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कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, फ्यूल टैंक में लगी आग; मिडिल ईस्ट में युद्ध और भड़का
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ईरान-इजराइल तनाव के बीच कुवैत भी निशाने पर; इराकी समूह का दावा—24 घंटे में अमेरिका के 23 ठिकानों पर हमले
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने नया मोड़ ले लिया है। मंगलवार रात कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे एयरपोर्ट परिसर में स्थित एक फ्यूल टैंक में आग लग गई। कुवैत के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि तत्काल आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किए गए और आग पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं।
हालांकि शुरुआती जानकारी में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इस हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। कुवैत की सेना ने दावा किया है कि उसने कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। नेशनल गार्ड के अनुसार, पांच ड्रोन मार गिराए गए हैं।
इस बीच, इराक के उग्रवादी संगठन “इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक” ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में अमेरिका से जुड़े 23 ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान का पूरा आकलन अभी सामने नहीं आया है।
मध्य पूर्व में जारी इस संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। लेबनान से हिजबुल्लाह द्वारा इजराइल पर रॉकेट हमले किए गए, जबकि गाजा में भी हवाई हमलों की खबरें सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति “एस्केलेशन ट्रैप” की ओर बढ़ रही है, जिसमें छोटे हमले बड़े युद्ध में बदल सकते हैं।
ईरान में अब तक 1,500 से अधिक लोगों की मौत और 18 हजार से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। मृतकों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जिससे मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने तनाव कम करने की अपील की है, वहीं वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर दिखने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे के कारण तेल और गैस सप्लाई बाधित होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष जल्द नहीं थमा, तो इसके आर्थिक और रणनीतिक परिणाम पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं और हालात लगातार बदल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब संभावित कूटनीतिक समाधान पर टिकी है।
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कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, फ्यूल टैंक में लगी आग; मिडिल ईस्ट में युद्ध और भड़का
अंतराष्ट्रीय न्यूज
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने नया मोड़ ले लिया है। मंगलवार रात कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे एयरपोर्ट परिसर में स्थित एक फ्यूल टैंक में आग लग गई। कुवैत के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि तत्काल आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किए गए और आग पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं।
हालांकि शुरुआती जानकारी में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इस हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। कुवैत की सेना ने दावा किया है कि उसने कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। नेशनल गार्ड के अनुसार, पांच ड्रोन मार गिराए गए हैं।
इस बीच, इराक के उग्रवादी संगठन “इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक” ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में अमेरिका से जुड़े 23 ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान का पूरा आकलन अभी सामने नहीं आया है।
मध्य पूर्व में जारी इस संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। लेबनान से हिजबुल्लाह द्वारा इजराइल पर रॉकेट हमले किए गए, जबकि गाजा में भी हवाई हमलों की खबरें सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति “एस्केलेशन ट्रैप” की ओर बढ़ रही है, जिसमें छोटे हमले बड़े युद्ध में बदल सकते हैं।
ईरान में अब तक 1,500 से अधिक लोगों की मौत और 18 हजार से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। मृतकों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जिससे मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने तनाव कम करने की अपील की है, वहीं वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर दिखने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे के कारण तेल और गैस सप्लाई बाधित होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष जल्द नहीं थमा, तो इसके आर्थिक और रणनीतिक परिणाम पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं और हालात लगातार बदल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब संभावित कूटनीतिक समाधान पर टिकी है।
