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रीवा में 10 साल बाद बाढ़ का कहर, 24 घंटे में 187 मिमी बारिश: 150 से ज्यादा गांव प्रभावित
Digital Desk
रीवा में 24 घंटे में 187 मिमी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बने। 150 से ज्यादा गांव प्रभावित और 2,200 से अधिक लोग राहत शिविरों में पहुंचे।
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में भारी बारिश ने एक बार फिर बाढ़ का संकट खड़ा कर दिया। जिले में 24 घंटे के भीतर 187 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिसके बाद कई नदियां और नाले उफान पर आ गए। निचले इलाकों में पानी भरने और संपर्क मार्ग प्रभावित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 150 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं और प्रशासन ने 2,200 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर राहत शिविरों में ठहराया है।
एक दशक बाद फिर बिगड़े हालात
रीवा में हुई बारिश की तीव्रता को लेकर स्थानीय रिपोर्टों में इसे करीब एक दशक बाद ऐसी गंभीर स्थिति बताया गया है। लगातार बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों के साथ शहर की निचली बस्तियों में भी जलभराव की स्थिति बनी। कई स्थानों पर सड़क और दूसरे संपर्क मार्ग प्रभावित हुए, जिससे राहत एवं बचाव दलों के सामने चुनौती बढ़ी।
नदियां उफान पर, गांवों का संपर्क प्रभावित
बारिश के बाद टमस, बीहर और बेलन सहित क्षेत्र की प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ा। कुछ इलाकों में नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने की रिपोर्ट सामने आई। हरिभूमि की रिपोर्ट के मुताबिक 50 गांवों का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ और 136 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया था।
दूसरी रिपोर्टों में प्रभावित गांवों की संख्या 150 से अधिक बताई गई है। आंकड़ों में अंतर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन के ताजा बुलेटिन को अंतिम संदर्भ माना जाना चाहिए।
2,200 से ज्यादा लोग राहत शिविरों में
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर बनाए। रिपोर्टों के अनुसार 2,200 से अधिक लोगों को 27 राहत शिविरों में पहुंचाया गया। शिविरों में भोजन, पेयजल और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। कुछ रिपोर्टों में इससे अलग संख्या में लोगों के रेस्क्यू का उल्लेख है। इसलिए “राहत शिविरों में पहुंचे लोगों” और “कुल रेस्क्यू किए गए लोगों” के आंकड़ों को एक ही नहीं माना जाना चाहिए।
जलाशयों से पानी छोड़े जाने से बढ़ी चुनौती
लगातार बारिश के बीच कई जलाशयों और बैराजों से पानी छोड़े जाने की जानकारी भी सामने आई। एक रिपोर्ट के अनुसार बीहर नदी के सभी 18 गेट, बकिया बराज के 14 और मेजा बांध के पांच गेट खोले गए थे। इससे निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की स्थिति बनी।
प्रशासन और राहत टीमों की निगरानी
प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रहीं। निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ नुकसान का आकलन भी किया गया। मौसम विभाग के रीवा पेज पर सितंबर में भी कुछ दिनों के लिए गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना दर्ज की गई है, हालांकि यह अगस्त की बाढ़ की स्थिति से अलग बाद का मौसम अपडेट है।
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