Dark Matter: वैज्ञानिकों को मिला रहस्यमयी कण का संकेत, क्या पहली बार पकड़ा गया डार्क मैटर? LZ प्रयोग से बढ़ी उम्मीद

Digital Desk

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LUX-ZEPLIN प्रयोग में ऐसा एक कण-संबंधी संकेत मिला है, जिसे मौजूदा वैज्ञानिक पृष्ठभूमि प्रक्रियाओं से समझाना मुश्किल है। यह WIMP नामक डार्क मैटर कण का संकेत हो सकता है, लेकिन वैज्ञानिक अभी इसे खोज की पुष्टि नहीं मान रहे हैं।

ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में शामिल डार्क मैटर को लेकर वैज्ञानिकों को एक अहम सुराग मिला है। अमेरिका के साउथ डकोटा में करीब एक मील जमीन के नीचे चल रहे LUX-ZEPLIN (LZ) प्रयोग में एक ऐसा असामान्य कण-संबंधी इवेंट दर्ज किया गया, जिसे ज्ञात पृष्ठभूमि प्रक्रियाओं से समझाना बेहद कठिन है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह संकेत WIMP (Weakly Interacting Massive Particle) नामक संभावित डार्क मैटर कण की वजह से हो सकता है। हालांकि, अभी इसे डार्क मैटर की खोज कहना जल्दबाजी होगी।

85 प्रतिशत पदार्थ का रहस्य

वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक ब्रह्मांड में मौजूद पदार्थ के द्रव्यमान का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर से संबंधित है। इसे सीधे देखा नहीं जा सकता क्योंकि यह सामान्य पदार्थ और प्रकाश के साथ बेहद कमजोर तरीके से संपर्क करता है। इसके अस्तित्व का अनुमान मुख्य रूप से आकाशगंगाओं और बड़े ब्रह्मांडीय ढांचों पर इसके गुरुत्वीय प्रभावों से लगाया गया है।

दशकों से वैज्ञानिक ऐसे कणों की तलाश कर रहे हैं जो डार्क मैटर की प्रकृति को समझा सकें। WIMP इसी दिशा में सबसे लंबे समय से अध्ययन किए जा रहे संभावित उम्मीदवारों में से एक है। 

LZ डिटेक्टर में क्या मिला?

LZ अंतरराष्ट्रीय सहयोग में 250 वैज्ञानिक और इंजीनियर तथा 39 संस्थान शामिल हैं। इसका डिटेक्टर Sanford Underground Research Facility में जमीन के करीब एक मील नीचे स्थापित है। इसमें लगभग 10 टन अत्यंत शुद्ध तरल जेनॉन का इस्तेमाल किया जाता है।

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वैज्ञानिक डार्क मैटर कण और जेनॉन परमाणु के संभावित टकराव से पैदा होने वाले बेहद कमजोर प्रकाश और इलेक्ट्रॉन संकेतों की तलाश करते हैं। भूमिगत चट्टान, पानी की टंकी और अन्य डिटेक्शन प्रणालियां सामान्य कणों से पैदा होने वाले अनचाहे संकेतों को कम करने में मदद करती हैं। 

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नए विश्लेषण में मार्च 2023 से अप्रैल 2024 के बीच एकत्र किए गए 220 दिनों के डेटा की जांच की गई। इस विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने ऐसे WIMP संकेतों की भी तलाश की जो अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा डिटेक्टर में जमा कर सकते हैं।

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इसी प्रक्रिया में एक ऐसा इवेंट मिला जो अपेक्षित पृष्ठभूमि संकेतों से अलग दिखाई दिया।

सिर्फ एक इवेंट, लेकिन वैज्ञानिकों की नजर में खास

Nature की रिपोर्ट के अनुसार, इस असामान्य इवेंट ने डिटेक्टर में करीब 248 keV ऊर्जा जमा की। यदि इसे डार्क मैटर कण की वजह से हुआ इवेंट माना जाए तो संबंधित WIMP का द्रव्यमान कम से कम 200 GeV/c² और संभवतः इससे काफी अधिक हो सकता है। 

LZ के वैज्ञानिकों ने हालांकि बेहद सावधानी बरती है। प्रयोग के प्रवक्ता रिक गैट्सकेल ने स्पष्ट किया कि टीम अभी डार्क मैटर देखने का दावा नहीं कर रही है। वैज्ञानिकों के लिए यह इवेंट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उस क्षेत्र में मिला जहां डार्क मैटर का संकेत मिलने की उम्मीद की जाती है और ज्ञात पृष्ठभूमि अपेक्षाकृत कम है। 

2.6-सिग्मा का क्या मतलब है?

इस परिणाम की सांख्यिकीय significance 2.6 sigma है। वैज्ञानिक खोज के लिए आम तौर पर 5 sigma का स्तर महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए मौजूदा परिणाम खोज की आधिकारिक पुष्टि से काफी दूर है।

सरल शब्दों में कहें तो वैज्ञानिकों के पास अभी इतना डेटा नहीं है कि वे यह तय कर सकें कि यह इवेंट वास्तव में डार्क मैटर से आया था या किसी बेहद दुर्लभ सामान्य पृष्ठभूमि प्रक्रिया का परिणाम था। LZ के अनुसार ज्ञात पृष्ठभूमि से इस तरह का इवेंट मिलने की संभावना लगभग 0.5 प्रतिशत है। 

अब ज्यादा डेटा पर टिकी उम्मीद

वैज्ञानिक अब आगे मिलने वाले डेटा पर नजर रखेंगे। यदि भविष्य में इसी तरह के और संकेत मिलते हैं और उनका सांख्यिकीय महत्व बढ़ता है, तो डार्क मैटर के WIMP मॉडल के पक्ष में मजबूत सबूत मिल सकते हैं। दूसरी ओर, यदि अतिरिक्त डेटा के साथ यह संकेत कमजोर पड़ता है, तो यह किसी दुर्लभ पृष्ठभूमि प्रक्रिया का परिणाम हो सकता है।

LZ पहले ही दुनिया के सबसे बड़े डार्क मैटर डेटासेट में से एक तैयार कर चुका है और प्रयोग आगे भी जारी रहेगा। इसलिए आने वाले डेटा से यह तय करने में मदद मिलेगी कि मौजूदा संकेत एक वास्तविक नई भौतिक घटना की शुरुआत है या वैज्ञानिकों के लिए एक दिलचस्प लेकिन अस्थायी सुराग। 

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