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सिंगापुर में बनेगा नया हिंदू मंदिर, सरकार ने दी जमीन, जानें कौन से देवता विराजेंगे
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क
सिंगापुर हिंदू मंदिर के लिए सरकार ने यिशुन में जमीन दी। SGAT मंदिर निर्माण की तैयारी शुरू, अगस्त-सितंबर से काम शुरू होने की संभावना।
सिंगापुर सरकार ने हिंदू समुदाय की धार्मिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक नए सिंगापुर हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए यिशुन एवेन्यू 3 इलाके में जमीन आवंटित की है। यह मंदिर श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर (SGAT) के नाम से विकसित किया जाएगा, जिसे देश का 25वां हिंदू मंदिर माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सिंगापुर हिंदू मंदिर का निर्माण कार्य अगस्त या सितंबर 2026 तक शुरू होने की संभावना है। यह परियोजना विशेष रूप से केरल मूल के भक्तों और सबरीमला तथा गुरुवायूर परंपरा से जुड़े श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। सरकार और हिंदू सलाहकार बोर्ड के बीच विस्तृत चर्चा के बाद इस जमीन को अंतिम रूप दिया गया है। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है।
मंदिर का स्वरूप और योजना
इस सिंगापुर हिंदू मंदिर का नाम श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर रखा गया है, जिसमें भगवान गुरुवायूरप्पन (श्रीकृष्ण का स्वरूप) और भगवान अय्यप्पा की मुख्य रूप से पूजा की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह मंदिर यिशुन क्षेत्र में बसे भारतीय समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सिंगापुर हिंदू मंदिर में पारंपरिक गोपुरम शैली के बजाय केरल शैली की वास्तुकला अपनाई जाएगी, जिससे प्राकृतिक वेंटिलेशन और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन को बढ़ावा मिलेगा।
मलयाली समुदाय की मांग
यह सिंगापुर हिंदू मंदिर विशेष रूप से मलयाली समुदाय की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है। गृह मंत्री के. शणमुगम के अनुसार, केवल मलयाली ही नहीं बल्कि तमिल, उत्तर भारतीय और अन्य हिंदू समुदाय भी इन देवताओं के भक्त हैं। सिंगापुर हिंदू मंदिर परियोजना को सबरीमला यात्रा से जोड़कर भी देखा जा रहा है, क्योंकि यह श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक तैयारी का प्रारंभिक केंद्र बन सकता है। खासतौर पर बुजुर्ग भक्तों को इससे बड़ी सुविधा मिलेगी।
डिजाइन और सामाजिक महत्व
इस सिंगापुर हिंदू मंदिर की डिजाइन को पारंपरिक और आधुनिक सोच का मिश्रण बताया जा रहा है। इसमें ‘सामंजस्य वृत्त’ की अवधारणा को शामिल किया जाएगा, ताकि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ और संवाद को बढ़ावा मिले।
इसके साथ ही मंदिर परिसर में मल्टी-पर्पस हॉल और सामुदायिक गतिविधियों के लिए अलग भवन भी बनाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, सिंगापुर हिंदू मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक एकता का केंद्र भी होगा।
आधिकारिक बयान और आंकड़े
संस्कृति, समुदाय और युवा मामलों के राज्य मंत्री दिनेश वासु दास ने कहा कि उत्तरी सिंगापुर में भारतीय मूल के लोगों की संख्या अधिक है, इसलिए यह सिंगापुर हिंदू मंदिर स्थानीय समुदाय की जरूरतों को पूरा करेगा।
करीब 60 लाख की आबादी वाले सिंगापुर में भारतीय मूल के लोग लगभग 7 प्रतिशत हैं, जबकि चीनी समुदाय 75 प्रतिशत और मलय समुदाय 15 प्रतिशत है। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर धार्मिक विविधता को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
आगे की दिशा
रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्माण कार्य तय समय पर शुरू होने के बाद यह सिंगापुर हिंदू मंदिर आने वाले वर्षों में पूरी तरह विकसित हो जाएगा। यह मंदिर न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र होगा, बल्कि भारत-सिंगापुर सांस्कृतिक संबंधों को भी नई मजबूती देगा। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी भारतीयों की आस्था और सांस्कृतिक पहचान को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
