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नेपाल ने भारत से मुआवजे की मांग से किया इनकार, विदेश मंत्री ने साफ की स्थिति
अंतराष्ट्रीय न्यूज
विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा- नेपाल की अपील किसी एक देश से भुगतान की नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हिमालयी समुदायों के लिए वैश्विक सहयोग की है।
नेपाल ने भारत से जलवायु संबंधी मुआवजा मांगने की खबरों को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने स्पष्ट किया कि न तो उन्होंने और न ही नेपाल के विदेश मंत्रालय या सरकार ने भारत से किसी तरह के मुआवजे की मांग की है। नेपाल का मुद्दा किसी एक देश से वित्तीय भुगतान हासिल करना नहीं है। उनका कहना है कि हाल की विनाशकारी बाढ़ को जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभाव के संदर्भ में देखा जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हिमालयी क्षेत्रों पर पड़ रहे असर को समझना चाहिए।
पहले के बयानों के बाद आया स्पष्टीकरण
यह सफाई ऐसे समय आई है जब नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद विदेश मंत्री के पहले के बयानों को भारत, चीन और अमेरिका से जलवायु मुआवजे की मांग के तौर पर रिपोर्ट किया गया था। 2 सितंबर की रिपोर्टों में खनाल के हवाले से कहा गया था कि नेपाल आपदा के बाद मिलने वाली सहायता को केवल राहत के रूप में नहीं, बल्कि जलवायु संकट से जुड़े दायित्व के नजरिए से देख रहा है। अब खनाल ने कहा है कि उनकी बात का आशय किसी विशिष्ट देश से मुआवजा मांगना नहीं था। उन्होंने जोर दिया कि नेपाल का आग्रह वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को स्वीकार करने और छोटे तथा संवेदनशील देशों के लिए समर्थन बढ़ाने से जुड़ा है।
भारत, चीन और नेपाल के लिए साझा चुनौती
खनाल ने हिमालयी क्षेत्र में भारत, चीन और नेपाल की भौगोलिक और पर्यावरणीय समानताओं का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक तीनों देश जलवायु परिवर्तन के असर का सामना कर रहे हैं, इसलिए आपदा से निपटने और भविष्य की तैयारी के लिए क्षेत्रीय सहयोग जरूरी है। विदेश मंत्री ने कहा कि नेपाल चाहता है कि जलवायु संकट को किसी एक घटना तक सीमित करके न देखा जाए। उनका जोर लंबे समय में बढ़ते तापमान और बदलते जलवायु प्रभावों से प्रभावित समुदायों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर है।
भारत की राहत मदद का भी किया जिक्र
खनाल ने आपदा के बाद भारत की ओर से मिली तत्काल सहायता के लिए आभार जताया। उन्होंने बताया कि भारत ने राहत सामग्री, बचाव उपकरण और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई तथा दोनों देशों के अधिकारी जरूरत के मुताबिक संपर्क में हैं। भारत की ओर से नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए कई राहत उड़ानें भेजी गई हैं। इनमें अस्थायी आश्रय सामग्री, दवाइयां, सोलर लैंप, पंप, जनरेटर और अन्य जरूरी सामान शामिल रहे हैं। बाद में भारत ने विशेषज्ञ बचाव दल और मेडिकल सामग्री भी भेजी।
नेपाल का अब क्या रुख है?
नेपाल के विदेश मंत्री के ताजा बयान के मुताबिक काठमांडू किसी एक देश को अलग से मुआवजे के लिए जिम्मेदार ठहराने की स्थिति में नहीं है। उनका जोर जलवायु परिवर्तन के कारण संवेदनशील देशों पर पड़ रहे असर को वैश्विक स्तर पर उठाने और हिमालयी क्षेत्र में साझा तैयारियों को मजबूत करने पर है।
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