रीवा के संजय गांधी अस्पताल में एक्सपायर दवा का आरोप, जांच शुरू

रीवा,(म.प्र.)

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आईसीयू में भर्ती मरीज के परिजनों ने उठाए सवाल, अस्पताल अधीक्षक बोले- शिकायत गंभीर, दोषियों पर होगी कार्रवाई

रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में मरीजों को एक्सपायर दवा और इंजेक्शन दिए जाने के आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। मामला उस समय उजागर हुआ जब अस्पताल के आईसीयू में भर्ती एक मरीज के परिजनों ने दावा किया कि उनके परिजन को उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी दवा दी गई। शिकायत सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। हालांकि अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ऐसी दवाओं से मरीज की जान को तत्काल कोई खतरा नहीं होता, फिर भी पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। विवेक त्रिपाठी ने अस्पताल प्रबंधन और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके पिता अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती हैं। उनका कहना है कि 18 जून को इलाज के दौरान जो दवा और इंजेक्शन दिए गए, उनकी एक्सपायरी डेट समाप्त हो चुकी थी। परिजनों ने दवा के पैकेट और इंजेक्शन की तस्वीरें भी साझा की हैं। तस्वीरें सामने आने के बाद मरीजों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ गई है। मामले के सार्वजनिक होते ही अस्पताल प्रशासन सक्रिय हो गया। संबंधित विभाग से जानकारी मांगी गई और दवाओं के स्टॉक की जांच शुरू की गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अस्पताल में दवाओं की वैधता और गुणवत्ता की नियमित निगरानी बेहद जरूरी होती है। यदि एक्सपायर दवाओं के उपयोग की पुष्टि होती है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।

शिकायत केवल एक्सपायर दवाओं तक सीमित नहीं है। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इलाज के लिए शुल्क लिया जाता है, लेकिन सुविधाएं अपेक्षित स्तर की नहीं हैं। कई मरीजों के परिजनों का कहना है कि उन्हें दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं क्योंकि अस्पताल में जरूरी दवाओं का स्टॉक उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि पैनटॉप इंजेक्शन सहित कई आवश्यक दवाइयों की कमी बनी हुई है। दिल के मरीजों को दी जाने वाली कुछ दवाएं भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते मरीजों के परिजनों को मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। अस्पताल की एक अन्य बड़ी समस्या वार्ड ब्वाय और सहायक स्टाफ की कमी को लेकर सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर से लेकर वार्ड तक मरीजों को ले जाने की जिम्मेदारी भी कई बार परिवार के सदस्यों को ही निभानी पड़ती है। हाल ही में कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती मरीजों के परिजन खुद स्ट्रेचर धकेलते दिखाई दिए। यही स्थिति न्यूरो और अन्य विभागों में भी देखने को मिली।

हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में 51 वार्ड ब्वाय तैनात होने की जानकारी दी जाती है, लेकिन मरीजों और परिजनों का कहना है कि जरूरत के समय वे दिखाई नहीं देते। कई लोगों का आरोप है कि वार्ड ब्वाय का उपयोग अन्य कार्यों में किया जा रहा है, जबकि मरीजों की मूलभूत जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी। अस्पताल की स्थापना का उद्देश्य रीवा और आसपास के जिलों के मरीजों को बड़े शहरों में जाने से राहत देना था। लेकिन हाल के आरोपों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एक्सपायर दवा देने की शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। इस बीच मरीजों और उनके परिजनों की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।

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19 Jun 2026 By Vaishnavi.J

रीवा के संजय गांधी अस्पताल में एक्सपायर दवा का आरोप, जांच शुरू

रीवा,(म.प्र.)

रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में मरीजों को एक्सपायर दवा और इंजेक्शन दिए जाने के आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। मामला उस समय उजागर हुआ जब अस्पताल के आईसीयू में भर्ती एक मरीज के परिजनों ने दावा किया कि उनके परिजन को उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी दवा दी गई। शिकायत सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। हालांकि अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ऐसी दवाओं से मरीज की जान को तत्काल कोई खतरा नहीं होता, फिर भी पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। विवेक त्रिपाठी ने अस्पताल प्रबंधन और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके पिता अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती हैं। उनका कहना है कि 18 जून को इलाज के दौरान जो दवा और इंजेक्शन दिए गए, उनकी एक्सपायरी डेट समाप्त हो चुकी थी। परिजनों ने दवा के पैकेट और इंजेक्शन की तस्वीरें भी साझा की हैं। तस्वीरें सामने आने के बाद मरीजों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ गई है। मामले के सार्वजनिक होते ही अस्पताल प्रशासन सक्रिय हो गया। संबंधित विभाग से जानकारी मांगी गई और दवाओं के स्टॉक की जांच शुरू की गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अस्पताल में दवाओं की वैधता और गुणवत्ता की नियमित निगरानी बेहद जरूरी होती है। यदि एक्सपायर दवाओं के उपयोग की पुष्टि होती है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।

शिकायत केवल एक्सपायर दवाओं तक सीमित नहीं है। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इलाज के लिए शुल्क लिया जाता है, लेकिन सुविधाएं अपेक्षित स्तर की नहीं हैं। कई मरीजों के परिजनों का कहना है कि उन्हें दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं क्योंकि अस्पताल में जरूरी दवाओं का स्टॉक उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि पैनटॉप इंजेक्शन सहित कई आवश्यक दवाइयों की कमी बनी हुई है। दिल के मरीजों को दी जाने वाली कुछ दवाएं भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते मरीजों के परिजनों को मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। अस्पताल की एक अन्य बड़ी समस्या वार्ड ब्वाय और सहायक स्टाफ की कमी को लेकर सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर से लेकर वार्ड तक मरीजों को ले जाने की जिम्मेदारी भी कई बार परिवार के सदस्यों को ही निभानी पड़ती है। हाल ही में कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती मरीजों के परिजन खुद स्ट्रेचर धकेलते दिखाई दिए। यही स्थिति न्यूरो और अन्य विभागों में भी देखने को मिली।

हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में 51 वार्ड ब्वाय तैनात होने की जानकारी दी जाती है, लेकिन मरीजों और परिजनों का कहना है कि जरूरत के समय वे दिखाई नहीं देते। कई लोगों का आरोप है कि वार्ड ब्वाय का उपयोग अन्य कार्यों में किया जा रहा है, जबकि मरीजों की मूलभूत जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी। अस्पताल की स्थापना का उद्देश्य रीवा और आसपास के जिलों के मरीजों को बड़े शहरों में जाने से राहत देना था। लेकिन हाल के आरोपों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एक्सपायर दवा देने की शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। इस बीच मरीजों और उनके परिजनों की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/investigation-started-into-allegations-of-expired-medicine-in-rewas-sanjay/article-56381

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