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तीन मासूम बच्चियों से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद, पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई मरते दम तक जेल की सजा
रीवा,(म.प्र.)
रीवा के डभौरा थाना क्षेत्र के 2024 के चर्चित मामले में आया फैसला, 7 वर्षीय बच्ची समेत तीन मासूमों से दुष्कर्म का दोषी करार; 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया
रीवा जिले के डभौरा थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में सामने आए तीन मासूम बच्चियों से दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में त्योंथर स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को मरते दम तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी मंग्लेश्वर केसरवानी (40) को उम्रकैद के साथ 5 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर सख्त संदेश देने वाला माना जा रहा है।
यह मामला उस समय सामने आया था, जब डभौरा थाना क्षेत्र में रहने वाली सात वर्षीय मासूम बच्ची अपने पड़ोस में खेलने गई थी। आरोप है कि इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले आरोपी ने बच्ची को अकेला पाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद बच्ची के व्यवहार में आए बदलाव और परिजनों को मिली जानकारी के आधार पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद परिजनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। विवेचना के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी ने केवल एक बच्ची ही नहीं, बल्कि पड़ोस में रहने वाली दो अन्य सगी मासूम बच्चियों के साथ भी इसी तरह की वारदात को अंजाम दिया था। तीनों घटनाओं के सामने आने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया था।
डभौरा थाना पुलिस ने तत्काल आरोपी को हिरासत में लेकर विस्तृत जांच शुरू की। मामले की विवेचना उप निरीक्षक ऋषभ सिंह बघेल ने की। जांच के दौरान पीड़ित बच्चियों के बयान, चिकित्सीय परीक्षण, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण प्रमाण एकत्र किए गए। सभी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
मामले की सुनवाई त्योंथर स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक धीरज सिंह ने अदालत में मजबूत पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष उपलब्ध सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और जांच रिपोर्ट को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। अभियोजन की दलीलों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया। इसी मामले से जुड़े दो अन्य मामलों में न्यायालय ने दो दिन पहले ही आरोपी को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं तीसरे और सबसे गंभीर मामले में न्यायालय ने अपराध की प्रकृति, पीड़ित बच्चियों की कम उम्र और आरोपी के कृत्य को अत्यंत जघन्य मानते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को मरते दम तक जेल में रहना होगा। इसके साथ ही उस पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
इस फैसले के बाद पीड़ित परिवारों ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया। उनका कहना है कि लंबे समय से वे न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे और अदालत के फैसले से उन्हें संतोष मिला है। स्थानीय लोगों ने भी इस निर्णय को समाज के लिए सकारात्मक संदेश बताया और कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के साथ इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस अधिकारियों ने भी इस फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में त्वरित जांच और प्रभावी पैरवी बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में समयबद्ध कार्रवाई से पीड़ित परिवारों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होता है और अपराधियों में कानून का भय पैदा होता है।
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तीन मासूम बच्चियों से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद, पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई मरते दम तक जेल की सजा
रीवा,(म.प्र.)
रीवा जिले के डभौरा थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में सामने आए तीन मासूम बच्चियों से दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में त्योंथर स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को मरते दम तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी मंग्लेश्वर केसरवानी (40) को उम्रकैद के साथ 5 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर सख्त संदेश देने वाला माना जा रहा है।
यह मामला उस समय सामने आया था, जब डभौरा थाना क्षेत्र में रहने वाली सात वर्षीय मासूम बच्ची अपने पड़ोस में खेलने गई थी। आरोप है कि इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले आरोपी ने बच्ची को अकेला पाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद बच्ची के व्यवहार में आए बदलाव और परिजनों को मिली जानकारी के आधार पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद परिजनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। विवेचना के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी ने केवल एक बच्ची ही नहीं, बल्कि पड़ोस में रहने वाली दो अन्य सगी मासूम बच्चियों के साथ भी इसी तरह की वारदात को अंजाम दिया था। तीनों घटनाओं के सामने आने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया था।
डभौरा थाना पुलिस ने तत्काल आरोपी को हिरासत में लेकर विस्तृत जांच शुरू की। मामले की विवेचना उप निरीक्षक ऋषभ सिंह बघेल ने की। जांच के दौरान पीड़ित बच्चियों के बयान, चिकित्सीय परीक्षण, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण प्रमाण एकत्र किए गए। सभी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
मामले की सुनवाई त्योंथर स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक धीरज सिंह ने अदालत में मजबूत पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष उपलब्ध सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और जांच रिपोर्ट को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। अभियोजन की दलीलों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया। इसी मामले से जुड़े दो अन्य मामलों में न्यायालय ने दो दिन पहले ही आरोपी को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं तीसरे और सबसे गंभीर मामले में न्यायालय ने अपराध की प्रकृति, पीड़ित बच्चियों की कम उम्र और आरोपी के कृत्य को अत्यंत जघन्य मानते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को मरते दम तक जेल में रहना होगा। इसके साथ ही उस पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
इस फैसले के बाद पीड़ित परिवारों ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया। उनका कहना है कि लंबे समय से वे न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे और अदालत के फैसले से उन्हें संतोष मिला है। स्थानीय लोगों ने भी इस निर्णय को समाज के लिए सकारात्मक संदेश बताया और कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के साथ इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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