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नेपाल में बाढ़ का कहर: हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में 933 कर्मचारी लापता, सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की जंग तेज
अंतराष्ट्रीय न्यूज
नुवाकोट और रसुवा में तबाही के बाद सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश जारी; नेपाली सेना के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी बचाव अभियान में जुटे
नेपाल में पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार तेज किया जा रहा है। सबसे बड़ी चुनौती हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की हाइड्रोपावर परियोजनाओं से 933 लोग लापता हैं। इनमें से कई लोगों के सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका है। बाढ़ और भूस्खलन से रसुवा और नुवाकोट जिलों में कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। मलबे और चट्टानों के कारण सुरंगों के प्रवेश मार्ग बंद हो गए हैं, जिससे बचाव दल के लिए अंदर पहुंचना मुश्किल बना हुआ है। नेपाली सेना के जवान भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर सुरंगों तक पहुंचने का रास्ता बनाने में जुटे हैं।
नेपाल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बसनेट ने बताया कि सुरंगों के मुहाने पर बड़ी मात्रा में मलबा जमा है और इसे हटाना बचाव अभियान की सबसे बड़ी चुनौती है। सेना का मुख्य ध्यान सुरंगों को खोलने और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने पर है। रसुवा जिले के त्रिशूली-3ए और त्रिशूली-3बी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बचाव अभियान के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। बचाव दल ने एक सुरंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंच बनाने में सफलता हासिल की है। वहां अंदर हवा पहुंचाने के साथ कैमरे के जरिए सुरंग की स्थिति का पता लगाने की कोशिश की गई। हालांकि बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने से अभियान में कई बार रुकावट आई।
933 लापता कर्मचारियों का आंकड़ा हाइड्रोपावर परियोजनाओं से लापता या संपर्क से बाहर हुए लोगों का है। इसे सीधे तौर पर 933 लोगों के सुरंगों में फंसे होने की संख्या नहीं माना जा सकता। अलग-अलग परियोजनाओं से कुछ कर्मचारियों को पहले ही बचाया जा चुका है और कुछ से बाद में संपर्क भी स्थापित हुआ है। 30 अगस्त की रिपोर्टों में हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े सैकड़ों लोगों के अब भी लापता या फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। कुछ परियोजनाओं से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन कई सुरंगों की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है।
नेपाल में बचाव और राहत अभियान में करीब 21 हजार सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। नेपाली सेना, पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल, स्थानीय स्वयंसेवक और अन्य एजेंसियां प्रभावित इलाकों में तलाश और बचाव अभियान चला रही हैं। खराब मौसम, पहाड़ी इलाकों में कठिन पहुंच और लगातार बने बाढ़ के खतरे के बावजूद अभियान जारी है। सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए नेपाल को भारत और चीन के विशेषज्ञों की मदद भी मिल रही है। दोनों देशों के विशेषज्ञ विशेष रूप से सुरंग बचाव जैसे कठिन अभियानों में तकनीकी सहायता दे रहे हैं।
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल में तबाही का दायरा लगातार बढ़ रहा है। सोमवार तक नेपाली अधिकारियों के अनुसार 788 लोगों की मौत हो चुकी थी और करीब 2,500 लोग लापता थे। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की सूचना है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और वैज्ञानिकों के आकलन के अनुसार, यह आपदा हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने से शुरू हुई। चट्टान, बर्फ और पिघले पानी के भारी बहाव ने नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ा दिया, जिसके बाद बाढ़ और मलबे ने सड़क, पुल, घर और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया।
बचाव दल के सामने सिर्फ मलबा ही चुनौती नहीं है। प्रभावित पहाड़ी इलाकों में खराब मौसम और नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण अभियान कई बार रोकना पड़ा है। नेपाल-चीन सीमा के पास आपदा के कारण बनी एक झील के पानी के बहाव को लेकर भी नई बाढ़ का खतरा बना हुआ है। सोमवार को मौसम में कुछ सुधार के बाद रसुवा में बचाव अभियान फिर तेज किया गया। प्रशासन और सुरक्षा बलों का प्राथमिक लक्ष्य सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना, प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालना और बाढ़ के बाद कटे हुए संपर्क मार्गों को बहाल करना है।
नुवाकोट के देवघाट और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कई घर और सड़कें मलबे में दब गई हैं तथा बड़ी संख्या में परिवारों को अपने घरों से निकलना पड़ा है। स्थानीय लोग अब मलबे के बीच अपने जरूरी सामान और दस्तावेज तलाश रहे हैं। नेपाल में फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालना है। राहत दल लगातार मलबा हटाने और बंद रास्तों को खोलने में जुटे हैं, जबकि मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां अभियान की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं।
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