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सिंगापुर में बनेगा नया हिंदू मंदिर, सरकार ने दी जमीन, जानें कौन से देवता विराजेंगे
अंतर्राष्ट्रीय डेस्क
सिंगापुर सरकार ने हिंदू समुदाय की धार्मिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक नए सिंगापुर हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए यिशुन एवेन्यू 3 इलाके में जमीन आवंटित की है। यह मंदिर श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर (SGAT) के नाम से विकसित किया जाएगा, जिसे देश का 25वां हिंदू मंदिर माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सिंगापुर हिंदू मंदिर का निर्माण कार्य अगस्त या सितंबर 2026 तक शुरू होने की संभावना है। यह परियोजना विशेष रूप से केरल मूल के भक्तों और सबरीमला तथा गुरुवायूर परंपरा से जुड़े श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। सरकार और हिंदू सलाहकार बोर्ड के बीच विस्तृत चर्चा के बाद इस जमीन को अंतिम रूप दिया गया है। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है।
मंदिर का स्वरूप और योजना
इस सिंगापुर हिंदू मंदिर का नाम श्री गुरुवायूरप्पन अय्यप्पन मंदिर रखा गया है, जिसमें भगवान गुरुवायूरप्पन (श्रीकृष्ण का स्वरूप) और भगवान अय्यप्पा की मुख्य रूप से पूजा की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह मंदिर यिशुन क्षेत्र में बसे भारतीय समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सिंगापुर हिंदू मंदिर में पारंपरिक गोपुरम शैली के बजाय केरल शैली की वास्तुकला अपनाई जाएगी, जिससे प्राकृतिक वेंटिलेशन और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन को बढ़ावा मिलेगा।
मलयाली समुदाय की मांग
यह सिंगापुर हिंदू मंदिर विशेष रूप से मलयाली समुदाय की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है। गृह मंत्री के. शणमुगम के अनुसार, केवल मलयाली ही नहीं बल्कि तमिल, उत्तर भारतीय और अन्य हिंदू समुदाय भी इन देवताओं के भक्त हैं। सिंगापुर हिंदू मंदिर परियोजना को सबरीमला यात्रा से जोड़कर भी देखा जा रहा है, क्योंकि यह श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक तैयारी का प्रारंभिक केंद्र बन सकता है। खासतौर पर बुजुर्ग भक्तों को इससे बड़ी सुविधा मिलेगी।
डिजाइन और सामाजिक महत्व
इस सिंगापुर हिंदू मंदिर की डिजाइन को पारंपरिक और आधुनिक सोच का मिश्रण बताया जा रहा है। इसमें ‘सामंजस्य वृत्त’ की अवधारणा को शामिल किया जाएगा, ताकि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ और संवाद को बढ़ावा मिले।
इसके साथ ही मंदिर परिसर में मल्टी-पर्पस हॉल और सामुदायिक गतिविधियों के लिए अलग भवन भी बनाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, सिंगापुर हिंदू मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक एकता का केंद्र भी होगा।
आधिकारिक बयान और आंकड़े
संस्कृति, समुदाय और युवा मामलों के राज्य मंत्री दिनेश वासु दास ने कहा कि उत्तरी सिंगापुर में भारतीय मूल के लोगों की संख्या अधिक है, इसलिए यह सिंगापुर हिंदू मंदिर स्थानीय समुदाय की जरूरतों को पूरा करेगा।
करीब 60 लाख की आबादी वाले सिंगापुर में भारतीय मूल के लोग लगभग 7 प्रतिशत हैं, जबकि चीनी समुदाय 75 प्रतिशत और मलय समुदाय 15 प्रतिशत है। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर धार्मिक विविधता को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
आगे की दिशा
रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्माण कार्य तय समय पर शुरू होने के बाद यह सिंगापुर हिंदू मंदिर आने वाले वर्षों में पूरी तरह विकसित हो जाएगा। यह मंदिर न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र होगा, बल्कि भारत-सिंगापुर सांस्कृतिक संबंधों को भी नई मजबूती देगा। यह सिंगापुर हिंदू मंदिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी भारतीयों की आस्था और सांस्कृतिक पहचान को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
