्वे में केवल पुराने नक्शों या राजस्व रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक तकनीकी आंकड़ों और मौके की स्थिति का मिलान किया जाएगा।

ड्रोन और सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों को जियो-टैगिंग तथा ग्राउंड ट्रुथिंग के जरिए सत्यापित किया जाएगा। इससे जलभराव क्षेत्र, FTL सीमा और आसपास मौजूद निर्माण या अन्य गतिविधियों की स्थिति को अधिक स्पष्ट तरीके से दर्ज किया जा सकेगा।

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347 अतिक्रमण पहले ही चिह्नित

बड़े तालाब और भोज वेटलैंड से जुड़े क्षेत्रों में अतिक्रमण का मुद्दा लंबे समय से प्रशासन और NGT के सामने है। उपलब्ध ताजा जानकारी के मुताबिक मार्च से जून के बीच हुए सीमांकन में 347 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। नई वैज्ञानिक सीमा तय होने के बाद यह संख्या बढ़ भी सकती है। 

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इससे पहले अलग-अलग सर्वे में भी FTL के आसपास अतिक्रमण सामने आए हैं। जुलाई में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार भोज वेटलैंड के 50 मीटर FTL क्षेत्र में सात गांवों में 117 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। इनमें से कुछ पर कार्रवाई हो चुकी थी, जबकि कई मामले लंबित बताए गए थे। 

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छह सर्वे के बाद फिर सीमांकन

बड़े तालाब की सीमा तय करने के लिए पहले भी कई बार सर्वे और सीमांकन हो चुके हैं। इसके बावजूद अंतिम और निर्विवाद सीमा को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। अगस्त के अंत की रिपोर्ट में इसे करीब तीन दशक में सातवीं बार होने वाली सीमांकन प्रक्रिया के रूप में बताया गया था। इस बार तकनीकी सर्वे के जरिए सीमा को ज्यादा सटीक बनाने पर जोर है। 

इस प्रक्रिया का असर उन निर्माणों और गतिविधियों पर भी पड़ सकता है, जो नई सीमा के भीतर पाए जाते हैं। प्रशासन के लिए चुनौती केवल सीमा तय करना नहीं, बल्कि सीमांकन के बाद सामने आने वाले अतिक्रमणों पर नियमानुसार कार्रवाई करना भी होगी।

तालाब की सीमा तय होने के बाद क्या?

नए सर्वे से बड़े तालाब के FTL, जल-विस्तार और कैचमेंट क्षेत्र की स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसके बाद चिह्नित अतिक्रमणों और निर्माणों की स्थिति का परीक्षण किया जा सकता है।

वहीं, बारिश और जलभराव के दौरान तालाब की वास्तविक प्राकृतिक सीमा को समझना पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। NGT की कार्रवाई का व्यापक उद्देश्य भोपाल के जलस्रोतों और वेटलैंड क्षेत्रों को अतिक्रमण तथा अनियंत्रित निर्माण से बचाना है। 

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