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रीवा SGMH में डॉग बाइट मरीज को एंटी-स्नेक वेनम देने का आरोप, CM हेल्पलाइन पहुंची शिकायत
Digital Desk
रीवा SGMH में डॉग बाइट मरीज को एंटी-स्नेक वेनम देने का आरोप लगा है। शिकायत CM हेल्पलाइन तक पहुंची, मामले की जांच और रिकॉर्ड पर नजर।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में 18 वर्षीय युवक के डॉग बाइट के इलाज को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि कुत्ते के काटने के बाद उसे सांप के काटने में इस्तेमाल होने वाला एंटी-स्नेक वेनम दिया गया। मामले को लेकर शिकायत की गई है, जबकि उपलब्ध रिपोर्टों में आरोपों की पुष्टि को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल (SGMH) में इलाज को लेकर एक मामला सामने आया है, जिसमें 18 वर्षीय युवक ने आरोप लगाया है कि कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल में उसे डॉग बाइट के लिए दिए जाने वाले उपचार के बजाय एंटी-स्नेक वेनम लगाया गया। मामले की जानकारी सामने आने के बाद शिकायत किए जाने की बात कही गई है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार मामला CM हेल्पलाइन तक भी पहुंचा है।
OPD पर्ची में क्या दर्ज होने का दावा?
मामले से जुड़ी रिपोर्टों में एक OPD पर्ची का हवाला दिया गया है, जिसमें “H/O U/K Snake Bite” यानी अज्ञात/अनजान सांप के काटने का इतिहास दर्ज होने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, मरीज पक्ष का कहना है कि उसे कुत्ते ने काटा था और वह इसी शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचा था। इसी अंतर को लेकर इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि अस्पताल के डॉक्टर या स्टाफ की चिकित्सा लापरवाही जांच में साबित हो चुकी है।
सोशल मीडिया पर मामला वायरल
मामले से जुड़ी पोस्ट और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुए, जिनमें दावा किया गया कि डॉग बाइट के मरीज को एंटी-स्नेक वेनम दिया गया। कुछ रिपोर्टों ने भी मरीज के आरोप के आधार पर इस घटनाक्रम को प्रकाशित किया है। हालांकि, दूसरी ओर कुछ स्थानीय रिपोर्टों में बाद में इस दावे पर सवाल उठाए गए हैं और इसे लेकर अलग तथ्य सामने आने की बात कही गई है। इसलिए वायरल दावों को अंतिम तथ्य मानने के बजाय अस्पताल के आधिकारिक स्पष्टीकरण और जांच के निष्कर्ष का इंतजार जरूरी है।
शिकायत के बाद जांच पर नजर
मरीज पक्ष की ओर से शिकायत किए जाने के बाद अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में मरीज की प्रारंभिक शिकायत क्या दर्ज थी, डॉक्टर ने कौन-सा उपचार लिखा और वास्तव में कौन-सी दवा या इंजेक्शन दिया गया। यदि रिकॉर्ड में डॉग बाइट दर्ज होने के बावजूद अलग उपचार दिए जाने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय करने का सवाल उठ सकता है। वहीं, यदि मेडिकल रिकॉर्ड में सांप के काटने का संदेह दर्ज था और उसी आधार पर उपचार हुआ, तो पूरे मामले का आकलन अलग तरीके से करना होगा।
SGMH में पहले भी उठते रहे हैं सवाल
रीवा का संजय गांधी अस्पताल विंध्य क्षेत्र के बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इलाज, मेडिकल रिकॉर्ड और मरीजों को दी जाने वाली दवाओं से जुड़े किसी भी विवाद का असर अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों के भरोसे पर पड़ता है। इस मामले में फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि आरोप और प्रमाण के बीच अंतर स्पष्ट किया जाए। अस्पताल की ओर से यदि कोई आधिकारिक जांच या स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मरीज को वास्तव में कौन-सा उपचार दिया गया और किस चिकित्सकीय आधार पर दिया गया।
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