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कल्पना मिश्रा मौत मामला: रीवा से भोपाल तक बढ़ा विरोध, अभय मिश्रा ने वल्लभ भवन के सामने शुरू किया मौन धरना
Digital Desk
रीवा SGMH में कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत मामले में अभय मिश्रा ने भोपाल में मौन धरना शुरू किया। FIR और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग।
रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत को लेकर चल रहा विरोध अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गया है। सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने वल्लभ भवन स्थित मंत्रालय के सामने मौन धरना शुरू किया है। उनकी प्रमुख मांगों में मामले में जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ FIR और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग शामिल है।
यह मामला उस समय राजनीतिक रूप से और गरमा गया जब रीवा में परिवार और कांग्रेस के विरोध के बाद सरकार की ओर से अस्पताल की व्यवस्था और घटना की प्रारंभिक जांच कराई गई। रिपोर्टों के मुताबिक कार्रवाई के तहत दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग कर्मचारियों को निलंबित किया गया। हालांकि, मौत के लिए किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय होना अभी जांच और कानूनी प्रक्रिया का विषय है।
रीवा में मौत के बाद उठे सवाल
रिपोर्टों के अनुसार 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा को रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका ऑपरेशन हुआ, लेकिन बाद में उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। नवजात की भी जान नहीं बच सकी। परिजनों ने इलाज और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि समय पर पर्याप्त चिकित्सकीय सहायता नहीं मिली। इन्हीं आरोपों के बाद मामले ने तूल पकड़ा। उपलब्ध रिपोर्टों में अस्पताल प्रशासन की भूमिका और इलाज की प्रक्रिया को लेकर जांच का उल्लेख है।
दो डॉक्टर और दो नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई
मामले की प्रारंभिक जांच के बाद दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग कर्मचारियों के निलंबन की जानकारी सामने आई है। यह कार्रवाई फिलहाल प्रशासनिक स्तर की है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संबंधित कर्मचारियों की आपराधिक जिम्मेदारी भी तय हो चुकी है। अब कांग्रेस की मांग है कि पूरे मामले में FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदारी तय की जाए।
अभय मिश्रा ने उठाई FIR की मांग
सेमरिया विधायक अभय मिश्रा ने मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और इलाज की व्यवस्था को लेकर गंभीर जवाबदेही तय होनी चाहिए। भोपाल में मौन धरने के जरिए विधायक ने इस मुद्दे को सीधे राज्य सरकार के केंद्र तक पहुंचाने की कोशिश की है।
विरोध अब रीवा से राजधानी तक
यह विवाद केवल विधानसभा या राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। 8 सितंबर को रीवा में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने उपमुख्यमंत्री के आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इससे संकेत मिलता है कि कल्पना मिश्रा मामले को लेकर विपक्ष का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है।
अस्पताल अधीक्षक भी हटाए गए
इससे पहले संजय गांधी अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाया गया था। उनके स्थान पर डॉ. प्रियंक शर्मा को अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई। यह कार्रवाई उस विवाद के बाद हुई जिसमें कल्पना मिश्रा के परिवार से बातचीत का एक वीडियो सामने आया था। डॉ. राहुल मिश्रा ने चिकित्सा लापरवाही के आरोपों से इनकार किया था और अपनी टिप्पणी को लेकर माफी मांगी थी।
अब जांच के निष्कर्ष पर नजर
मामले में सबसे अहम सवाल अब यह है कि कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के पीछे चिकित्सकीय कारण क्या थे और क्या इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही हुई। इन सवालों का अंतिम उत्तर जांच रिपोर्ट और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आएगा।
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