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GSLV-F17 की सफल उड़ान पर PM मोदी ने ISRO को दी बधाई, बताया भारत की बढ़ती अंतरिक्ष ताकत का संकेत
भारत
EOS-05 को निर्धारित कक्षा में पहुंचाने के बाद प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में ISRO और निजी उद्योग के बढ़ते सहयोग को भी रेखांकित किया।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के GSLV-F17 मिशन की सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बधाई दी। उन्होंने EOS-05 उपग्रह के सफल प्रक्षेपण को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती तकनीकी क्षमता को रेखांकित किया।
GSLV-F17 ने 4 सितंबर को तड़के 2:55 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी। रॉकेट ने Advanced Earth Observation Satellite-05 यानी EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (Sub-GTO) में सफलतापूर्वक स्थापित किया। यह GSLV की 19वीं उड़ान थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में मिशन की सफलता को ISRO की उपलब्धि और देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि EOS-05 का सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में उत्कृष्टता, नवाचार और बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है।
EOS-05 मिशन क्यों अहम है
ISRO के अनुसार, EOS-05 भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी अवलोकन के लिए तैयार किया गया है। उपग्रह को आगे अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचने के लिए ऑर्बिट-रेजिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा।
मिशन की एक और खासियत इसका वजन है। ISRO प्रमुख वी. नारायणन के अनुसार, करीब 2,367 किलोग्राम वजनी EOS-05 GSLV द्वारा इस तरह की कक्षा में पहुंचाया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है। उपग्रह के कक्षा में पहुंचने के बाद उसकी स्थिति सामान्य बताई गई। जियोसिंक्रोनस कक्षा में पहुंचने के बाद EOS-05 से पृथ्वी की लगातार निगरानी से जुड़ी क्षमताओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है। करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से काम करने वाली ऐसी प्रणाली व्यापक क्षेत्र की निगरानी और इमेजिंग में उपयोगी हो सकती है।
PM मोदी ने निजी उद्योग की भागीदारी भी बताई
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में केवल लॉन्च की तकनीकी सफलता का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने अंतरिक्ष कार्यक्रम में ISRO और भारतीय निजी उद्योग के बीच बढ़ती साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। मोदी के अनुसार, सरकारी अंतरिक्ष एजेंसी और उद्योग के बीच बढ़ता सहयोग देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ताकत और व्यापक स्तर दे रहा है। यह साझेदारी भारत के पूरे स्पेस इकोसिस्टम में क्षमताओं के विस्तार में भूमिका निभा रही है। ISRO ने भी मिशन की सफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि GSLV-F17 ने EOS-05 को उसकी निर्धारित Sub-GTO कक्षा में पहुंचा दिया है
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